पत्रकार ने अमित शाह को मजीठिया वेज बोर्ड के सवाल पर घेरा तो बगले झांकने लगे

जयपुर में आज अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस में मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर कुछ पत्रकारों ने सवालों का ऐसा गोला दागा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बगले झांकने लगे और बड़ी बेशर्मी से अमित शाह ने कह दिया कि उन्हें मजीठिया वेजबोर्ड के बारे में कुछ नहीं मालूम। अमित शाह पर सवालों …

गुलाब कोठारी जी, मोहन भागवत के अलावा और लोगों से भी मिला करिए, ज्ञान में वृद्धि होगी!

आदरणी गुलाब कोठारी जी मालिक और प्रधान संपादक, राजस्थान पत्रिका आरक्षण को लेकर आपने एक सर्वे किया है। आपके अखबार को लेकर एक रिसर्च मैंने भी की है। हाल ही में आपके अखबार के प्रथम पृष्ठ पर एक सर्वे छपा। इसमें बताया गया था कि आरक्षण से किस प्रकार समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है। …

मजीठिया मामले में पत्रिका प्रबंधन को आज फिर मुंहकी खानी पड़ी!

Vijay Sharma : पत्रिका प्रबन्धन को आज फिर मुंहकी खानी पड़ी। प्रबन्धन ने 190 कर्मचारियों के मामले में राजस्थान हाई कोर्ट से स्टे ले कर उसे लम्बा खींचने की कोशिश कर रहा था। लेकिन पत्रिका प्रबन्धन की ये कोशिश नाकाम हो गई और आज राजस्थान हाई कोर्ट ने स्टे ऑर्डर खारिज करते हुए लेबर कोर्ट …

चुनाव से पहले सरकार ने पत्रिका के ब्यूरो चीफ राजकुमार सोनी का तबादला कोयम्बटूर कराया

Ambrish Kumar : छतीसगढ़ से मुझे वर्ष 2003 में अपने एक्सप्रेस प्रबंधन ने जनसत्ता और इंडियन एक्सप्रेस की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिल्ली भेजने का आदेश दिया था. तब अपने पर कांग्रेस विरोध का आरोप था. भाजपाई सब साथ थे. कांग्रेस की सरकार थी. खबरों को लेकर अजीत जोगी से ठनी हुई थी. किसने दबाव …

ऋतिक रोशन ने पत्रिका और भास्कर को सरेआम लताड़ा, देखें ट्वीट

अभिनेता ऋतिक रोशन के बारे में अनर्गल खबर छापना पत्रिका और भास्कर जैसे बड़े अखबारों की वेबसाइटों को भारी पड़ा. ऋितिक रोशन ने इन दोनों अखबारों की वेबसाइटों के लिंक को सबके सामने यानि पूरे सोशल मीडिया की भीड़ की मौजूदगी में शेयर कर इन मीडिया हाउसों की क्लास ले ली. Share on:

राजस्थान पत्रिका और राजस्थान सरकार में कई साल से ठनी है, पढ़ें गुलाब कोठारी को जोरदार संपादकीय

Dilip Khan : राजस्थान पत्रिका और राजस्थान सरकार के बीच बीते कई साल से ठनी हुई है। पहले सबकुछ ठीक चल रहा था, फिर किसी बात से चिढ़कर सरकार ने विज्ञापन देना बंद कर दिया। गुलाब कोठारी ने उस वक़्त भी तीखा संपादकीय लिखा था। फिर सरकारी अनुदान से चल रहे गोशालों में दर्जनों गायों के मरने वाली ख़बर ने सरकार को और परेशान कर दिया। राजस्थान पत्रिका ने इस पर कई दिनों तक सीरीज चला दी।

हिट्स-लाइक के लिए अश्लीलता पर उतारू पत्रिका ग्रुप का पोर्टल, देखें ये हेडिंग और फोटो

एक दौर था जब लोग पत्रकारों के ईमानदार होने और निष्पक्ष पत्रकारिता के शानदार प्रयोगों के उदारहण दिया करते थे। बदलते समय के साथ साथ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया का भी स्वरूप और लेखन बदल गया है। अब पत्रकारिता के नाम पर बड़े बैनर के वेब पोर्टल तक ज्यादा से ज्यादा हिट्स और लाइक के चक्कर में अश्लीलता परोसने में जरा भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।

‘राजस्थान पत्रिका’ अखबार का एक और कारनामा… ‘श्रीमती राहुल गांधी’ छाप डाला!

