असली दबंग आईपीएस : जो न सीएम से डरा, न नेताओं से झुका (देखें वीडियो)

इसे असली दबंग कहते हैं. यह आईपीएस अफसर न सीएम से डरता है और न ही सीएम के पिता यानि नेताजी के धमकाने पर झुकता है. इस आईपीएस का नाम है अमिताभ ठाकुर. चाहें मायावती सीएम रहीं हों या अखिलेश यादव या फिर ये योगीराज, इस आईपीएस से सब डरते हैं. इस आईपीएस का खौफ इस कदर है कि इसकी एक शिकायत पर पूरा थाने का थाना सस्पेंड हो जाता है. गाजियाबाद के साहिबाबाद थाने का प्रकरण ताजा है जहां एक निर्दोष को पहले तो मारा जाता है फिर अनाम दिखाकर चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया जाता है.

जब इस मामले को पता अमिताभ ठाकुर को चलो तो उन्होंने इसकी शिकायत डीजीपी से की. पुलिस प्रशासन ने फौरन जांच कराकर थानेदार समेत आठ पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया. अमिताभ ठाकुर इस वीडियो में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के आवास के सामने निडर होकर धरना देते हुए दिख रहे हैं तो इसी वीडियो के लास्ट वाले पार्ट में अखिलेश के पिता और जाने माने नेता मुलायम सिंह यादव के धमकी भरे आडियो का खुलासा कर यह बता रहे हैं कि उन्हें किस तरह बड़े लोग अर्दब में लेने की कोशिश करते हैं लेकिन वह किसी के मंसूबे को कामयाब नहीं होने देंगे और सच्चाई की लड़ाई यूं ही लड़ते रहेंगे.

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

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भाजपा राज में भी अशोक खेमका और अमिताभ ठाकुर के साथ न्याय नहीं हुआ!

Surya Pratap Singh : मेरे सहयोगी अशोक खेमका, IAS ने आज ट्विटर पर निम्न विचार लिखा ….

“Honest officers do not complain of frequent transfers. Alternative is far worse. Sidelined without work and face multiple roving inquiries.”

-Ashok Khemka, IAS @AshokKhemka_IAS

आप क्या सोचते हैं कि ईमानदार अधिकारी इसी तरह frustrate होते रहेंगे इस देश में ? या फिर कोई way out है ? कांग्रेस ने तो नहीं, परंतु क्यों वर्तमान हरियाणा सरकार ने अशोक खेमका के साथ न्याय नहीं किया? बिना काम के क्यों sidelined रखा गया है? क्यों उनके ख़िलाफ़ झूँठी जाँचों का अंबार लगा है?

मैं अपने विषय में नहीं लिख रहा, मैं तो सेवानिवृत्त हो गया हूँ…शायद मेरे बारे में लिखने की अब कोई उपयोगिता नहीं, परंतु क्या उत्तर प्रदेश में भी अमिताभ ठाकुर IPS व अन्य ऐसे कई निष्ठावान अधिकारियों के साथ अभी तक न्याय हुआ है? क्या दाग़ी व भ्रष्ट अभी भी मलाईदार पदों पर जमे नहीं बैठे हैं…. यही सब दागी व भ्रष्ट क्यों पसंदीदा है सब नेताओं के?  लोकतंत्र में कब तक चलेगा यह सब? प्रतिभा व योग्यता को कब तक नकारा जाता रहेगा? एक लोकगीत के अंश का आनंद लें:

ई मेंहगाई, ई बेकारी…..नफ़रत कै फैली बीमारी,
दुःखी रहै जनता बेचारी, बिकी जात बा लोटा-धारी,
जियौ बहादुर, खद्दर धारी….
देसवा का कंगाल करत हौ, ख़ुद का मालामाल करत हौ…
तोहरन दम से चोर बज़ारी
जियौ बहादुर, खद्दर धारी….

यूपी के चर्चित आईएएस अधिकारी रहे सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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एयर इंडिया को खुद के निजीकरण और पीएमओ को पीएम की विदेश यात्रा के बारे में नहीं पता!

एयर इंडिया, जिसके निजीकरण के सम्बन्ध में पिछले दिनों लगातार चर्चा चल रही है, को अपने स्वयं के निजीकरण के सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं है. आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने एयर इंडिया से उसके निजीकरण के सम्बन्ध में उसके तथा अन्य कार्यालयों में हुए पत्राचार सहित निजीकरण प्रस्ताव विषयक समस्त अभिलेख देने का अनुरोध किया था. एयर इंडिया के एजीएम (ओए) एस के बजाज ने 11 जुलाई 2017 के अपने पत्र द्वारा बताया कि एयर इंडिया ने किसी प्रस्तावित निजीकरण के सम्बन्ध में किसी भी कार्यालय से कोई पत्राचार नहीं किया है और न ही उसे इस सम्बन्ध में कोई भी पत्र प्राप्त हुआ है. अतः उसे प्रस्तावित निजीकरण के सम्बन्ध में कोई सूचना नहीं है. नूतन के अनुसार यह आश्चर्यजनक है कि जिस कंपनी का निजीकरण प्रस्तावित है, वह ही इस पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया दिख रहा है.  

Air India has no info on its disinvestment plan

Air India, whose proposed privatization is in news recently, does not have any information in this regards. RTI activist Dr Nutan Thakur had requested Air India to provide the documents related with its proposed disinvestment, including those exchanged between Air India and different offices. SK Bajaj, AGM (OA), Air India told through his letter dated 11 July 2017 that Air India has not made any communication to any other officers nor has it received any communication from any of the departments in respect of the proposed disinvestment of Air India. Hence, it has no information to provide in this regards. As per Nutan, it is truly strange that the Company whose privatization is being planned, seems to be out of the loop in the process.

पीआईएल पर कोई कानूनी रोक नहीं- डीओपीटी  

भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) से आरटीआई के अनुसार अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली 1968 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो आईएएस अथवा आईपीएस अफसर को जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने से रोकता हो. यूपी कैडर के आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर एक पीआईएल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकारी सेवकों द्वारा पीआईएल दायर करने पर स्पष्ट नीति बनाने के आदेश दिए थे. अमिताभ ने डीओपीटी से हाई कोर्ट के आदेश के पालन के सम्बन्ध सूचना मांगी थी. डीओपीटी के नोटशीट में साफ अंकित है कि पीआईएल दायर करने पर कोई रोक नहीं है. इसमें वी एस पाण्डेय केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकारी कर्मियों द्वारा पीआईएल दायर करने को उनका संवैधानिक अधिकार बताये जाने का भी उल्लेख है. साथ ही डीओपीटी न्यायिक उपचार के अधिकार और जन सेवा पर उसके प्रभाव में संतुलन बनाने के लिए पूर्वानुमति के बाद पीआईएल की नीति पर विचार कर रहा है किन्तु इस बात पर भी चिंतित है कि प्रभावित प्राधिकरण इस हेतु अनुमति क्यों देगा.

No prohibition on IAS to file PIL- DOPT

RTI information by Department of Personnel and Training (DOPT), Government of India has revealed that there is no provision in the All India Services (Conduct) rules 1968 that prohibits an IAS or IPS officer from filing Public Interest Litigations (PIL) before the Court. In a PIL filed by UP cadre IPS officer Amitabh Thakur, Allahabad High Court had directed to formulate policy as regards government servants filing PILs. Amitabh had sought information from the DOPT about the compliance of the High Court order. The DOPT notesheet clearly states that there is no restriction to file PIL. It also mentions the case of V S Pandey where the Supreme Court has upheld the right of public servants to file PILs. Yet, in order to have a balance between right to judicial remedy and its adverse effect on public service, DOPT is thinking of a policy of public servants taking permission to file PILs, while also worrying on why an affected authority grant permission against itself.

पीएम विदेश यात्रा की सूचना देने से पीएमओ ने मना कर दिया  

प्रधान मंत्री कार्यालय ने भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किये गए विदेश यात्राओं में आये खर्च के सम्बन्ध में मांगी गयी सूचना देने से मना कर दिया है. आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने 01 जनवरी 2010 के बाद से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं में की गयी विभिन्न व्यवस्थाओं में हुए खर्चों से सम्बंधित प्रधानमंत्री कार्यालय के अभिलेख दिए जाने का अनुरोध किया था. प्रधानमंत्री कार्यालय के जन सूचना अधिकारी तथा अनु सचिव प्रवीन कुमार ने यह कह कर सूचना देने से मना कर दिया कि मांगी गयी सूचना अत्यंत अस्पष्ट और विस्तृत है.

Info on PM foreign visit denied as vague

The Prime Minister Office has denied the information sought as regards the various expenses incurred in the foreign trips made by the Prime Minister of India. RTI activist Dr Nutan Thakur had requested to provide the documents in the Prime Minister Office (PMO) as regards the various expenses incurred for various arrangements made for these foreign trips from 01 January 2010 onwards. Praveen Kumar, CPIO and Under Secretary in PMO, has denied the information saying that the information sought is too vague and wide.

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विदेशमंत्री से गुहार पर आयरलैंड में भारतीय छात्र को मदद

आयरलैंड के ट्रिनिटी कॉलेज, डबलिन में भारतीय पीएचडी छात्र लखनऊ निवासी आईआईटी कानपुर के बी टेक स्नातक गोकरण शुक्ला के मामले में यूपी कैडर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और आयरलैंड में भारतीय एम्बेसी को शिकायत करने के बाद संत विन्सेंट अस्पताल, डबलिन के मनोविज्ञान विभाग से मुक्त कर दिया गया है.

गोकरण ने 20 मार्च 2017 को अमिताभ से फोन पर संपर्क कर कहा कि उनके गाइड डॉ स्तेफानो संवितोस ने उनके अध्ययन हेतु पूरी तरह फर्जी मॉडल सामने रखा है जो पूरे अकादमिक संसार के साथ धोखा है, जिसका विरोध करने पर उन्हें पैरानॉयड घोषित करा कर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है.

गोकरण ने आज अमिताभ को फोन कर धन्यवाद् दिया जबकि उनके गाइड डॉ संवितोस ने अमिताभ को कानूनी नोटिस भेज कर कहा कि वे नैनो-साइंस तथा नैनो टेक्नोलॉजी के प्रमुख स्तंभों में हैं और अमिताभ द्वारा उनकी शिकायत से उनकी ख्याति पर प्रतिकूल असर पड़ा है, अतः वे इस मामले में अविलम्ब निशर्त माफ़ी मांगें.

अमिताभ ने उन्हें जवाब में कहा कि उन्होंने अपनी शिकायत मात्र गोकरण द्वारा बताये गए तथ्यों के आधार पर की थी और उनकी नीयत डॉ सविंतोस को बदनाम करने के नहीं थी. उन्होंने कहा कि वे तभी माफ़ी मांगेंगे जब विदेश मंत्रालय या आयरलैंड में भारतीय दूतावास सहित किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनकी शिकायत गलत बताई जायेगी.

