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हिन्दुस्तान का सालाना सकल राजस्व 1294 करोड़, फिर भी छठी कैटेगिरी

हिन्दुस्तान समाचार पत्र लगातार झूठ पर झूठ बोलने पर आमादा है। हिन्दुस्तान ने मजीठिया का लाभ देने से बचने के लिए अपने को गलत व मनमाने तरीके से 6वीं कैटेगिरी में दर्शाया है जबकि ये अखबार नंबर वन कैटेगिरी में आता है। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के संबंध में भारत सरकार से जारी गजट के पृष्ठ संख्या 11 पर खंड 2 के उपखंड (क) में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि किसी भी समाचार पत्र प्रतिष्ठान की विभिन्न इकाइयों/शाखाओं/कंपनियों को समाचार पत्र की एकल इकाई ही माना जाएगा, चाहे उनके नाम अलग-अलग ही क्यों न हों।

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हिन्दुस्तान समाचार पत्र लगातार झूठ पर झूठ बोलने पर आमादा है। हिन्दुस्तान ने मजीठिया का लाभ देने से बचने के लिए अपने को गलत व मनमाने तरीके से 6वीं कैटेगिरी में दर्शाया है जबकि ये अखबार नंबर वन कैटेगिरी में आता है। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के संबंध में भारत सरकार से जारी गजट के पृष्ठ संख्या 11 पर खंड 2 के उपखंड (क) में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि किसी भी समाचार पत्र प्रतिष्ठान की विभिन्न इकाइयों/शाखाओं/कंपनियों को समाचार पत्र की एकल इकाई ही माना जाएगा, चाहे उनके नाम अलग-अलग ही क्यों न हों।

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इसके बावजूद हिन्दुस्तान अखबार कंपनी का Classification गलत व मनमाने तरीके से अपने आप करने Lower कैटेगिरी में दर्शा रहा है। उदाहरण के तौर पर हिन्दुस्तान की बरेली यूनिट 10 अक्टूबर 2009 को खुली। मजीठिया मामले में कंपनी केवल अपनी इसी यूनिट के राजस्व के आधार पर कैटेगिरी निर्धारित कर रही है। यानि वर्ष  2008-09 का 72 लाख, वर्ष 2009-10 का 2.72 करोड़ सकल राजस्व दर्शा रही है।

जबकि हिन्दुस्तान अखबार की मदर संस्था एचटी मीडिया लिमिटेड के वर्ष 2007-08, वर्ष 2008-09 व वर्ष 2009-10 के सकल राजस्व के औसत राजस्व से हिन्दुस्तान समाचर पत्र की कैटेगिरी तय होगी। एचटी मीडिया लिमिटेड ने FORM 23 ACA जो प्रत्येक वर्ष दाखिल किया है, उसमें वर्ष 2007-08 का 1226 करोड़ 91 लाख 84 हजार, वर्ष 2008-09 का 1355 करोड़ 77 लाख 17 हजार, वर्ष 2009-10 का 1299 करोड़ 11 लाख 60 हजार सकल राजस्व प्राफिट एंड लॉस एकाउंट में दर्शाया है। इस आधार पर कंपनी का सकल राजस्व 1294 करोड़ 60 लाख 20 हजार 333 रुपये होता है। कंपनी नंबर वन कैटेगिरी में आती है।

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मजीठिया देने से बचने के लिए हिन्दुस्तान अखबार को अपने को अमर उजाला से एक पायदान नीचे 6वीं कैटेगिरी का बताने में भी कोई शर्मिंदगी नहीं है। अमर उजाला भी अपनी सभी यूनिटें अलग-अलग कंपनी की दर्शाकर 5वीं कैटेगिरी में दर्शाकर कर्मचारियों के हकों पर डाका डालने पर आमादा है।

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