सीधी बात तो यह है कि ‘पत्रिका’ अखबार खुद में ब्लंडर्स का स्पेशल एडिशन है। इसी फेहरिस्त में चुरु से निकलने वाला ‘पत्रिका’ का एडिशन भी पीछे नहीं रह गया है। दरअसल 15 अगस्त के मौके पर कांग्रेस पार्टी की ओर से मिले बड़े से विज्ञापन में वहां के होनहार कर्मियों ने सोनिया गांधी के साथ राहुल गांधी को भी “श्रीमती” लगाकर बड़े में छाप दिया। अब पत्रिका या कोठारी जी को गलतियां भूलकर आगे बढ़ने की आदत होगी लेकिन उनका क्या, जिनको लगता है कि गलतियां सबक लेने के लिए होती हैं, न कि एक लेवल ऊपर होकर फिर से करने की चीज।

राजस्थान पत्रिका प्रबंधन से श्रम विभाग ने पूछा- क्यों नहीं दिया मजीठिया, कारण बताओ

राजस्थान पत्रिका के एमडी को श्रम विभाग ने नोटिस भेजकर उपस्थित होने को कहा

जयपुर। सर्वोच्च न्यायालय के मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में 19 जून को दिए गए फैसले के बाद पत्रकारों की उम्मीदों को झटका जरूर लगा था, लेकिन इस फैसले के बाद पत्रकारों की उम्मीदों को नए पंख भी मिल गए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर के श्रम कार्यालयों में मजीठिया वेज बोर्ड को हल्के में नहीं ले रहे हैं। लेबर विभाग को लेकर आम धारणा है कि यहां सालों साल मामले ​खिंचते चले जाते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद श्रम विभाग को लेकर मजबूरी में ही सही सक्रिय होना पड़ रहा है।

‘पत्रिका’ अखबार ने जिंदा मंत्री को ‘मार’ कर श्रद्धांजलि तक दिलवा दिया!

राजस्थान पत्रिका के जालोर एडिशन में 10 अगस्त को ‘पूर्व केन्द्रीय मंत्री को श्रद्धांजलि दी’’ शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई. इसमें राजस्थान के जीते-जागते विधायक व मंत्री को भाजपा पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि दी जाने संबंधी खबर प्रकाशित कर दी गई. गौरतलब है कि बुधवार को दिल्ली में अजमेर सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सांवर लाल जाट का निधन हो गया. इसकी खबरें सभी टीवी न्यूज चैनल्स पर पूरे दिन चलीं और सभी अखबारों में फ्रंट पेज पर भी छपीं.

पत्रिका, मंदसौर आफिस में कार्यरत मुरली मनोहर शर्मा की अमानवीय और घटिया हरकत

Shri Maan ji, mei Mandsaur Patrika me circulation back office or account ka work dekhta thha. 25.01.2016 Ko muje Murli Manohar Sharma davra cabin me Bulaya Gaya. Khaa Gaya ki kal se aap Ko nokari par nahi aana he. Mene uska reson puchha to bole koi reson nahi hei. Mene Khaa thik hei, mujhe letter de do aap to me kal se office nahi ayunga. Lekin letter Dene se bhi Mana kar diya.

भूरिया ने ऐसे अखबार के पक्ष में संसद में आवाज उठाई जिसे कर्मचारी शोषण में गोल्ड मेडल मिलना चाहिए

आदरणीय भूरिया जी,

नमस्कार,

सुबह-सुबह राजस्थान पत्रिका के प्रथम पेज पर आपकी मीडिया के दमन को लेकर चिंता के विषय में पढ़ा। अच्छा लगा। मीडिया के अधिकारों की बात होनी चाहिए। पुरजोर तरीके से मीडिया की दबती आवाज, अभिव्यक्ति, आजादी आदि-आदि के लिए लड़ना चाहिए। पर, आश्चर्यजनक तो यह है कि आप संपूर्ण मीडिया के लिए लड़े नहीं। एक विशेष अखबार की आपको चिंता हुई। कोई विशेष कारण। आखिर क्या मजबूरी थी? आपने कहा, अखबार के विज्ञापन रोकना लोकतंत्र विरोधी है। यह बात हजम नहीं हुई।