After Foreign Minister complaint,  student in Ireland  gets help

After complaint by UP Cadre IPS officer Amitabh Thakur to External Affairs Minister Sushma Swaraj and the Indian Embassy in Ireland, the Ph D student in Ireland, Gokaran Shukla, an IIT Kanpur Graduate belonging to Lucknow (UP), has been released from Psychiatric wing of Saint Vincent Hospital, Dublin.

Gokaran had contacted Amitabh on 20 March 2017 on phone saying that his Guide Dr Stephano Sanvito, Professor of Physics at Trinity College, Dublin proposed a completely fallacious model for his study which Mr Shukla vehemently opposed, which has resulted in his harassment.

Gokaran today thanked Amitabh for support but meanwhile Dr Sanvitos sent him a legal notice saying that he is a leading scientist in nanoscience and nano-technology and Amitabh’s complaint against him has caused him immense mental distress.

The legal notice sought unconditional written apology from Amitabh which he refused by saying that his complaint is based solely on the facts presented by Gokaran on phone and he had no intent to malign the Professor. He said he would apologize only when the facts stated by Gokaran are declared incorrect by a competent authority, including the Ministry of External Affairs and Indian Embassy in Ireland.

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वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश मिश्र और चर्चित पुलिस अफसर अमिताभ ठाकुर ने सीएम योगी से की मुलाकात

लखनऊ से खबर आ रही है कि वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल वायस चैनल के एडिटर इन चीफ ब्रजेश मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. दोनों के बीच देर तक प्रदेश की समस्याओं और पत्रकारिता को लेकर बातचीत हुई. योगी के सीएम बनने के बाद ब्रजेश मिश्र पहले पत्रकार हैं जिन्हें मुख्यमंत्री योगी ने मिलने के लिए बुलाया. ईटीवी को यूपी में चमकाने वाले ब्रजेश मिश्र इन दिनों नेशनल वायस न्यूज चैनल का संचालन कर रहे हैं. चुनाव के दौरान ब्रजेश मिश्र ने पूरे राजनीतिक हालात का सटीक ब्योरा चैनल पर दिया और पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि बीजेपी बहुत ज्यादा सीटों से बहुमत हासिल कर रही है.

जिन दिनों नेशनल वायस चैनल पर प्रचंड बहुमत पाकर बीजेपी द्वारा प्रदेश में सरकार बनाने भविष्यवाणी की गई उन दिनों गैर-भाजपा पार्टियों के नेता इस चुनावी सर्वे पर सवाल उठाने लगे थे. लेकिन चुनाव बाद मतगणना से साफ हो गया कि ब्रजेश मिश्र की भविष्यवाणी बिलकुल सटीक थी. सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ चुनिंदा नेताओं और अफसरों से मिले. पत्रकारिता जगत की बात करें तो यूपी में सबसे पहले उन्होंने ब्रजेश मिश्र से मुलाकात की.

उधर, चर्चित पुलिस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भी सीएम योगी से मुलाकात की. सपा और बसपा दोनों शासनकाल में बेबाक वक्तव्य देने और करप्शन के कई मामलों का खुलासा करने के कारण आईजी अमिताभ ठाकुर सत्ता के निशाने पर रहे. उन्हें पूरे दस साल तक किनारे कर उपेक्षित रखा गया. खासकर अखिलेश यादव के कार्यकाल में भ्रष्ट मंत्री गायत्री प्रजापति के मामले का खुलासा करने पर उन्हें इतने तरह से प्रताड़ित किया गया कि उन्होंने यूपी से बाहर ट्रांसफर करने के लिए केंद्र सरकार से अपील कर दी थी.

बाद में योगी राज आने पर उन्होंने यूपी से बाहर जाने की अपनी अपील को वापस ले लिया था. माना जा रहा है कि भाजपा शासनकाल में अमिताभ ठाकुर को कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी. योगी और अमिताभ के बीच शासन संचालन व ब्यूरोक्रेसी को लेकर लंबी बातचीत हुई है. चर्चा है कि अमिताभ ठाकुर ने भ्रष्ट अफसरों से योगी को आगाह किया. साथ ही उन्होंने कई भ्रष्ट अफसरों के बारे में योगी को जानकारी भी दी जिनके कारण प्रदेश में शासन व्यवस्था पिछली सरकारों में लचर हुई और लूट का राज रहा.

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अमिताभ ठाकुर के अच्छे दिन शुरू, पुलिस ने रेप के मुकदमे को झूठा मान लिया

Amitabh Thakur : 20 महीने बाद आज पुलिस ने हाई कोर्ट के सामने स्वीकार किया कि मुझ पर और मेरी पत्नी पर लगाया गया बलात्कार का मुक़दमा झूठा पाया गया और उसमे अंतिम रिपोर्ट लगाई जा रही है, लेकिन क्या पुलिस की इस अंतिम रिपोर्ट से 20 महीने तक बलात्कार का झूठा मुलजिम होने का दंश समाप्त हो पायेगा?

लखनऊ पुलिस ने हम पर लगे बलात्कार के मुकदमे को झूठा बता कर इतिश्री कर ली पर हम तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक हम इस मुकदमे के पीछे के षडयंत्र को बेनकाब न करा दें.

चर्चित आईजी अमिताभ ठाकुर की एफबी वॉल से.

पूरी खबर यूं है…

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर तथा एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर के खिलाफ 11 जुलाई 2015 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में गाजियाबाद की एक महिला द्वारा लिखवाया गया बलात्कार का मुक़दमा पुलिस की तफ्तीश में झूठा पाया गया है. यह बात आज इस मामले के विवेचक सीओ गोमतीनगर सत्यसेन यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने बताया. विवेचक ने कहा कि मुकदमे की विवेचना पूरी कर ली गयी है और इसमें अमिताभ और नूतन के खिलाफ किसी प्रकार के साक्ष्य नहीं मिले हैं. उन्होंने कहा कि कॉल डिटेल्स, कथित पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों से यह प्रमाणित हो गया कि मुक़दमा गलत था और मामले में दो दिन में अंतिम रिपोर्ट दायर कर दी जायेगी. इस पर जस्टिस अजय लाम्बा और जस्टिस डॉ विजय लक्ष्मी की बेंच ने अमिताभ द्वारा इस मामले की सीबीआई जाँच हेतु दायर याचिका को निस्तारित कर दिया. ज्ञातव्य हो कि 11 जुलाई 2015 को मुलायम सिंह द्वारा अमिताभ को फोन से धमकी देने की शिकायत देने के ठीक बाद उसी रात बलात्कार का यह मुक़दमा दर्ज हुआ था जो अभी तक लंबित था.

Ghaziabad woman Rape case found false

The rape case registered by a Ghaziabad woman on 11 July 2015 at Gomtinagar police station, Lucknow against IPS officer Amitabh Thakur and activist Dr Nutan Thakur has been found to be false in police investigation. This fact was stated by the investigating officer CO Gomtinagar Satyasen Yadav before Lucknow bench of Allahabad High Court today. The IO said that the investigation has been concluded and no incriminating evidence has been found against Amitabh and Nutan. He said that the investigation was based on the Call Detail records, statement of alleged victims and other related evidences. He said he shall be filing the Final Report within 02 days. On this the bench of Justice Ajai Lamba and Justice Dr Vijay Laxmi disposed off Amitabh’s petition for CBI enquiry in the matter. This FIR was registered on 11 July 2015 in the same night when Amitabh had presented a complaint against Mulayam Singh for threatening him on phone.

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अब कैडर परिवर्तन नहीं चाहते आईपीएस अमिताभ ठाकुर

यूपी कैडर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर अब उत्तर प्रदेश से अपना कैडर परिवर्तन नहीं चाहते हैं. आज उन्होंने सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार को पत्र भेज कर कहा कि उन्होंने पूर्व में मुलायम सिंह धमकी के बाद उन्हें और उनके परिवार को कई अत्यंत ताकतवर लोगों से जान को वास्तविक खतरा होने की बात कहते हुए कैडर परिवर्तन हेतु प्रेषित प्रत्यावेदन दिया है.

साथ ही उन्होंने प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों पर भारी राजनैतिक दबाव में एकपक्षीय कार्यवाही का आरोप लगाते हुए अपनी विभागीय कार्यवाहियां भी उत्तर प्रदेश से बाहर किसी अन्य राज्य से कराये जाने हेतु अनुरोध किया था.

अमिताभ ने कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री पद से हटते ही पूरे प्रशासनिक तंत्र के उनके प्रति कार्य और व्यवहार में भारी बदलाव आया है, और उनके प्रति प्रशासनिक पक्षपातपूर्ण स्थिति भी समाप्त हो गयी दिखती है जो उन्हें स्पष्ट अनुभव हो रहा है. अतः अब वे अपना कैडर परिवर्तन और जांचों का स्थानांतरण नहीं चाहते हैं और उनके प्रत्यावेदनों को निक्षेपित कर दिया जाए.

Amitabh Thakur no longer wants Cadre change

UP Cadre IPS officer Amitabh Thakur does not want change of Cadre from Uttar Pradesh anymore. In his letter sent to Secretary, Ministry of Home Affairs, Government of India he said that he had sought cadre change in view of serious threat to his life and that of his family, after the Mulayam Singh phone threat. He had also requested to get his four Departmental enquiries transferred to some other State government alleging huge bias and irregularities on part of the senior State government functionaries, working under tremendous political pressure.

Amitabh said that with Akhilesh Yadav no longer remaining the Chief Minister of UP, there is already a massive change in behavior and action against him and the situation of abject bias does not exist anymore, which he is feeling quite perceptibly. Hence he does not want any cadre change or transfer of departmental enquiries and his request shall be disposed off accordingly. 

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केंद्र सरकार ने आईपीएस अमिताभ ठाकुर के कैडर परिवर्तन से मना किया

यूपी कैडर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा मुलयम सिंह धमकी मामले के बाद से उन्हें नौकरी में कई प्रकार से प्रताड़ित किये जाने और कई अत्यंत ताकतवर लोगों द्वारा उन्हें जान को वास्तविक खतरा होने की बात कहते हुए 16 जून 2016 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार को अपने कैडर परिवर्तन हेतु प्रेषित अनुरोध को केंद्र सरकार से अस्वीकृत कर दिया है.

मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को भेजे अपने आदेश दिनांक 03 जनवरी 2017 में गृह मंत्रालय ने कहा है कि अमिताभ ने अपने और अपने परिवार वालों की सुरक्षा का खतरा बताते हुए किसी अन्य कैडर में भेजे जाने का आवेदन किया. गृह मंत्रालय द्वारा इसका परीक्षण किया गया और उस पर सहमति नहीं व्यक्त की गयी. अमिताभ ने कहा था कि उन्हें और उनकी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर को ताकतवर लोगों से जान को खतरा है, इस कैडर में उनके लिए स्थिति लगातार बदतर हो रही है और उनके साथ शत्रुओं की तरह बर्ताव हो रहा है. हाल में उन्हें गृह मंत्रालय के आदेशों पर राज्य सरकार द्वारा सुरक्षा प्रदान की गयी थी.

