राजस्थान पत्रिका प्रबंधन से श्रम विभाग ने पूछा- क्यों नहीं दिया मजीठिया, कारण बताओ

राजस्थान पत्रिका के एमडी को श्रम विभाग ने नोटिस भेजकर उपस्थित होने को कहा

जयपुर। सर्वोच्च न्यायालय के मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में 19 जून को दिए गए फैसले के बाद पत्रकारों की उम्मीदों को झटका जरूर लगा था, लेकिन इस फैसले के बाद पत्रकारों की उम्मीदों को नए पंख भी मिल गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर के श्रम कार्यालयों में मजीठिया वेज बोर्ड को हल्के में नहीं ले रहे हैं। लेबर विभाग को लेकर आम धारणा है कि यहां सालों साल मामले ​खिंचते चले जाते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद श्रम विभाग को लेकर मजबूरी में ही सही सक्रिय होना पड़ रहा है।

राजस्थान के श्रम विभाग के अतिरिक्त श्रम आयुक्त राजीव किशोर सक्सेना ने कर्मचारियों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राजस्थान पत्रिका के एमडी को नोटिस जारी कर कारण पूछा है। नोटिस में माननीय सुप्रीम कोर्ट के 14 मार्च 2011 और 19 जून 2017 के आदेशों का हवाला देते हुए पूछा गया है कि आपने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना की है या नहीं। यदि नहीं की है, तो 10 अगस्त को शाम 4 बजे श्रम विभाग में उपस्थित होकर कारण बताएं।

राजस्थान पत्रिका के कर्मचारियों की ओर से दो—ढाई साल पहले से ही श्रम विभाग में शिकायतें दर्ज हैं, लेकिन इन शिकायतों पर अब तक कोई कार्यवाही होती नहीं दिख रही थी। ताजा मामले में राजस्थान पत्रिका के जयपुर मुख्यालय में कार्यरत उपसंपादक विपुल शर्मा और बीकानेर में कार्यरत वरिष्ठ उपसंपादक विनोद कुमार बालोदिया की शिकायतों को भी श्रम विभाग ने पूर्व में दर्ज शिकायतों के साथ संलग्न करते हुए राजस्थान पत्रिका प्रबंधन से जवाब मांगा है। अब राजस्थान पत्रिका प्रबंधन चाहे जो भी जवाब दे, लेकिन मजीठिया तो देना ही होगा।

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Comments on “राजस्थान पत्रिका प्रबंधन से श्रम विभाग ने पूछा- क्यों नहीं दिया मजीठिया, कारण बताओ

  • amrit kumar says:

    what about Indian Express Indian express has failed to imlement full majithaia wage board but no action taken by labour commissioner against indian express

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  • KRITI NATH JHA says:

    What about the Statesman Newspaper, which has too not implemented ‘Majithia Wage Board’ for Journalists and the non-journalists are fighting for their dues in the High Court as the wage board was implemented in half-measure subsequently harassing them in other forms. Shame on the statesman newspaper management for their crafty approach….

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