पत्रिका के उज्जैन संस्करण की हालत खराब, कर्मी दुखी, कइयों ने दिया इस्तीफा

राजस्थान पत्रिका के उज्जैन संस्करण के इन दिनों हालात खराब चल रहे हैं। यहां डेस्क पर काम करने वाले लोगों की संख्या कम होती जा रही है। लगता है प्रबंधन को इस बड़े संस्करण की फिक्र ही नहीं है। पिछले दिनों अवकाश ना मिलने के कारण परिवार को समय नहीं दे पा रहे डेस्क के राकेश बैंडवाल और सूरजभान चंदेल ने अखबार को टाटा कह दिया। वहीं आईटी विभाग के शम्मी जोशी भी इंदौर के आईटी हेड महेंद्र खींची के व्यवहार के कारण अखबार छोड़ गए। जोनल एडिटर के एक आदेश के बाद संपादकीय कार्य बखूबी अंजाम देने वाले महेश बागवान को आईटी का काम सौंप दिया गया जो किसी को हजम नहीं हो रहा।

मजीठिया वेज बोर्ड न देने के लिए अपने कर्मियों को प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर रहा राजस्थान पत्रिका प्रबंधन!

वाचमैनों की तरह घूम घूम कर नौकरी करेंगे पत्रकार…. मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतन, भत्ते और सुविधाएं न देना पड़े इसके लिए अखबार मालिक इस हद तक जा रहे हैं कि अपने ही कर्मचारियों को प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर दे रहे हैं और ये कर्मचारी बेचारे बिलकुल एक गुलाम की तरह हंटर के खौफ से प्लेसमेंट एजेंसी में काम करने को मजबूर हैं। इस तरह का मामला सामने आया है देश के एक बड़े समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में।

क्या पत्रिका का प्रसार बहुत तेजी से गिर रहा है? देखें ये अंदर के आंकड़े

पत्रिका ग्रुप के ये खुफिया दस्तावेज वहीं के कुछ साथियों ने भड़ास को भेजा है. नीचे दोनों दस्तावेज प्रकाशित किए जा रहे हैं. इन इंटर आफिस कम्युनिकेशन से पता चलता है कि पत्रिका अखबार का प्रसार ज्यादातर जगहों पर गिर रहा है…

आखिरकार पत्रिका प्रबंधन ने दिया कर्मचारी का रोका वेतन

पत्रिका प्रबंधन को एक कर्मचारी ने आखिरकार झुकाते हुए अपनी शेष वेतन राशि ले ली। दरअसल टीएडीए व वीक आफ का पैसा मांगने पर छग के सूरजपुर जिले के रिपोर्टर रक्षेन्द्र प्रताप सिंह को छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संपादक ने समाचार भेजने से मना कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर कर्मचारी ने रिजाइन कर अपनी सैलरी व वीक आफ के पैसे मांगे।

अजमेर में भास्कर और पत्रिका ने दाम बढ़ाया तो अखबार वितरकों ने शुरू किया बहिष्कार, नवज्योति की बल्ले बल्ले

अजमेर में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने एक राय होकर विगत 22 फरवरी को अचानक अखबार की कीमत 4.50 रुपए प्रति कॉपी कर दी। उस दिन तो हॉकर ने अखबार उठा लिया लेकिन अगले दिन उन्होंने बढ़ी कीमत वापस लेने की मांग करते हुए अखबार उठाने से मना कर दिया। उस दिन से वे लगातार दोनों अखबारों का बहिष्कार कर रहे हैं। इससे अखबार प्रबंधन में हड़कम्प मचा हुआ है।

पत्रिका ने अपने कर्मी को बर्खास्त किया तो कर्मी ने नोटिस भिजवाया और लेबर आफिस में शिकायत दर्ज कराई

राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार पत्रिका के ग्वालियर संस्करण के सरकुलेशन डिपार्टमेंट में कार्यरत शैलेंद्र सिंह को प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के संस्थान से टर्मिनेट कर दिया. इससे दुखी महेंद्र ने प्रबंधन को वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भिजवाया है और लेबर आफिस में शिकायत दर्ज कराई है. इस प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज नीचे दिए जा रहे हैं…

पिता की तेरहवीं में छुट्टी लेकर गए फोटो जर्नलिस्ट की चार दिन की तनख्वाह काट ली

राजस्थान पत्रिका समूह में उत्पीड़न और प्रताड़ना की ढेर सारी कहानियां सामने आती रही हैं. एक ताजे घटनाक्रम के मुताबिक पत्रिका ग्वालियर के फोटो जर्नलिस्ट शशि भूषण पाण्डेय अपने पिता की तरेहवीं में हिस्सा लेने के लिए अवकाश पर गए थे. जब वे लौटकर आए तो पता चला उनका अवकाश मंजूर नहीं किया गया है और उनके वेतन से चार दिन की सेलरी काट ली गई है. इससे आहत पांडेय ने प्रबंधन को पत्र लिखकर न्याय करने की गुहार की है.