Central Govt rejects IPS officer’s Cadre change request

The Central Government has rejected the prayer made by UP Cadre IPS officer Amitabh Thakur to the Home Ministry on 16 June 2016 for changing his Cadre from Uttar Pradesh to any other State, alleging serious harassment in his service and threat to life, after the Mulayam Singh phone threat made on 13 July 2015.

The order dated 03 January 2017 sent by the Home Ministry to the Chief Secretary, UP says that Amitabh had requested change of Care from UP to another cadre on grounds of threat to his life or his family members. It says that the representation has been examined by the Ministry and it has not been agreed to.

Amitabh had said that he and his wife activist Dr Nutan Thakur have real threat from powerful people. The situation is deteriorating every day and the State government officials are treating him as a sworn enemy. Only recently Amitabh has been provided security by the UP Government on directions of the Home Ministry.

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आईपीएस अमिताभ ठाकुर का कैडर केस तीन माह में निस्तारित करने का आदेश

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की लखनऊ बेंच ने भारत सरकार को आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा कैडर परिवर्तन हेतु प्रेषित आवेदन पर 03 माह में निर्णय लेने के आदेश दिए हैं. न्यायिक सदस्य जस्टिस विष्णु चन्द्र गुप्ता की बेंच ने यह आदेश अमिताभ की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर, केंद्र सरकार के अधिवक्ता शत्रोघन लाल तथा राज्य सरकार के अधिवक्ता सुदीप सेठ को सुनने के बाद दिया. 

इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उन्हें अमिताभ के कैडर परिवर्तन पर कोई आपत्ति नहीं है जबकि केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि वे नियमों के अनुसार कार्यवाही करेंगे. अमिताभ ने मुलायम सिंह धमकी मामले के बाद से उन्हें नौकरी में कई प्रकार से प्रताड़ित किये जाने और कई ताकतवर लोगों द्वारा उन्हें जान को वास्तविक खतरा होने की बात कहते हुए 16 जून 2016 को कैडर परिवर्तन हेतु प्रत्यावेदन दिया गया था, जिसमे उन्होंने कहा था कि इस कैडर में उनके लिए स्थिति लगातार बदतर हो रही है और उनके साथ शत्रुओं की तरह बर्ताव हो रहा है.

वरिष्ठ अफसरों द्वारा उनके खिलाफ खोज-खोज कर फर्जी मामले खड़े किये जा रहे हैं और बिना किसी बात के भी विभागीय जाँच शुरू कर दी जा रही है. उन्होंने अपने खिलाफ खोले गए सभी विभागीय जाँच भी अन्य अन्य राज्य सरकार को आवंटित किये जाने का अनुरोध किया था. 

 Decide Amitabh Cadre case in 03 months

Lucknow bench of the Central Administrative Tribunal (CAT) has directed the Government of India to decide over the application sent by IPS officer Amitabh Thakur on 16 June 2016 for changing his Cadre from Uttar Pradesh to any other State.  The bench of Judicial member Justice Vishnu Chandra Gupta passed this order after hearing Amitabh’s counsel Dr Nutan Thakur, Union government counsel Shatroghan Lal and State government counsel Sudip Seth. 

The Ste government intimated CAT that it has no objection to Amitabh’s Cadre transfer while the Union government said it will act as per law.  Alleging serious harassment in his service and threat to life, after the Mulayam Singh phone threat made on 13 July 2015, Amitabh had sought his Cadre change, saying that the situation is deteriorating every day and the State government officials are treating him as a sworn enemy. A roving and fishing exercise is being carried to find anything against him and to initiate Departmental proceedings, merely to harass and torment him. Hence he had sought transfer of his Departmental enquiries to any other State government as well.

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यूपी में अब मेरा काम कर पाना संभव नहीं : आईपीएस अमिताभ ठाकुर

यूपी कैडर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार को दुबारा पत्र लिख कर अपना कैडर यूपी के बाहर किसी अन्य राज्य में किये जाने की मांग की है. अमिताभ ने मुलयम सिंह धमकी मामले के बाद से उन्हें नौकरी में कई प्रकार से प्रताड़ित किये जाने और कई अत्यंत ताकतवर लोगों द्वारा उन्हें जान को वास्तविक खतरा होने की बात कहते हुए 16 जून 2016 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार को अपने कैडर परिवर्तन हेतु आवेदन उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यम से भेजा था. उन्होंने 22 सितम्बर को इस सम्बन्ध में पुनः अनुरोध किया था. 

गृह मंत्रालय ने उन्हें बताया था कि उनका आवेदन पर मंत्रालय में विचाराधीन है. अमिताभ ने अपने पत्र में कहा है कि जून से स्थिति लगातार बदतर हो रही है और उनके साथ शत्रुओं की तरह बर्ताव हो रहा है. उन्होंने कहा है कि इन स्थितियों में वे यूपी कैडर में बिलकुल काम नहीं कर सकते हैं और उन्होंने अपना कैडर बदलने अथवा किसी केंद्रीय सेवा में तैनात किये जाने की बात कही है.

Not possible to work in UP anymore : IPS Amitabh Thakur

UP Cadre IPS officer Amitabh Thakur has once again written to Ministry of Home Affairs, Government of India for changing his Cadre from Uttar Pradesh to any other State. is under consideration before the Central government. Amitabh had sent this application on 16 June 2016 asking for Cadre change, alleging serious harassment in his service and threat to life, after the Mulayam Singh phone threat. He had again made a representation to the Central government on 22 September.

The Ministry of Home Affairs has told him that his application was under consideration before the Ministry. Amitabh has said in his letter that the situation is deteriorating every day and the State government officials are treating him as a sworn enemy. He said in the prevailing conditions, he cannot work anymore in UP and has sought Cadre change or appointment in some Central government service.

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यादव कुल में लातम-जूतम : कहीं आईपीएस अमिताभ ठाकुर और पत्रकार यशवंत सिंह के श्रापों-आहों का असर तो नहीं!

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में भयंकर ड्रामा चरम पर है. सारे चेहरे बेनकाम हो रहे हैं, मुलायम सिंह यादव से लेकर रामगोपाल यादव तक और शिवपाल यादव से लेकर अखिलेश यादव तक. हर कोई स्वार्थ, लिप्सा और सत्ता की चाहत में किसी भी लेवल पर गिरने को तैयार है. जनता हक्की बक्की देख रही है. उधर, कुछ लोगों का कहना है कि आईपीएस अमिताभ ठाकुर व भड़ास फेम पत्रकार यशवंत सिंह जैसे बहादुर, ईमानदार और सरोकारी लोगों के साथ सपा की इस सरकार के राज में जो जो बुरा बर्ताव किया गया, उसकी आहों व बददुवाओं का असर है कि अखिलेश यादव राज बवंडर में है और यादव कुल के किसी भी व्यक्ति का जीवन शांत नहीं रह गया है.

इस यादव कुल की आपसी लातम-जूतम को देखकर दुनिया आनंदित हो रही है और इनकी लगातार सामने आती खलनायकी भ्रष्टाचारी वाली छवि से नाराज लोग इन्हें चुनावों में सबक सिखाने को आतुर हैं. कट्टर यादवों को छोड़ दें तो इस समय सारे लोग इस सपा सरकार के जंगलराज और इनकी आपसी जूतम-पैजार से परेशान है. प्रदेश में सारा काम ठप पड़ा हुआ है. अफसर भी मजे लेकर तमाशा देख रहे हैं.

रामगोपाल यादव सीबीआई और बीजेपी के चंगुल में हैं जिसके कारण उन्हें शिवपाल ने पार्टी से निकाल दिया वहीं मुलायम सिंह दलालों अपराधियों आदि को अपना बहुत करीबी बताकर अपने बेटे अखिलेश का विरोध कर रहे हैं. वहीं अखिलेश मुगल शासक के राजाओं की तरह सत्ता मिल जाने के बाद किसी भी तरह अपना कद और पद बड़े से बड़ा बनाना चाहते हैं ताकि यादव कुल में सीएम पद के लिए कोई दूसरा प्रतिस्पर्धी न पैदा हो सके. इस प्रकार यह खानदान आपस में ही चरम मारकाट में लिप्त होकर एक दूसरे को एक्सपोज कर रहा है. उत्तर प्रदेश में जंगलराज का जो लंबा दौर चला है उसमें बहुत से ईमानदार, निर्दोष और साहसी लोगों को शासन सत्ता का उत्पीड़न झेलना पड़ा.

मीडिया मालिकों और संपादकों के सांठगांठ के दबाव में यूपी सरकार ने भड़ास4मीडिया के एडिटर को 68 दिनों के लिए जेल भेज दिया था और तरह तरह के फर्जी मुकदमें लाद दिए थे ताकि कभी जमानत न हो पाए. इसी तरह निर्भीक आईपीएस अमिताभ ठाकुर को पग पग पर परेशान किया गया और जितना प्रताड़ित किया जा सकता था, उन्हें किया गया. अमिताभ और यशवंत दोनों ने फेसबुक पर अपने अपने अंदाज में लिखा है कि उनकी बददुवाओं और आहों का असर पड़ा है जिसके कारण प्रकृति निरंकुश और अन्यायी यादव कुल के साथ अपने तरीके से न्याय कर रही है. आइए पढ़ते हैं अमिताभ और यशवंत ने एफबी पर क्या क्या लिखा है :

Amitabh Thakur : इनकी दुर्दशा में कुछ मेरी भी आहें जरूर शामिल रही होंगी जो मैंने अकेली रातों में उनके अन्याय के साए में निकालीं. चलो, कम से कम अब मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ कार्यवाही तो हो रही है. xxx अब जब मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने श्री प्रजापति को दुबारा बर्खास्त करते हुए कड़ा कदम उठाया है तो हम उम्मीद करेंगे कि वे मेरी पत्नी द्वारा जून 2015 में श्री प्रजापति के खिलाफ थाना गोमतीनगर में दर्ज कराये गए एफआईआर में उन्हें गिरफ्तार कराते हुए हमें न्याय देंगे. xxx My silent tears on all the torture I faced through misuse of their authority seem to get some solace today. xxx Thank God, now justice is being done against minister Gayatri Prajapati. Now when CM Sri Akhilesh Yadav has taking strong action against Mr Prajapati by sacking him again, we hope the CM will also take police action against Mr Prajapati by arresting him in the FIR registered by my wife Nutan in Gomtinagar police station in June 2015 for trying to frame us in false cases, which is pending since then.

