मीडियाकर्मियों की हड़ताल के कारण पटना में आज नहीं छपा ‘आज’

ऐसा तो कभी नहीं हुआ था। पटना से प्रकाशित 35 साल के नौजवान ‘आज’ अखबार में पहली बार हड़ताल हुई। राष्ट्ररत्न शिवप्रसद गुप्त द्वारा स्थापित इस अखबार के प्रबंधन ने उनके मान्य नियम और परंपराओं की धज्जियां उड़ा कर रख दी है।  नियमित रूप से वेतन का भुगतान, सालाना इन्क्रीमेंट देने और बोनस की मांग को लेकर पटना से प्रकाशित ‘आज’ अखबार के कर्मचारियों ने कल एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की। नतीजा हुआ कि अखबार का आज प्रकाशन नहीं हो सका। अखबारों की मंडी से ‘आज’ अखबार आज गायब रहा।

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कर्मचारियों की शिकायत है कि प्रबंधन ने चार-पांच साल से सालाना इंक्रीमेंट नहीं दिया है। मासिक पगार भी एक माह का रोक कर देता है। किसी को इएसआइ की सुविधा नहीं देता। सारे कर्मी ठेका पर हैं। मसलन किसी को दो हजार तो किसी को चार हजार वेतन दिया जाता है। लेकिन सरकारी विज्ञापन की भरमार रहती है। सर्कुलेशन के फर्जी आंकड़े की बदौलत सरकार की आंख में धूल झोंक कर विज्ञापन हथियाये जा रहे हैं। बिहार में आज का प्रकाशन सन 1979 की 28 दिसम्बर को शुरू हुआ था। हड़ताल की कभी नौबत नहीं आयी। अब तो हालात ऐसे हैं कि वेतन तो मिलता नहीं, मजीठिया कहां से देंगे। हैरत है बिहार के पत्रकार संगठनों की रहस्यमय चुप्पी। किसी कोने से तो आवाज उठे।

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