पत्रिका समूह, प्रधान संपादक, खुला खत, 22 दिसंबर की लंबी रात और कोहिनूर कंडोम!

माननीय प्रधान संपादक,

पत्रिका समूह

दिनांक 22 दिसंबर 2015 को आपके अखबार के पेज 7 पर कोहिनूर कॉन्डोम के विज्ञापन जिसकी हैडिंग ’22 दिसम्बर है साल की सबसे लम्बी रात, इसे दें कुछ एकस्ट्रा टाईम’ तथा सब हैडिंग ‘इस रात की सुबह नहीं’ सहित एक युगल का फोटो भी है…. देखा और पढ़ा। एक बार तो सोचा उसी समय आपको यह पत्र लिखूं, लेकिन फिर सोचा 22 दिसंबर के बाद लिखूं, जिससे आपकी और आपके जैसी सोच वालों की रात खराब ना हो! बहुत ही शर्मनाक बात है कि आए दिन आप अपनी लेखनी द्वारा ज्ञान झाड़ते रहते हैं, कई बार व्याख्यानों में भी ज्ञान ढोल आते हैं और अपने अखबार में क्या छप रहा है, उसका पता ही नहीं।

आईपीएस सिकेरा से पत्रिका के संपादक महेंद्र ने माफीनामा छापने का वादा किया (सुनें टेप)

Navniet Sekera : भगवान से भी तेज UP.Patrika.com … अभी अभी एक नयी जानकारी आई है , कि उपरोक्त न्यूज़ दिनाँक Patrika news network Posted: 2015-12-25 17:07:54 IST से स्पष्ट है कि यह न्यूज़ 25 दिसंबर को शाम को 5 बजकर 7 मिनट 54 वें सेकंड में अपलोड की गयी…

भास्कर के बाद अब पत्रिका वालों ने की बदमाशी, आईपीएस नवनीत सिकेरा के बारे में सरासर झूठी खबर छाप दी

भास्कर वालों ने पाकिस्तानी झंडा फहराए जाने की झूठी खबर छापकर अपनी थू थू सोशल मीडिया पर कराई तो इस काम में भला राजस्थान पत्रिका क्यों पीछे रहता. पत्रिका वालों के यूपी के पत्रकारों ने आईपीएस नवनीत सिकेरा के बारे में बिलकुल उलटी खबर छाप दी है. खुद नवनीत सिकेरा ने सोशल मीडिया पर इस झूठ का पर्दाफाश कर अपना पक्ष रखा है. इसके बाद लोग सिकेरा की पोस्ट को शेयर लाइक कर पत्रिका वालों को इस किस्म का सरासर झूठ छापने के लिए लानत भेज रहे हैं. पहले पढ़िए सिकेरा ने क्या लिखा है और उनके बार में पत्रिका में खबर क्या छपी है….

टीए डीए और वीकली आफ मांगने पर नौकरी से निकाला, मीडियाकर्मी पहुंचा श्रम विभाग, पढ़ें शिकायती पत्र

प्रति,
जिला श्रम पदाधिकारी
जिला – सूरजपुर (छत्तीसगढ़)
विषय- उचित कार्यवाही हेतु,
आवेदक – रक्षेन्द्र प्रताप सिंह
ग्राम पोस्ट बड़सरा
जिला सूरजपुर (छग)

विरुद्ध
फोर्ट फोलियोज प्रायवेट लिमिटेड
रजिस्टर्ड ऑफिस: 217, लक्ष्मी काम्पलेक्स, एमआई रोड, जयपुर-302001 राजस्थान
2. क्षेत्रीय संपादक, दैनिक पत्रिका कार्यालय
मंगल भवन, लिंक रोड बिलासपुर

महोदय,

आवेदक निम्नांकित कथन करता है –

पत्रिका अखबार के गरिष्ठ, वरिष्ठ और कनिष्ठ संपादकों को 22 दिसंबर की कोहिनूर कंडोम वाली लंबी रात के अनुभव पर लिखना चाहिए!

कंडोम का विज्ञापन तो ठीक है लेकिन क्या इसे अब ऐसे बेचा जाएगा? और, क्या इसे ऐसे बेचने के प्रयास को अखबार वाले यूं ही सफल हो जाने देंगे? माना कि गंदा है पर धंधा है, लेकिन कितना गंदा है, क्या बताएगा या तू पूरा अंधा है? पत्रिका अखबार में यह विज्ञापन छपा है कोहिनूर कंडोम का. देख लीजिए.