Yashwant Singh : प्रकृति का न्याय है भाई। एक फ़क़ीर का श्राप था इन रामगोपाल जी पर। और, यादव खानदान पर भी। इन्हें नष्ट होना है। जिन जिन पर श्राप होंगे, वो नष्ट होंगे। भ्रष्टाचारियों और आततायियों को रोने के लिए कंधे न मिलेंगे। खुद को बिना अपराध 68 दिन जेल में रखने के चलते दिए गए श्राप का असर होना ही था। यादव खानदान के गलत कामों और जंगलराज से पीड़ितों की आह भी तो लगेगी इनको, इसलिए ये नष्ट होंगे। कुछ श्राप जल्द लगते हैं, कुछ आहों का असर सदियों में दिखता है। इसके उलट वाइस वर्सा कुछ आहों का असर तत्काल दिखता है और कुछ श्राप का सदियों में।

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आईपीएस को फोन पर धमकाने के मामले में मुलायम की मुश्किलें बढ़ीं, पुलिस रिपोर्ट खारिज, आवाज़ मिलान के आदेश

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव द्वारा आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को मोबाइल फोन से दी गयी धमकी के सम्बन्ध में दर्ज एफआईआर में हजरतगंज पुलिस द्वारा लगाये गए अंतिम रिपोर्ट को अदालत ने ख़ारिज कर दिया है. सीजेएम लखनऊ संध्या श्रीवास्तव ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी से स्पष्ट है कि विवेचक ने कॉम्पैक्ट डिस्क में अंकित वार्तालाप की आवाज़ का नमूना परीक्षण नहीं कराया है और मात्र मौखिक बयान दर्ज कर के अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दिया है.

सीजेएम लखनऊ संध्या श्रीवास्तव ने क्षेत्राधिकारी हजरतगंज को इस मामले में अग्रिम विवेचना करते हुए अमिताभ और मुलायम सिंह के आवाज़ का नमूना प्राप्त कर उसका कॉम्पैक्ट डिस्क की आवाज़ से विधि विज्ञानं प्रयोगशाला में परीक्षण करा कर 30 सितम्बर 2016 तक रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं. ज्ञात हो कि इस मामले में विवेचक द्वारा धमकी की बात गलत होने और अमिताभ द्वारा महज लोकप्रियता के लिए गलत तथ्यों के आधार पर झूठी सूचना दिए जाने की बात कहते हुए अंतिम रिपोर्ट कोर्ट को भेजी गयी थी. अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट में इस अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ विरोध याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी. कहा जा सकता है कि कोर्ट के ताजे आदेश के बाद मुलायम की मुश्किलें बढ़ गई हैं. नीचे कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश की कापी है…

Mulayam Phone case : Order for voice sample matching in FSL

In the protest petition presented by IPS officer Amitabh Thakur against the Final report presented by Hazratganj police in the FIR registered by him regarding alleged threat given to him by SP Supremeo Mulayam Singh Yadav on mobile phone, the CJM Lucknow Court today dismissed the Final report.

CJM Lucknow Sandhya Srivastava said in her order that it is apparent from the Case diaries that the voice samples have not been scientifically examined and Final report has been sent merely on hearsay evidences. Hence she directed Circle officer Hazratganj to undertake further investigation in the matter and get the voices in the Compact Disc scientifically examined in the State Forensic Science Laboratory, presenting his report by 30 September 2016.

Previously the Investigating Officer had presented Final Report concluding that the threat allegations were not found to be correct and was a false case based on wrong facts for cheap popularity. Amitabh had presented a protest application against the Final Report.

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यूपी के जंगलराज से परेशान आईजी अमिताभ ठाकुर ने कैडर चेंज की मांग की

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने गृह मंत्रालय, भारत सरकार को उन्हें उत्तर प्रदेश से किसी अन्य कैडर में भेजने हेतु प्रत्यावेदन दिया है. आईपीएस कैडर नियमावली के नियम 5(2) में कैडर परिवर्तन हेतु जीवन भय की स्थिति उत्पन्न होने की अनिवार्यता को बताते हुए अमिताभ ने अपने प्रत्यावेदन में कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, जिन्होंने उन्हें फोन पर धमकी दी थी और खनन मंत्री गायत्री प्रजापति, जिनके खिलाफ नूतन ने लोकायुक्त को शिकायत की थी, से जान का सीधा खतरा है.

उन्होंने कहा कि राज्यसत्ता का व्यापक दुरुपयोग कर उन्हें प्रताड़ित करने के अलावा उन्हें वास्तविक प्राणों का भय भी है. अमिताभ ने कहा है कि ये लोग अत्यंत ताकतवर हैं और ऐसी स्थितियों में उनका कैडर परिवर्तन किया जाना ही उचित होगा.

Amitabh Thakur seeks Cadre change

IPS officer Amitabh Thakur has written to the Ministry of Home Affairs, Government of India seeking his Cadre change from Uttar Pradesh to any other State cadre. Quoting the requirement of extreme threat to life as the reason for Inter-state Cadre change under Rule 5(2) of the IPS Cadre Rules, Amitabh said in his representation that he and his wife activist Dr Nutan Thakur have direct threat to their life from SO Supremo Mulayam Singh Yadav, who directly threatened him on phone and mining minister Gayatri Prajapati, against whom Nutan presented a complaint before the Lokayukta.

He said, other than harassment by misuse of State authority, they also have real life threat. Amitabh said these people are extremely powerful and hence it is necessary to change his Cadre from UP.

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यूपी में डीआईजी ने सिपाही को बेवजह पीटा तो न्यायप्रिय आईजी ने डीआईजी के खिलाफ मोर्चा खोला

Amitabh Thakur : डीआईजी फैजाबाद ने सिपाही को पीटा, वर्दी नोची! फैजाबाद पुलिस लाइन के आरक्षी श्री जुबैर अहमद ने आज मेरे पास आ कर बताया कि कल रात 05 जून करीब 12 बजे डीआईजी फैजाबाद श्री विजय कुमार गर्ग ने उन्हें मात्र इसीलिए भद्दी गलियां दीं और मारपीट की क्योंकि वे कथित रूप से फोन का बज़र नहीं सुन पाए थे. श्री जुबैर ने बताया कि श्री गर्ग ने उन्हें डंडों से मारा और उनकी वर्दी तक नोच डाली.

मैंने भाऊराव देवरस अस्पताल के अधीक्षक से श्री जुबैर का तत्काल मेडिकल कराने का अनुरोध किया जिसमे 12-24 घंटे पुराने 03 मल्टीप्ल अब्रेजन की चोटें आयीं जो कठोर वस्तु से बनी बतायी गयी थीं. श्री जुबैर ने डीआईजी श्री गर्ग के खिलाफ एसओ कैंट, फैजाबाद को संबोधित एक एफआईआर भी लिखा जिसपर मैंने डीजीपी श्री एस जावीद अहमद को मुक़दमा दर्ज करने और श्री गर्ग के खिलाफ विभागीय जंच कराये जाने हेतु अनुरोध किया.

(पीड़ित आरक्षी जुबैर अहमद)

DIG Faizabad beats a Constable, tears uniform! Constable Sri Zubair Ahmad from Faizabad Police Lines came to me today and presented a complaint stating that DIG Faizabad Sri Vijay Kumar Garg had badly beaten and abused him yesterday (05 June) at around 12 in the night while he was on telephone duty at DIG residence merely for having failed to have responded to the phone buzzer.

Sri Zubair told that Sri Garg had beaten him with stick and had also snatched and torn his uniform. I requested the CMS of Bhaurau Devras Hospital, Mahanagar to get the medical examination done where 03 medical injuries, all multiple abrasions caused by hard and blunt objects 12-24 hours old were found. Sri Zubair wrote an FIR against DIG Sri Garg, addressed to SHO Cantt Faizabad, which I have forwarded to DGP Sri S Javed Ahmed, requesting him to get the FIR registered and disciplinary enquiry done in this case.

यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के एफबी वॉल से.

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यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर का आरोप- मथुरा कांड के सबसे बड़े गुनाहगार शिवपाल सिंह यादव!

Amitabh Thakur : स्पष्ट गंभीर प्रशासनिक अकर्मण्यता के चलते इतने सारे लोगों की मौत के जिम्मेदार डीएम और एसएसपी मथुरा का मात्र ट्रांसफर पूर्णतया अपर्याप्त है और न्याय-हित में इनका तत्काल निलंबन अपरिहार्य प्रतीत होता है. मथुरा की घटना गलत पैसे को हासिल करने की हवस और अनैतिक राजनैतिक शह का ज्वलंत उदहारण है. मेरी समझ के अनुसार इस घटना के सबसे बड़े गुनाहगार श्री शिवपाल सिंह यादव हैं.

मुझे मथुरा से एक सज्जन ने फोन से बताया कि जाँच अधिकारी कमिश्नर अलीगढ ने डीएम और एसएसपी मथुरा के खिलाफ उनके द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदन को लेने तक से मना कर दिया और डीएम ने उन्हें जाँच अधिकारी से मिलने में भी व्यवधान डाला था. यदि यह बात सही है तो यह श्री मुकुल और श्री संतोष की शहादत के साथ भद्दा मजाक है. तथ्य प्राथमिक स्तर पर डीएम और एसएसपी को कर्तव्य में लापरवाही के सीधे दोषी बताते दिखते हैं, अतः न्याय का तकाजा है कि उनके खिलाफ तत्काल कठोर प्रशानिक कार्यवाही हो. साथ ही यह जाँच पूरी तरह निष्पक्ष और प्रत्येक बिंदु पर गहराई से होनी चाहिए.

मथुरा कांड में मैं निम्न दो कार्यवाही की मांग करता हूँ- i) डीएसपी जिया उल हक़ के परिवार की तरह एसपी सिटी और एसओ के परिवार को भी 50 लाख रुपये और 2 नौकरी का मुआवजा (ii) सरकारी पार्क पर सालों से कब्ज़ा करने वाले आपराधिक संगठन को मंत्री शिवपाल सिंह यादव की प्रत्यक्ष और परोक्ष सहयोग और इससे घटित घटना के सम्बन्ध की जाँच.

हम शीघ्र ही मथुरा जा कर व्यक्तिगत स्तर पर पूरे प्रकरण की जाँच करेंगे ताकि इस मामले में असली गुनाहगारों के खिलाफ कार्यवाही कराने में योगदान दे सकें.

Considering the apparent grave administrative lapses leading to loss of so many lives, mere transfer of DM and SSP Mathura is completely inadequate and the two officer need to be immediately suspended in the interest of justice.  Mathura incidence is nothing more than lust for ill-gotten money and illegal political favour. The prime accused of the incidence in my opinion is Mr Shiv Pal Singh Yadav.

I got a phone call from Mathura telling that the Enquiry officer Commissioner refused to take his representation stating facts against DM and SSP Mathura and the DM tried to stop him from meeting the enquiry officer. If this is true, it is nothing more than making mockery of the martyrdom of Sri Mukul and Sri Santosh. The facts clearly hold DM and SSP Mathura prima-facie responsible for abject dereliction of duty, hence justice demands immediate stern action against the two. Also, the enquiry needs to be completely impartial and must go into each and every fact related with the incidence.

Regarding Mathura incidence, I seek the following two actions- (a) the same compensation of Rs 50 lakh and 2 jobs to family of slain SP City and SO as was given to DSP Zia-ul Haq family (b) enquire the role of Shiv Pal Singh Yadav in the entire episode, particularly as regards his overt and covert support to the criminal outfit that illegally captured the public park.

यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के एफबी वॉल से.

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आईजी अमिताभ ठाकुर ने यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन को बेशर्म कहा

Amitabh Thakur : यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन पर 02 क्लास IV कर्मियों को अवैध रूप से घरेलू काम पर रखते हुए, अपने लड़के की शादी में एक बिल्डर द्वारा दिए गए 30 लाख के हीरों का हार चोरी होने के शक में, उन सरकारी कर्मियों को 02 माह के अवैध पुलिस हिरासत में रख कर मारपीट और लाई-डिटेक्शन टेस्ट कराने का संगीन आरोप लगा. बेशर्म लोग! ऐसे लोग मेरे जैसे अफसर का निलंबन करते हैं.

Allegations on UP Chief Secretary Alok Ranjan of keeping 02 Class IV employees, illegally kept as domestic help in his house, in illegal police detention, beating and lie detection test, for 02 months on suspicion of theft of 30 lakh worth diamond necklace, he got as gift from a builder in his son’s marriage. Shameless people! These are the people who suspend an officer like me.

यूपी के आईजी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

पूरे मामले को समझने के लिए नीचे दिए गए स्टोरी शीर्षक पर क्लिक करें…

 

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भाड़ की औकात बता दिया अकेले चने ने, अमिताभ ठाकुर को बधाई….

Braj Bhushan Dubey : भाड़ की औकात बता दिया अकेले चने ने। अमिताभ ठाकुर को बधाई…. मुख्‍यमंत्री जी के पिता पर अपराध दर्ज कराने से लेकर अपराधी, तस्‍कर, रिश्‍वतखोरों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले अमिताभ ठाकुर सीएम व उनके परिवार का कोप भाजन बन दस माह तक निलम्बित रहे। सत्‍याग्रह, लिखना पढना और उचित माध्‍यम से लेकर कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया तब जाकर हुआ निलम्‍बन वापस।

अब अमिताभ ठाकुर को डीजीपी कार्यालय से सम्‍बद्ध कर दिया गया है। उन्‍होने मुख्‍यमंत्री व डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि हमें काम दो, हम जिस स्‍तर के हैं, हमें उस स्‍तर का काम दो। हमारा पांच हजार रोज का वेतन बन रहा है, हम फोकट के पैसे कैसे ले सकते हैं? देश के यशस्‍वी मानक हैं अमिताभ. हृदय की अनन्‍त गहराइयों से सैल्‍यूट ऐसे जांबाज पुलिस अधिकारी को।

गाजीपुर के जाने-माने नेता ब्रज भूषण दुबे के फेसबुक वॉल से.

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अमिताभ ठाकुर आईजी बन कर पूरी ठसक के साथ अपने आफिस में बैठे हैं

लखनऊ : मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान केवल सात दिन की तैनाती पाये वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे को दंगा न सम्‍भाल पाने को लेकर शासन ने दोषी ठहराया। दुबे को इस आरोप में मुजफ्फरनगर से हटाकर लखनऊ में पुलिस महानिदेशक कार्यालय में सम्‍बद्ध कर दिया गया और इसके 15 दिन बाद उन्‍हें निलम्बित भी कर दिया गया। अब हकीकत यह देखिये। सुभाष च्रंद्र दुबे की कार्यशैली बेदाग रही है। दुबे जहां भी रहे, अपनी कुशलता के झंडे गाड़ दिया। दंगा शुरू होने पर दुबे को शासन ने खासतौर पर सहारनपुर भेजा था। तब तक मुजफ्फरनगर में अपर महानिदेशक कानून-व्‍यवस्‍था, आर्इजी, डीआईजी समेत कई अधिकारी भी तैनात थे, ताकि वे अपनी निगरानी में दंगा सम्‍भालने की कोशिश करें। लेकिन प्रमुख गृह सचिव ने इसी बीच सात दिन की तैनाती के बाद ही दुबे को डीजीपी कार्यालय में अटैच कर दिया था।

कोई सहज बुद्धि का चपरासी या बाबू भी आसानी से समझ सकता है कि जब जहां एडीजी, आईजी, डीआईजी से लेकर भारी पुलिस बल मौजूद हो, ऐसे में एसएसपी जैसा अदना अफसर की क्‍या औकात होगी। लेकिन चूंकि इसके पहले प्रमुख सचिव गृह आरएन श्रीवास्‍तव से काफी नाराजगी हो गयी थी, इललिए आरएन श्रीवास्‍तव ने दुबे के गर्दन पर सस्‍पेंशन की आरी रख दी। दुबे पर श्रीवास्‍तव इस लिए खार खाये बैठे थे, क्‍यों कि उनके एक खासमखास आदमी और माध्‍यमिक शिक्षा के एक बड़े अफसर को दुबे ने 85 लाख रूपयों की नकदी के साथ गिरफ्तार किया था। यह रकम इंट्रेंस की घूस के तौर पर थी। लेकिन दुबे अडिग रहे, और मुजफ्फरनगर दंगे में उन पर काम लगा दिया गया।

लेकिन आज तक दुबे पर लगे आरोपों की फाइल देखने की जरूरत न तो मौजूदा प्रुमुख गृह सचिव देवाशीष पाण्‍डेय ने की, या फिर मुख्‍य सचिव आलोक रंजन ने। जानकार बताते हैं कि दुबे की यह फाइल देखते ही सच साफ दिख जाता है। इसके लिए आईएएस  बनने की जरूरत नहीं। ठीक यही हालत थी अमिताभ ठाकुर की। आठ साल पहले ठाकुर ने सरकारों की खाल खींचनी शुरू कर दिया। वजह थी, ठाकुर पर प्रताड़ना। ठाकुर का आईआईएम में दाखिला मिला, लेकिन शासन ने उसे छुट्टी नहीं दी। बोले, यह अराजकता है। अमिताभ ने उस पर ऐतराज किया तो शासन ने उसे औकात में लाने की साजिशें बुन दीं। पहले ढक्‍कन पोस्टिंग लगा दी।

यह भी सहन किया ठाकुर ने, लेकिन अपनी आवाज उठाये रखा। नतीजा यह हुआ कि शासन ने निलम्बित कर दिया। इतना ही नहीं, निलम्‍बन की तयशुदा समयसीमा खत्‍म होने के बावजूद निलम्‍बन खत्‍म नहीं किया। ठाकुर ने इसके लिए अदालत और सेंट्रल ट्रब्‍युनल पर अर्जी लगायी। आज ठाकुर आईजी बन कर अपनी पूरी ठसक के साथ अपने आफिस में बैठ रहे हैं। एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने अमिताभ के इस प्रकरण पर बहुत जोरदार चुटकी ली। बोले:- अब चाहे कुछ भी हो जाए, सरकारों और आला अफसरों की संवेदनहीनता व प्रताड़ना के चलते अमिताभ ठाकुर में प्रवेश कर चुका अदालती कीड़ा वापस नहीं जाने का।

सच भी है। आपको अगर इस लोकतंत्र में सत्ता सिस्टम से टकराना है तो राहत फिलहाल अदालत और मीडिया के माध्यम से ही मिल सकती है।

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार हैं.

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अपने मित्र Amitabh Thakur की ये फोटो मुझे बहुत पसंद है…

अपने मित्र Amitabh Thakur की ये फोटो मुझे बहुत पसंद है..

जानते हैं क्यों?

इसमें मुझे नए दौर का एक ऐसा डिजिटल हीरो दिखता है

जो अपने चश्मे में पूरा ब्रह्मांड समेटे है

जिससे वह सब कुछ देख सुन समझ लेता है

जो सत्ताएं उससे छिपाना चाहती हैं…

इकहरी हड्डी का यह छोटा सा दुबला पतला वरिष्ठ आईपीएस अफसर

बिना बुलेट प्रूफ जैकेट पहने

बिना सुरक्षा गार्ड लिए

बिना सरकारी दंड की परवाह किए

निकल लेता है उस ओर जिधर अन्याय होने की गुहार मचती है…

बिना परवाह किए नौकरी की….

यूपी पुलिस में आईजी होते हुए भी यह आदमी

अचानक वहां के लिए भी चल पड़ता है

एकलौता न्याय पीठ बन के

जहां सत्ताएं पूरे सिस्टम और सारे स्तंभों को साधते हुए

दमनचक्र करने कराने के बाद

चुप्पी साधने के लिए मुंहबोली रकम देकर

पूरे तंत्रों-सभी स्तंभों को चुप करा देती हैं…

कुछ लोग कहते हैं कि जनता का शहंशाह है ये

कई कहते हैं कि इसके लिए बहुत सारे दुआ देते हैं…

पर पता नहीं मुझे क्यों लगता है कि

सारी काबिलियत इस चमकीले चश्मे की है…

मुझे तो ये चश्मा लेना है जी….

ये आदमी अपनी आलोचनाओं

अपनी दुर्गतियों

अपनी मन:स्थितियों को काबू में कर

अपने रास्ते पर चलते जाने का

अदभुत ताकत पा चुका है….

जाने मुझे क्यों लगता है

इसको सारी उर्जा इसी चमकीले अदभुत चश्मे से मिलती है

इसी से यह सब कुछ सही सही देख सुन पहचान पाता है….

मुझे ये चश्मा चाहिए भाई….

कोई कहता है ये आदमी भाजपाई है

कोई कहता है बसपाई

कोई कहता है ये पूर्व सपााई है

तो कोई कोई कहता है कि ये तो पूरा का पूरा चिरकुटाई है…

ये हर आरोप को सैल्यूट प्रणाम जयहिंद करता है ….

ठठा कर हहा कर लंबा लंबा मौजियल हंसी हंसता है

फिर आगे बढ़ता चला जाता है उस राह जिसे मन ही मन तय किया…

अकूत सत्ताधारी अन्याय पर कलम और शब्द की लट्ठ बजाने अकेले

उसकी आंच उसकी उर्जा से हर कोई नतमस्तक, हाथ जोड़े या हथप्रभ

मुझे लगता है यह सब ये रोशनीदार डिजिटल चश्मा कराता है…

मुझे ये चश्मा चाहिए भाई…

ये जो इक बस अदना सा आदमी है

जो अकूत हिम्मत ताकत और सच साथ रखता है

जो अपना जीवन सिस्टम से लड़ भिड़ कर

इसे घुटनो पर लाकर थोड़ी डेमोक्रेसी,

थोड़ी ट्रांसपैरेंसी, थोड़ा जनहित सिखाना चाहता है

लगे लगे दो दो हाथ करके हम सबको

थोड़ी जादू की झप्पी देना चाहता है…

उससे मुझे कहना है कि….

बॉस, ये चश्मा मुझे दे दो न.

