डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित घर पर कांस्टेबल सुसाइड मामले का सच क्या है…

हमने डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित गोमतीनगर आवास पर कांस्टेबल अरुण कुमार की आत्महत्या के सम्बन्ध में अरुण कुमार के मामा बलराम चौधरी से बात की. उन्होंने हमें बताया कि वे पिछले करीब डेढ़ माह से लखनऊ में डीआईजी गोरखपुर के मकान पर रह रहे थे जिनसे वे अपने तीन मोबाइल नंबर 098076-89970, 091258-66210, तथा 073983-47607 से लगभग रोज बात करते थे. आरआई, गोरखपुर देवी दयाल ने बताया कि वे डीआईजी गोरखपुर कार्यालय से सम्बद्ध थे और दिनांक 23 नवम्बर को डाक लेकर लखनऊ गए थे. वहीँ इस बारे में डीआईजी रेंज कार्यालय ने बताया कि अक्टूबर 2014 में उनकी उस कार्यालय से सम्बद्धता समाप्त हो गयी थी.

अतः हमने प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को पत्र लिख कर उनके आखिरी दो महीने में प्रत्येक दिन के निवास के सम्बन्ध में वास्तविक स्थिति की जांच कराने और इसमें गड़बड़ी पाए जाने पर सम्बंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की मांग की है. साथ ही हमने सिपाही को सीनियर ऑफिसर के आदेश पर लखनऊ में होने के कारण उन्हें पूरी तरह ड्यूटी पर मानते हुए उनके परिवार वालों को पूरा पेंशन और अन्य लाभ देने की मांग की है. हमने इस मामले को एक नजीर के रूप में देखते हुए पूरे प्रदेश में ऐसे सभी मामलों का भौतिक सत्यापन कराने और सभी अधिकारियों को ऐसा कदापि नहीं करने हेतु निर्देश देने की भी मांग की है.

सेवा में,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय- कांस्टेबल श्री अरुण कुमार चौधरी, तैनाती डीआईजी रेंज कार्यालय, गोरखपुर की आत्महत्या विषयक 

महोदय,

कृपया दिनांक  26/11/2014 को विभिन्न समाचारपत्रों में कांस्टेबल श्री अरुण कुमार चौधरी, तैनाती डीआईजी रेंज कार्यालय, गोरखपुर की आत्महत्या विषयक छपे समाचारों का सन्दर्भ ग्रहण करें जिसमे बताया गया था कि श्री चौधरी डीआईजी रेंज कार्यालय, गोरखपुर में नियुक्त हैं लेकिन वर्तमान डीआईजी रेंज, गोरखपुर डॉ संजीव गुप्ता के 1/171, विराम खंड, गोमतीनगर, लखनऊ स्थित आवास में उन्होंने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली.

समाचारपत्रों में यह भी लिखा था कि उन्हें अपनी तैनाती के स्थान गोरखपुर से अलग लखनऊ में डीआईजी गोरखपुर के आवास पर अनधिकृत रूप से रखा गया था जहां सोमवार रात्री 08.30 बजे यह घटना घटी. चूँकि हम पुलिस विभाग में अधीनस्थ अधिकारियों को आईपीएस सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत हितों में भारी मात्र में प्रयुक्त करने के खिलाफ एक लम्बे समय से कार्य कर रहे हैं, अतः आज हमने इस सम्बन्ध में अपने स्तर से मामले की पूरी पड़ताल की.

हमने इस विषय में मृत कांस्टेबल के बस्ती स्थित घर के लोगों का संपर्क ज्ञात किया तो हमें उनके पिता श्री आज्ञाराम और मामा श्री बलराम चौधरी के फोन नंबर 099364-86804 तथा 097924-24553 ज्ञात हुए. पिता श्री आज्ञाराम से बात नहीं हो पायी क्योंकि यह बताया गया कि वे बात करने की स्थिति में नहीं हैं. मामा श्री बलराम चौधरी ने हम अमिताभ तथा नूतन ठाकुर से विस्तार से वार्ता की और पूरी बात बतायी. उन्होंने बताया कि श्री अरुण कुमार अपने पिता के अकेले लड़के थे और उनकी दस साल की एक छोटी बहन है. उन्होंने यह भी बताया कि उनके भांजे डीआईजी रेंज, गोरखपुर के यहाँ तैनात थे. उन्होंने बताया कि डीआईजी साहब उनके भांजे को काफी स्नेह रखते थे और उनके भांजे भी उनकी प्रशंसा करते थे.

