आज छपी इन तीन खबरों के जरिए जानिए भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा

Anil Singh : तीन खबरों में चाल-चरित्र और चेहरा! आज छपी तीन खबरें जो सरकार के चाल-चरित्र व चेहरे को समझने के लिए काफी हैं। एक, उत्तर प्रदेश के शामली कस्बे में एक मुस्लिम युवक का चेहरा कालिख से पोतकर सड़क पर जमकर पीटनेवाले बजरंग दल के जेल में बंद नेता विवेक प्रेमी पर लगा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर हटा लिया गया।

जहां सच्चाई दम तोड़ देती है उसे आकाशवाणी कहते हैं…

हम सभी जानते हैं कि हर संस्थान का अपना मैन्यूअल होता है जिसे हम नियमावली भी कहते हैं, जिसमें उस संस्थान को चलाने के कुछ नियम विधि संगत तरीके से रखे जाते हैं और उनका पालन करके ही कोई भी संस्थान अपने को चला पाती है, गैर सरकारी संस्थानों में मैन्यूअल की अनदेखी जग जाहिर है, नियम सिर्फ किताबों में रह जाते हैं उनका पालन शायद ही होता है।

भारत को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा क्यों बन जाता है भारतीय मीडिया!

 

(देर आए, दुरुस्त आए… गलत प्रचारित खबर की सच्चाई अब सामने ला रहा भारतीय मीडिया.. एक अखबार के मेरठ-बागपत संस्करण में प्रकाशित खबर…)


भारतीय मीडिया किस तरह अपने ही देश को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा जाने-अनजाने बन जा रहा है, इसे जानना-समझना हो तो आपको बागपत के साकरोद गांव का मामला समझ लेना चाहिए. इस गांव के बारे में इंग्लैंड समेत कई देशों में खबर प्रचारित प्रसारित कर दी गई कि यहां की खाप पंचायत ने दो बहनों के साथ रेप कर उन्हें नंगा घुमाए जाने का आदेश दिया है. इसका कारण यह बताया गया कि लड़कियों का भाई ऊंची जाति की शादीशुदा औरत के साथ भाग गया था, इसलिए बदले में लड़कियों को दंडित करने हेतु दोनों बहनों से रेप करने का फरमान सुनाया गया.

डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित घर पर कांस्टेबल सुसाइड मामले का सच क्या है…

हमने डीआईजी गोरखपुर के लखनऊ स्थित गोमतीनगर आवास पर कांस्टेबल अरुण कुमार की आत्महत्या के सम्बन्ध में अरुण कुमार के मामा बलराम चौधरी से बात की. उन्होंने हमें बताया कि वे पिछले करीब डेढ़ माह से लखनऊ में डीआईजी गोरखपुर के मकान पर रह रहे थे जिनसे वे अपने तीन मोबाइल नंबर 098076-89970, 091258-66210, तथा 073983-47607 से लगभग रोज बात करते थे. आरआई, गोरखपुर देवी दयाल ने बताया कि वे डीआईजी गोरखपुर कार्यालय से सम्बद्ध थे और दिनांक 23 नवम्बर को डाक लेकर लखनऊ गए थे. वहीँ इस बारे में डीआईजी रेंज कार्यालय ने बताया कि अक्टूबर 2014 में उनकी उस कार्यालय से सम्बद्धता समाप्त हो गयी थी.