और, हां… ये चश्मा लेकर मत चले जाना कभी

उस अंधेरे की तरफ जहां मुंह पर कपड़ा बांध

कोई तालिबानी चला आए तुम्हारा चश्मा छीनने

आसाराम के मानसिक रोगी शिष्य माफिक

स्वर्ग जाने की खातिर जिसने न्यायप्रियों को सुला दिया

हां, जाना तो बता देना इस चश्मे का राज

ताकि तुम कभी अकेले लड़ो तो हम तुम्हारे क्लोन चश्मे से

देश दिशा समय स्थान चीन्ह कर चले आएं फौरन…

लेकिन प्लीज ये सब तो बाते हैं, कल्पनाएं हैं

पजेसिव टाइप का इकतरफा प्यार है…

बस मैं तो ये कहने के लिए ये सब लिख रहा हूं कि…

यार, मुझे ये चश्मा दे दो प्लीज

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. इस पोस्ट पर आईं कुछ प्रमुख प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं…

Sanjaya Kumar Singh खासियत चश्मे की नहीं – वो जहां खड़े हैं और जिसने तस्वीर उतारी है उसकी है जिससे चश्मा इतना गंभीर लग रहा है। मैंने एक बार ताजमहल के सामने खड़ी अपनी बेटी के चश्मे में ताजमहल लाने की कोशिश की थी। कई बार में सफलता मिली। यहां तो ताजमहल नहीं पूरा ब्रम्हांड दिख रहा है। कुछ संयोग तो है!!
संजय शर्मा ”ये चश्मा मुझे दे दो ठाकुर!” वाह बहुत खूब !
Narendra M Chaturvedi भाई ये दोस्ती निभा रहे हो…या….दुश्मनी….कर्ण का कवच उतरवा लेने के पीछे एक संयंत्र था….बिना चश्मा फिर ये कैसे शेरो की तरह जायेगे….यसवंत भाई आप द्रोणाचार्य न बनो….सन्देश रूपी कृष्ण बनकर अर्जुन की तरह अमिताभ जी को मार्ग बताइये….वैसे वो खुदही बुध्दि गणेश है….?
Virendra Pandey निःसंदेह चौंकाने वाली हरकत उनका शगल काफी पहले से रहा। यहाँ एसपी बस्ती तैनात रहने के दौरान करीब सवा वर्ष बीट रिपोर्टर की हैसियत से साथ काम करने का अवसर हमें भी मिल चूका है। अचानक कार से उतर कर हम सब में किसी साथी की बाइक पर बैठकर घटना स्थल पर पहुँचाने, रोटरी जैसे अनेक प्रतिष्ठित संस्थान में बतौर मुख्य अतिथि हवाई चप्पल पहनकर पहुँच जाने, जिसके कार्यक्रम जाएँ,उसी की बखिया उधेड़ना उनको काफी पसंद था। आदि-आदि….! मगर बंदा सच्चा और दिलेर है, इसमें कोई शक नहीं ।
Vinay Maurya Sinner लाजवाब बेमिसाल …..भईया तू चश्मा लेला… हमके अमिताभ भईया क लड़ाकू जिगर चाही….
Yashwant Singh हा हा हा …. लव यू विनय भइया… यार…तोहार यही देसी और सच्चा अंदाज त हमके पसंद आवे ला….
Vinay Maurya Sinner दुई ट्रक धनबाद भईया …..हमहू तोहसे बहुत पयार करीला भईया …हमके तोहरे पर बहुत गर्व रहला भईया …..माई कसम भईया
Pawan Upadhyay इतना टूटा हूँ कि छूने से बिखर जाऊंगा …..अब अगर और दुआ दोगे, तो मर जाऊँगा !
Amitabh Thakur यशवंत बाबू,
एक एक शब्द
जो आपने
लिखा यहाँ
अपने बड़े भाई के लिए
करता आनंदित
देती उर्जा
बढ़ाता उत्साह
लेकिन इनसे कहीं अधिक
बताता आपका व्यक्तित्व
यशवंत का वह व्यक्तित्व
जो विरले है
और विशिष्ट भी
खुरदरा भी स्नेह-सिंचित भी
रफ एंड टफ
मोम के माफिक भी
परिवर्तन की चाह
परिवर्तन का संवाहक
घटनाक्रम से निर्लिप्त भी
स्वयं में मस्त
स्वयं से सिक्त भी
जब-जब आपको देखता हूँ
अच्छा लगता है
बहुत अच्छा लगता है
यह जान कर
ऐसे अलमस्त, बुद्धिमान,
निडर, दबंग, तीक्ष्ण बुद्धि
पागल मौजूद हैं
हमारे बीच
आज भी, इस समय भी
Arvind Tripathi यशवन्त को दिए आपके प्रतिउत्तर ने मुझे आनन्दित कर गया।
Yashwant Singh अरे सर हम आपका चश्मवा मांग रहे हैं और आप मीठी मीठी बात कहके हमको फुसला रहे हैं smile emoticon
Rajiv Verma No doubt, yashwant ji Aap to bas hila diye, Mtble pagdandi ko Thame hue ek achha chitran….
Gourav Sharma बहुत अच्छी कविता।।
Ashish Singh Waise, aapka chasma bhi kuch kam nahi hai..
Singhasan Chauhan आज देश को ऐसे ही अफसरों की जरुरत है
Sarvendra Vikram मिस्टर इंडिया वाला चश्मा हैं,
Arshad Ali Khan ham salaam karte hain esi shakhsiyat ko . jai hind
Veer Yadav भीड़ से अलग चलने वाले हमेशा हीरो ही होते हैं
Kamta Prasad लेखन की यह कौन सी शैली है यह तो पता नहीं पर प्रस्तुति समझ में आने लायक और अबूझ नहीं है। साधुवाद।
Pradumn Kaushik सलाम
Varsha Srivastava जबरजस्त.

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IPS urges no further extension on property return in Lokpal Act

IPS officer Amitabh Thakur has demanded that no further extension be given for providing the annual property return under the Lokpal and Lokayukta Act 2013. In his letter to Secretary, Department of Personnel and Training (DOPT), Government of India, he said that sub-section 4 of section 44 of the Act asks each public servant to provide annual property returns of himself, spouse and dependents, while sub section 6 asks the Department to present this information on the respective Departmental websites.

Amitabh said the DOPT on 01 August 2014 first asked IAS and IPS officers to provide property returns for 2014 by 15 September 2014 but since then the last date has been extended 05 times. Last time, it was extended on 11 October 2015 fixing 15 April 2016 for providing information for 2014 and 2015, but it is being widely speculated that the date will extend further. He said the repeated extension of date despite strict legal requirement is not appropriate and it shall not be extended any further, saying that he would move to Court if it happens. He has also requested for the property returns to be put on Departmental websites.

लोकपाल एक्ट में संपत्ति ब्यौरा की तारीख न बढाने की मांग

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट 2013 के तहत वार्षिक संपत्ति विवरण दिए जाने की तारीख अब और नहीं बढाए जाने की मांग की है. भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सचिव को भेजे अपने पत्र में उन्होंने कहा कि 2013 में पारित इस एक्ट की धारा 44 की उपधारा 4 में हर लोक सेवक को अपने, अपनी पत्नी या पति और स्वयं पर आधारित लोगों के चल और अचल संपत्ति का पूरा विवरण देना है जबकि उपधारा 6 के अनुसार इस विवरण को सम्बंधित मंत्रालय के वेबसाइट पर डाले जाने की व्यवस्था है.

अमिताभ ने कहा कि डीओपीटी ने 01 अगस्त 2014 को पहली बार आईएएस तथा आईपीएस के अफसरों को वर्ष 2014 का विवरण 15 सितम्बर 2014 तक देने के आदेश दिए लेकिन उसके बाद यह समयसीमा 05 बार बढ़ाई जा चुकी है. अंतिम बार 11 अक्टूबर 2015 को 2014 और 2015 के लिए अंतिम तारीख 15 अप्रैल 2016 तय की गयी है लेकिन इस बात की चर्चा है कि यह तारीख एक बार फिर बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा कि इस प्रकार एक क़ानून के तहत निश्चित तिथि को बार-बार बढ़ाया जाना उचित नहीं है और अब इसे किसी कीमत पर नहीं बढ़ाया जाये और कहा है कि तारीख बढ़ाए जाने पर वह इसके खिलाफ कोर्ट जायेंगे. साथ ही उन्होंने इन सूचनाओं को उपधारा 6 के अनुसार सम्बंधित मंत्रालय के वेबसाइट पर भी जाने की मांग की है.

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आज़म खान के खिलाफ जनता को भड़काने के आरोप में रामपुर कोतवाली में अमिताभ ठाकुर और नतून ठाकुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज

Amitabh Thakur : नूतन और मुझ पर कैबिनेट मंत्री आज़म खान के खिलाफ लोगों को भड़काने के आरोप में रामपुर के कोतवाली थाने में मुक़दमा अ०स० 57/2016 धारा 153ए आईपीसी दर्ज हुआ है. पक्का बाग़ निवासी सोनू कठेरिया द्वारा कल (14 मार्च को) थाने को दिए गए प्रार्थनापत्र के अनुसार रविवार (13 मार्च) सुबह करीब 10 बजे हम दोनों ने स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता दानिश खान के साथ मंत्री आज़म खान के खिलाफ धर्म और जाति के नाम पर भड़काया.

एफआईआर के अनुसार मैंने कहा कि आज़म खान उनके मकानों को इसीलिए तुडवाना चाहते हैं कि ये लोग हिन्दू निम्न जाति के हैं और यदि यह बस्ती मुसलमानों की होती तो आज़म इसे कभी नहीं तुड़वाते. आज़म खान रामपुर से वाल्मीकि बस्ती को एक-एक करके तुडवाना चाहते हैं, जो भी हिन्दू आज़म के खिलाफ बोलेगा वे जेल भिजवा कर ही रहेंगे. अगर वे संगठित नहीं हुए तो आज़म रामपुर में एक भी वाल्मीकि को रहने नही देंगे.

एफआईआर के अनुसार मेरी इन बातों का नूतन और दानिश ने भी समर्थन किया और हमारी इन बातों को सुन कर वहां के वाल्मीकि मंत्री आज़म खान के खिलाफ उत्तेजित होने लगे और इन बातों से साफ़ था कि हम लोग मंत्री आज़म खान और सरकार के खिलाफ इन लोगों को भड़का रहे थे. दरअसल हम बुलंदशहर से वापसी के समय वाल्मीकि बस्ती जा कर वहां के लोगों से बस्ती की वर्तमान स्थिति जानने गए थे. सच यह है कि यह एफआईआर आज़म खान द्वारा पद के व्यापक दुरुपयोग का एक और जीता-जागता नमूना है लेकिन अब हमें इस तरह के झूठे मुकदमों की आदत सी हो गयी है.

यूपी कैडर के आईपीएस और आईजी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

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जंगलराज के खिलाफ सीएम अखिलेश यादव के आवास के सामने धरने पर बैठ गया एक आईपीएस आफिसर, देखें तस्वीरें

उत्तर प्रदेश के निलंबित आईपीएस अमिताभ ठाकुर प्रदेश ने प्रदेश सरकार पर जंगलराज, मनमानी और अन्याय का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आवास के सामने वाली सड़क पर धरने पर बैठ गए. अमिताभ ठाकुर ने अपने निलंबन के आठ महीने के बाद भी खुद को नौकरी पर बहाल न किए जाने और बुजुर्ग को थप्पड़ मारने वाले पुलिस अफसर को मात्र आठ दिनों बाद ही बहाल किए जाने को लेकर सरकार की पक्षपाती मंशा पर सवाल खड़ा किया. इसी अन्याय के खिलाफ वह धरने पर बैठे. धरने पर बैठने की घोषणा वह पहले ही कर चुके थे.