उन्होंने यह भी कहा कि उनके भांजे करीब एक-डेढ़ माह से लखनऊ में डीआईजी साहब के मकान पर रह रहे थे. उन्होंने बताया कि वे कागज़ पर डीआईजी साहब के ऑफिस में तैनात थे पर वास्तव में लखनऊ में डीआईजी साहब के मकान में रह रहे थे. वे कहते थे उन्हें इस घर पर कोई दिक्कत नहीं थी. उन्होंने बताया कि उनके भांजे के पास तीन मोबाइल फ़ोन नंबर 098076-89970, 091258-66210, तथा 073983-47607 थे. इन तीनों नंबर से श्री अरुण चौधरी लगभग हर दिन अपने मामा से बात करते थे. दिनांक 24/11/2014 को करीब 8.45 बजे रात उन्होंने फोन नंबर 073983-47607 से मामा से बात किया था जिसके बाद उनकी मौत हो गयी.

मामा ने बताया कि वे नहीं जानते कि उनके भांजे ने क्यों आत्महत्या कर ली क्योंकि ना तो वे डीआईजी साहब से परेशान थे और ना ही बहराइच में महिला आरक्षी पद पर तैनात अपनी पत्नी से. नूतन ठाकुर ने डीआईजी रेंज कार्यालय से बात की तो वहां फोन ड्यूटी पर आरक्षी श्री निरंजन ने कहा कि श्री अरुण की तैनाती पुलिस लाइन में थी, और उनकी डीआईजी कार्यालय में कोई तैनाती नहीं थी. उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2014 में उनकी डीआईजी रेंज कार्यालय से सम्बद्धता समाप्त हो गयी थी.

इसके विपरीत आरआई, पुलिस लाइन्स गोरखपुर श्री देवी दयाल ने मोबाइल नंबर 094544-02362 पर फोन करने पर बताया कि श्री अरुण कुमार की तैनाती पुलिस लाइन में थी लेकिन वे डीआईजी गोरखपुर कार्यालय में सम्बद्ध थे. उन्होंने यह भी कहा कि वे दिनांक 23/11/2014 को डाक ले कर लखनऊ गए थे जहां उनकी मौत हो गयी.

यहाँ कई महत्वपूर्ण प्रश्न स्वतः खड़े हो जाते हैं-

1. श्री अरुण कुमार की वास्तविक नियुक्ति/सम्बद्धता कहाँ थी?

2. श्री अरुण कुमार पिछले लगभग एक-डेढ़ माह से वास्तव में कहाँ रहे- क्या वे गोरखपुर में रहे अथवा लखनऊ में, और कितनी-कितनी अवधि तक?

3. क्या श्री अरुण कुमार की मृत्यु के बाद पुलिस लाइन्स गोरखपुर से उनकी डाक पर रवानगी दिखा दी गयी?

4. क्या इस मामले में वास्तव में श्री अरुण कुमार की कागज़ पर कहीं और तैनाती और कहीं और वास्तविक निवास की स्थिति बन रही है?

हम यह भी कहना चाहेंगे कि हमारी व्यक्तिगत जानकारी में यह अकेला दृष्टान्त नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश में अनेकानेक पुलिस अफसरों द्वारा ऐसा किया जा रहा है. ऐसा पुलिस कांस्टेबल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बारे में ख़ास कर हो रहा है. आप सहमत होंगे कि यह पूर्णतया नियमविरुद्ध है.

उपरोक्त के दृष्टिगत आपसे निम्न निवेदन है-

1. कृपया इस मामले में श्री अरुण कुमार चौधरी के आखिरी दो महीने में प्रत्येक दिन के निवास के सम्बन्ध में वास्तविक स्थिति की जांच कराने की कृपा करें और इसमें गड़बड़ी पाए जाने पर सम्बंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की कृपा करें

2. चूँकि श्री अरुण चौधरी की वरिष्ठ अफसरों के आदेशों के कारण अपनी नियुक्ति के स्थान से इतर मौत हुई, अतः उन्हें पूरी तरह ड्यूटी पर मानते हुए उनके परिवार वालों को पूरा पेंशन और अन्य मृत्य सम्बन्धी लाभ देने की कृपा करें

3. इस मामले को एक नजीर के रूप में देखते हुए पूरे प्रदेश में इस बात का भौतिक सत्यापन कराने की कृपा करें कि ऐसा और कहाँ-कहाँ हो रहा है कि कोई अधीनस्थ पुलिस अफसर कागज़ पर कहीं और तैनात है और वास्तव में अफसरों ने उन्हें कहीं और रख रखा है? ऐसे सभी मामलों को हमेशा के लिए समाप्त कराने की कार्यवाही कराने की कृपा करें

4. कृपया इस सम्बन्ध में सभी अधिकारियों को उचित निर्देश निर्गत करने की कृपा करें कि वे ऐसा कदापि नहीं करें कि कोई अधीनस्थ पुलिस अफसर कागज़ पर कहीं और तैनात है और वास्तव में अफसरों ने उन्हें कहीं और रख रखा हो.

डॉ नूतन ठाकुर
अमिताभ ठाकुर
लखनऊ

प्रतिलिपि- प्रमुख सचिव गृह, उत्तर प्रदेश को कृपया आवश्यक कार्यवाही हेतु



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