आरके मार्बल्स व वंडर सीमेंट के यहां छापेमारी की खबर को खा गया राजस्थान पत्रिका अखबार!

राजस्थान का सबसे बड़ा मीडिया समूह होने का दावा करने वाला अखबार राजस्थान पत्रिका प्रदेश की सबसे बड़ी खबर को खा गया. खान विभाग घूस कांड के क्रम में दो कंपनियों पर छापे की न्यूज को राजस्थान पत्रिका ने नहीं छापा. राजस्थान खान विभाग घूस काण्ड के बाद से ही आरके मार्बल्स और सहयोगी कंपनी वंडर सीमेंट जांच के घेरे में हैं. इसी क्रम में आयकर विभाग ने समूह के सियासी रसूख को देखते हुए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस के 80 हथियार बंद जवानों के साथ गुप्त तरीके से एक साथ 4 राज्यों के 29 ठिकानों पर छापे मारे. इस छापेमारी के दौरान 7000 करोड़ की सम्पति दस्तावेज और 250 करोड़ नकद बरामद की.

देश को गुलाब कोठारी जैसे मनुवादियों से आज़ाद होना पड़ेगा

एक लेख दैनिक पत्रिका दिनांक 30 अगस्‍त 2015 को प्रकाशित लेख ‘’आरक्षण से अब आज़ाद हो देश’’ जिसके लेखक है श्री गुलाब कोठारी की प्रतिक्रिया में लिखी गई है। ग़ौरतलब है की यह लेख पत्रिका की जैकेट स्‍टोरी (मुख्‍य पेपर के मुख्‍य पत्र पर) के रूप में प्रकाशित हुआ था। इस लेख को प्रारंभ करने के पहले बता दू की श्री गुलाब कोठारी एक व्‍यवसायी है वे पत्रिका (पूर्व में इसका नाम राजस्‍थान पत्रिका था) के मालिक एवं प्रधान संपादक है। वे जैन धर्म से ताल्‍लुख रखते है इस लिहाज से वे अल्‍पसंख्‍यक की श्रेणी में आते है।

राजस्थान पत्रिका लखनऊ के संपादक बने महेंद्र सिंह

राजस्थान पत्रिका रायपुर (छत्तीसगढ़) के संपादक महेंद्र प्रताप सिंह का तबादला यूपी में हो गया है। उनको लखनऊ का संपादक बनाया गया है।

भास्कर छोड़ पत्रिका गए संतोष पांडेय

पानीपत : यहां भास्कर में कार्यरत संतोष पांडेय ने अखबार छोड़ दिया है। अब वह राजस्थान पत्रिका, जयपुर के साथ अपना आगे का कार्यकाल शुरू करने जा रहे हैं। वह इससे पूर्व सतना, वाराणसी, देहरादून, लखनऊ में मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। Share on:

राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर ने चारागाह की जमीन को पत्नी के नाम आवंटित करा लिया

अजमेर (राजस्थान) : जिले के सावर क्षेत्र में राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर सत्यनारायण कहार पर लाखों रूपयों की बेशकीमती चारागाह भूमि को अपने नाम आवंटित करवाने का आरोप लगा है। सत्यनारायण पूर्व में ग्राम पंचायत सदारा का उपसरपंच रह चुका है। तब भी यह पत्रिका का ही रिपोर्टर था।

गुलाब कोठारी का विरोध करने की सजा, राहुल शर्मा समेत कइयों का दूरदराज तबादला

राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी के खिलाफ उदयपुर में मजीठिया को लेकर विरोध-प्रदर्शन करने वाले पत्रकारों पर आखिर पत्रिका मैनेजमेंट ने गाज गिरा ही दी। पत्रिका मैनेजमेंट ने उदयपुर राजस्थान पत्रिका के डेस्क इंचार्ज राहुल शर्मा का तबादला कोयमबटूर कर दिया है। उनके अलावा विकास बाकोलिया सहित दो पत्रकारों को चार्जशीट दी गई है। कुल मिलाकर इनको भी देर-सवेर रवाना कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी उदयपुर के एक विवि में आए थे। यहां उनका सम्मान समारोह था। इसी दौरान उदयपुर पत्रिका के कुछ पत्रकारों ने कोठारी के खिलाफ जबर्दस्त प्रदर्शन किया।