धरने पर बैठे आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी जावीद अहमद को भेजे एक पत्र में कहा कि उन्हें जुलाई 2015 में गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण निलंबित कर दिया गया और आज तक निलंबित रखा गया है जबकि 90 दिनों की अवधि बीतने के बाद उनका निलंबन आदेश विधिशून्य हो गया है. अमिताभ के अनुसार, डीके चौधरी को 24 फ़रवरी को बुजुर्ग को थप्पड़ मारने की घटना के बाद निलंबित कर दिया गया लेकिन मात्र आठ दिन के बाद बहाल कर दिया गया. लेकिन उनको अभी तक निलंबित रखना साफ़ दर्शाता है कि उनके साथ भारी भेदभाव किया जा रहा है क्योंकि वह सिस्टम के भ्रष्टाचार व जंगलराज के खिलाफ आवाज उठाते रहते हैं.

निलंबित महानिरीक्षक पुलिस अमिताभ ठाकुर के आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास, पांच कालीदास मार्ग के चौराहे पर धरने पर बैठते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. दरअसल अमिताभ ठाकुर ने मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के सामने धरने पर बैठने की घोषणा की थी लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनको वहां नहीं जाने दिया. अमिताभ ठाकुर बुजुर्ग की पिटाई करने के मामले में निलंबित डीआइजी डीके चौधरी को एक हफ्ते में बहाल करने के खिलाफ धरना दे रहे हैं. उनकी मांग अपनी बहाली की भी है. अमिताभ ठाकुर बीते आठ महीने से निलंबित चल रहे हैं. अमिताभ की मांग है कि जब डीके चौधरी को एक हफ्ते में बहाल किया गया तो फिर उनको क्यों आठ महीने के बाद भी बहाल नहीं किया जा रहा है. बहाली की मांग कर रहे अमिताभ ठाकुर का अब मुख्यमंत्री से मुलाकात होने तक धरना देने का कार्यक्रम है.

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आईपीएस अमिताभ ठाकुर पर बन रही शार्ट फिल्म का प्रोमो और पोस्टर रिलीज

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की फोन धमकी पर डार्क लाइट फिल्म्स द्वारा बनायी जा रही शॉर्ट-फिल्म “अमिताभ: द स्ट्रगल कंटीन्यूज” का पहला पोस्टर और प्रोमो रिलीज़ किया गया. यह लगभग तीस मिनट की फिल्म होगी जिसमे अमिताभ की पत्नी नूतन ठाकुर द्वारा खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त के सामने दी गयी शिकायत के बाद की घटनाओं और इसकी पृष्ठभूमि में मुलायम सिंह द्वारा दी गयी धमकी और उसके बाद से अमिताभ और नूतन के साथ घट रही घटनाओं को सिनेमाई अंदाज़ में प्रस्तुत किया जाएगा.

फिल्म में मुख्य रूप से व्यवस्था के उस घिनौने चेहरे को दिखाए जाने की कोशिश है जो सच्चाई की आवाज़ को दबाने का काम करता है. फिल्म में इस तरह की लड़ाईयों में हर कदम में आने वाली बाधाओं और इन लड़ाईयों को जारी रखने की आतंरिक प्रेरणा को सामने रखा जायेगा. साथ ही फिल्म का उद्देश्य लोगों को तमाम कठिनाईयों के बाद भी हौसला नहीं हारने और सच्चाई के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करना होगा. प्रोमो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=pPLWsLUMl7c

The first poster and Promo of the short film being  made on the various incidents that happened in the aftermath of SP supreme Mulayam Singh’s threat to IPS officer Amitabh Thakur has been released today. The film shall be of 30 minutes duration where the large sequence of events that took place after Amitabh’s wife Nutan Thakur’s Lokayukta complaint against mining minister Gayatri Prajapati leading to Mulayam Singh’s phone threat and the various incidents happening with Amitabh and Nutan shall be presented in a cinematic fashion.

The film would try to realistically bring out the dark side of the system which tries to strangle the voice of truth. It would be presenting the various hurdles that come at every step of any such fight for truth and the inner motivation that drives people to continue such a struggle despite all odds. It aims at instilling courage and confidence in people to take up more such fights, despite all kinds of problems that come in the way.

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भारत सरकार ने कोर्ट में कहा- अगर अफसरों को मौलिक अधिकार चाहिए तो पहले इस्तीफा दें

इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा आईएएस, आईपीएस अफसरों द्वारा सरकारी कार्य और नीतियों की आलोचना पर लगे प्रतिबन्ध को ख़त्म करने हेतु दायर याचिका में भारत सरकार ने कहा है कि यह रोक लोक शांति बनाए रखने के लिए लगाई गयी है. राजीव जैन, उपसचिव, डीओपीटी द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार प्रत्येक सेवा संविदा में कुछ मौलिक अधिकारों का हनन होता है.

इसके अनुसार यदि सरकारी सेवकों को सरकार की किसी हालिया नीति अथवा कार्य की आलोचना का अधिकार दे दिया गया तो इससे अनुशासन नहीं बचेगा, जो कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी जिससे प्रशासन में अराजकता आएगी और यह लोक शांति को प्रभावित कर सकता है.

हलफनामे के अनुसार हर व्यक्ति अपनी मर्जी से सेवा में आता है और उसे अधिकार है कि सेवा से अलग हो कर अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करें, फ्री-लांसर सरकारी सेवा में न आयें. याचिका में कहा गया था कि अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली के नियम 7 में किसी भी प्रकार के मंतव्य पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 19(2) में दिए किसी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है.

Govt in HC: Bureaucrats resign to exercise Fundamental Rights

In a petition filed by IPS Officer Amitabh Thakur in Lucknow Bench of Allahabad High Court challenging the prohibition of All India Services officers to criticize government policy, the Central government has said that such restriction is placed in interest of public order.

The counter reply filed through Rajiv Jain, Under Secretary, DOPT says that every contract of service involves invasion of Fundamental Rights. It says if government servants are permitted to make adverse criticism of any recent government policy or action, there will be no discipline, leading to lack of efficiency in work, chaos in administration and ugly situations which in final analysis may lead to public disorder.

The counter reply also says that every person voluntarily joins these services and it is open for them to exercise their fundamental rights by resigning from the service. Free lancers need not enter government service.

The petition had said that rule 7 of the All India Services Conduct Rules 1968 with blanket prohibition on any adverse criticism of any current government act or policy is against the right to freedom of expression under Article 19(2).

भारत सरकार द्वारा दाखिल किए गए जवाब को देखने के लिए नीचे क्लिक करें>

Counter reply by Govt of India

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अमिताभ ठाकुर और संघ के खिलाफ अभद्र भाषा इस्तेमाल करने पर आजम खान के खिलाफ परिवाद दर्ज

Amitabh Thakur : आज़म खान पर परिवाद दर्ज.. मैंने मंत्री श्री आज़म खान द्वारा कल रामपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और मेरे लिए अत्यंत अभद्र भाषा और शब्दों का प्रयोग करने के सम्बन्ध में सीजेएम लखनऊ के समक्ष शिकायत दायर किया. सीजेएम श्री हितेंद्र हरि ने शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करते हुए मेरा धारा 200 सीआरपीसी में बयान दर्ज करने के लिए 15 दिसंबर 2015 नियत किया. श्रीआज़म खान ने रामपुर में पत्रकार वार्ता में मेरे लिए प्रशासनिक अधिकारी के नाम पर कलंक जैसे शब्दों का प्रयोग किया था. साथ ही उन्होंने आरएसएस के लिए अत्यंत दूषित शब्दों का भी प्रयोग किया था. मैंने इन्हें धारा 500 आईपीसी में मानहानि और धारा 153, 153ए, 504, 505 आईपीसी के अधीन समाज में विद्वेष फ़ैलाने वाला अपराध बताते हुए कार्यवाही की प्रार्थना की है.

Case registered against Azam Khan. Today I presented a complaint before CJM Lucknow against minister Sri Azam Khan regarding the minister’s use of extremely improper language against me and the Rashtriya Swayamsewak Sangh. CJM Lucknow Sri Hitendra Hari got it registered as a Complaint case, fixing 15 December 2015 for recording my statement under the provisions of section 200 CrPC. In a press statement in Rampur, Sri Azam Khan had used bad words for me, calling me a blot on the administrative system. He had also used extremely objectionable words for members of RSS. Hence I prayed for taking action against Sri Khan under section 500 IPC for defamation and sections 153, 153A, 504, 505 IPC for creating hatred in society.

यूपी के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के फेसुबक वॉल से.

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मुलायम से पंगा लेने वाले आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर भाजपा में शामिल होंगी

मैंने आज भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया है. राजनीति में आने के मेरे फैसले का मुख्य कारण है कि मैंने अपने सामाजिक कार्यों के दौरान यह अनुभव किया कि वृहत्तर स्तर पर समाज की सेवा कर पाने और अधिक प्रभाव के सामने अपनी बात रख पाने के लिए एक राजनैतिक पार्टी के मजबूत संबल की बहुत अधिक जरुरत है. भाजपा में शामिल होने के मुख्य कारण यह हैं कि इस पार्टी में वंशवाद नहीं है, इसमें सर्वाधिक आतंरिक प्रजातंत्र है, यह विभिन्न वगों में विभेद नहीं करता है, एक अखिल भारतीय पार्टी है और राष्ट्रीयता की भावना पर आधारित है. जल्द ही मैं औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण करुँगी.

Today I have decided to join BJP. The main reason for my joining politics is that I have understood during my social activities that there is an immense need for support of a strong political party to work more effectively and efficiently for the larger social goals. The reasons for joining BJP are that it does not have any dynastic politics, has the highest inner democracy, it does not discriminate between different classes, is an all India Party and is based on the concept of Nationality. Very soon I shall be taking formal membership of the Party.

यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी डॉ नूतन ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

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मैंने अमिताभ ठाकुर को फोन पर समझाया था, मेरा आशय डराना या धमकाना नहीं था : मुलायम सिंह यादव

Amitabh Thakur : मेरे केस में श्री मुलायम सिंह का कथित बयान जो विवेचक श्री के एन तिवारी, थाना हजरतगंज ने कथित तौर पर 30 सितम्बर 2015 को उनके 05 विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर जा कर लिया था-

“मैं आईपीएस अमिताभ ठाकुर व उनके परिवारीजनों से काफी अरसे से परिचित हूँ और बीच-बीच में यह मुझसे मिलने भी आते थे. विगत दिनों कुछ जनप्रतिनिधि तथा कार्यकर्ताओं तथा समाचार पत्र व मीडिया के माध्यम से शिकायत मिल रही थी कि जहाँ कोई संवेदनशील घटना होती है वहां जा कर मनमाने ढंग से बयानबाजी करते हैं जिससे वहां माहौल और ख़राब होता है. इसके लिए दिनांक 10 जुलाई 2015 को कुछ जनपदों के कुछ लोग आ कर मुझसे व्यक्तिगत शिकायत किये थे. इस पर मैंने ऐसा न करने हेतु फोन पर समझाया था. मेरा आशय उनको डराने या धमकाने का नहीं था.”

मेरा एकमात्र प्रश्न- जनहित के और गवर्नेंस में अनियमितता के प्रश्न उठा कर मैं ऐसा क्या गलत कर रहा था कि मुझे इस तरह समझाने की जरुरत पड़ गयी थी?

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English translation of Sri Mulayam Singh Yadav’s alleged statement recorded by investigating officer Sri K N Tiwari of Hazratganj police station on 30 September 2015 at his 05 Vikramaditya Marg residence –

“I know IPS Amitabh Thakur and his family members for long and previously he used to come to me now and then. During the last few days, I was getting complaints from public representatives and party workers along with newspapers and Media that he goes to every place where some sensitive incidence has taken place and issues irrelevant statements, which deteriorates the situation. On 10 July 2015 itself some people from various districts had made personal complaints to me against him after which I had advised him not to do so. My purpose was not to threaten or frighten him.”

My only Q- what wrong was I doing when raising matters of bad governance and public interest so as to be advised to stop it?

यूपी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.


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मुलायम-अमिताभ प्रकरण : दैनिक हिन्‍दुस्‍तान लखनऊ ने पहली खबर दबा दिया, दूसरी खिलाफ खबर छाप दिया!

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हां, मैंने विजिलेंस विभाग के डायरेक्टर भानु प्रताप सिंह को चोर और बेइमान कहा : अमिताभ ठाकुर

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छापा मारने आए विजिलेंस वाले सर्च-सीजर लिस्ट दिए बिना ही हमारे घर से भागने लगे : आईजी अमिताभ ठाकुर

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मुलायम की धमकी के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले आईपीएस अमिताभ ठाकुर के घर पर विजिलेंस का छापा

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एक जनपक्षधर आईपीएस के सामने बौनी साबित हो गई देश के सबसे बड़े सूबे की पूर्ण बहुमत वाली सरकार

इसे कहते हैं जनपक्षधरता की ताकत. लोग कहते हैं कि अगर आप नियम कानून पर चलेंगे, ईमानदारी व सत्य की वकालत करेंगे, आम जन के हितों को देखकर काम करेंगे तो आजकल का भ्रष्ट सिस्टम आपको कहीं का नहीं छोड़ेगा. लेकिन बात जब अमिताभ ठाकुर जैसे आईपीएस की हो तो लगता है कि नहीं, अब भी लड़ने वाले लोग अकेले होकर भी पूरे सिस्टम को अपने सामने झुकने, बौना दिखने के लिए मजबूर कर सकते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों और भ्रष्ट नीतियों की पोल खोलने वाले जनपक्षधर आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को यूपी की पूर्ण बहुमत वाली सपा सरकार लाख कोशिश करके भी अरेस्ट नहीं कर पा रही है.

उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार पूरी तरह आमादा है कि अमिताभ ठाकुर को हर हाल में किसी भी मामले में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाए लेकिन ऐसा कर पाने में वह सफल नहीं हो पा रही है. ऐसा करने के लिए जिन अफसरों को आदेशित किया जाता है, उनके पैर हांथ कांपने लग रहे हैं. इसी क्रम में पिछले दिनों विजिलेंस का छापा डलवाकर अमिताभ ठाकुर को डराने और किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर जेल में डालने की कोशिश हुई लेकिन नतीजा आया उलटा. विजिलेंस वालों को खुद चोर की तरह अमिताभ ठाकुर के घर से भागना पड़ा.

असल में मुलायम सिंह यादव की धमकी वाले टेप को पब्लिक करके आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने जो पंगा सपा के शीर्ष नेताओं से लिया है, उसके बाद से ही यह माना जा रहा था कि अमिताभ ठाकुर को देर सबेर किसी मामले में गिरफ्तार किया जाएगा. सरकार की कोशिश भी ऐसी ही है. लेकिन जाने ऐसा क्यों है कि देश के सबसे बड़े सूबे की पूर्ण बहुमत वाली सरकार अमिताभ ठाकुर के आगे बौनी साबित हो जा रही है. इसी मसल पर नवभारत टाइम्स लखनऊ में आज एक पठनीय टिप्पणी प्रकाशित हुई है जिसे पढ़कर प्रदेश भर के समाजवादी नेताओं को अपने बौनेपन का एहसास हो रहा है. आप भी पढ़ना चाहते हैं तो नीचे लिखे Next पर क्लिक करिए>>

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आईपीएस अमिताभ ठाकुर हजरतगंज थाने के सामने धरने पर बैठे, मुलायम के खिलाफ एफआईआर लिखने की मांग

यूपी में जंगलराज चरम पर है. सीएम अखिलेश के पिताजी मुलायम सिंह यादव एक आईपीएस अफसर को फोन पर धमकाते हैं तो उस अफसर ने थाने में धमकी के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अप्लीकेशन दिया. थाना पुलिस ने एफआईआर जब दर्ज नहीं किया तो आईपीएस अफसर कोर्ट जाता है और कोर्ट की तरफ से थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए आदेशित किया जाता है. बावजूद इसके पुलिस प्रशासन चुप्पी साधे बैठे रहता है. इन हालात से दुखी आईपीएस अफसर थाने के सामने धरने पर बैठ जाता है.

जी हां. बात अमिताभ ठाकुर की हो रही है. इस जनपक्षधर आईपीएस अधिकारी ने सत्ता और शासन के काले चेहरे को बेनकाब किया तो इन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया जाने लगा. यहां तक कि निलंबित भी कर दिया गया है. अब इसी अफसर ने मुलायम सिंह यादव की धमकी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोर्ट पुलिस से हारने के बाद गांधी जी के रास्ते पर चलते हुए थाने के सामने धरने पर बैठने का रास्ता चुना. इस अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने और अपनी बात दुनिया के सामने लाने के लिए अमिताभ ठाकुर के साहस की प्रशंसा की जा रही है. खासकर सोशल मीडिया पर अमिताभ ठाकुर के पक्ष में भरपूर सपोर्ट दिख रहा है. लखनऊ के हजरतगंज थाने के सामने धरने पर बैठे आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को ढेर सारे पुलिस वाले घेरे हुए हैं. पुलिस ने कोशिश की थी कि वो धरने पर न बैठें लेकिन अपने जिद व जुनून के लिए चर्चित अमिताभ ने सत्ता से टकराने का रास्ता अख्तियार किया. कथित मुख्य धारा की मीडिया पर इस प्रकरण को न दिखाने छापने का भरपूर दबाव है.

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मुलायम के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने से दुखी आईपीएस अमिताभ ठाकुर थाने के सामने धरने पर बैठेंगे

Amitabh Thakur : श्री मुलायम सिंह यादव द्वारा 10 जुलाई 2015 को फोन पर धमकी देने के मामले में कोर्ट द्वारा 14 सितम्बर को समुचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद भी लखनऊ पुलिस द्वारा अब तक उसका पालन नहीं किये जाने के प्रति अपना कष्ट प्रकट करने हेतु मैं 01 अक्टूबर से थाना हजरतगंज के सामने अनिश्चितकालीन रूप से बैठूँगा. I shall be sitting indefinitely before Hazratganj police station from 01 October to show my pain at non-registration of FIR against Sri Mulayam Singh Yadav for phone threat on 10 July, despite the Court order passed on 14 September to register an FIR under appropriate sections.

अभी-अभी हजरतगंज थाने से एक दरोगा ने आ कर मुझे कल श्री मुलायम सिंह धमकी मामले में थाने के सामने नहीं बैठने की बात कही पर मैं निश्चित रूप से वहां बैठ कर अपनी व्यथा प्रकट करूँगा. कल से हजरतगंज थाने के सामने बैठने के सम्बन्ध में एसएसपी लखनऊ को भेजा जा रहा पत्र…

सेवा में,
एसएसपी,
लखनऊ

विषय- श्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मा० सीजेएम लखनऊ के आदेशों के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं करने पर अपना व्यक्तिगत कष्ट व्यक्त करने थाना हजरतगंज पर अनिश्चितकाल तक बैठने विषयक

महोदय,

कृपया निवेदन है कि मुझे दिनांक 10/07/2015 को श्री मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा धमकी दी गयी जिसके सम्बन्ध में मैंने दिनांक 11/07/2015 को थाना हजरतगंज में शिकायत दी पर एफआईआर दर्ज नहीं हुआ. इसके बाद मैंने दिनांक 23/07/2015 को आपको शिकायत दी पर एफआईआर दर्ज नहीं हुआ. फिर मैंने धारा 156(3) सीआरपीसी में मा० सीजेएम लखनऊ के समक्ष वाद संख्या 1761/2015 दायर किया जिसमे मा० सीजेएम ने अपने आदेश दिनांक 14/09/2015 द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए लेकिन इसके बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है.

इसके विपरीत समाचारपत्रों में लगातार आपके बयान आ रहे हैं कि श्री मुलायम सिंह ने जो कहा वह धमकी नहीं थी और इसमें किसी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है.

ऐसी स्थितियों में अब मेरे पास इस बात के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं कि मैं अपना व्यक्तिगत आत्मिक कष्ट प्रकट करने हेतु कल दिनांक 01/10/2015 से अनिश्चित काल के लिए थाना हजरतगंज के सामने बैठूं ताकि संभव है कि इससे मेरी व्यथा शासन और प्रशासन के बड़े-बड़े अफसरों तक जाए और मुझे न्याय मिल सके. मैं मौके पर अकेले अथवा अधिकतम अपनी पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर के साथ बैठूँगा.

यद्यपि एक व्यक्ति द्वारा किसी सार्वजनिक स्थान पर बैठने के लिए किसी भी अनुमति की आवश्यकता नहीं है पर एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते मैं अपना यह कर्तव्य समझता हूँ कि इन तथ्यों से आपको सूचित कर दूँ. अतः कृपया सादर सूचनार्थ प्रेषित.

(अमिताभ ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34526
amitabhthakurlko@gmail.com

पत्र संख्या- AT/Complaint/162/15 भवदीया,
दिनांक- 30/09/2015

प्रतिलिपि निम्न को कृपया सूचनार्थ-
1. प्रमुख सचिव गृह, उत्तर प्रदेश, लखनऊ
2. डीजीपी उत्तर प्रदेश, लखनऊ
3. डीएम लखनऊ
4. इंस्पेक्टर हजरतगंज

उत्तर प्रदेश के जनपक्षधर आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के फेसबुक वॉल से.

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