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आश्चर्यजनक किंतु सत्य- सुभाष चंद्रा ने अपने चैनल की रिपोर्टिंग के लिए रिया चक्रवर्ती से माफी मांगी!

जी मीडिया समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती से माफी मांगी है। चंद्रा ने रिया को सीबीआई द्वारा क्लीन चिट मिलने के बाद माफी मांगने से संबंधित ट्वीट किया है।

बता दें कि यह पूरा मामला सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस का है। उस वक्त रिपब्लिक टीवी, टाइम्स नाउ नवभारत समेत विभिन्न चैनलों ने इस मामले में जो कवरेज किया उसके लिए एंकरों और चैनल प्रबंधनों के प्रति नाराजगी भी देखी जा रही है। इस बीच चंद्रा ने माफी मांगकर उचित पहल की है। नीचे देखें चंद्रा ने अपने ट्वीट में क्या कुछ लिखा है…?


शीतल पी सिंह-

आश्चर्यजनक किंतु सत्य.. Zee न्यूज़ के मालिक सुभाष चंद्रा ने एक्टर सुशांत सिंह सुसाइड मामले में अपने चैनल की रिपोर्टिंग और जिस तरह से उनके चैनल द्वारा रिया चक्रवर्ती को टारगेट किया गया उसके लिए माफ़ी माँगी है।


ZEE मालिक सुभाष चंद्रा ने अपने ट्वीट में क्या लिखा?… देखें

पहला ट्वीट:

सुशांत राजपूत हत्या मामले में सीबीआई ने क्लोज़र रिपोर्ट दायर कर दी है। मेरा मानना है कि यह विश्वसनीय सबूतों की कमी के कारण है। इसमें किसी तरह की अस्पष्टता की गुंजाइश नहीं है, इसलिए इसका मतलब है कि कोई मामला नहीं बनता।

पिछली घटनाओं को देखते हुए, मुझे लगता है कि रिया चक्रवर्ती को मीडिया द्वारा आरोपी बनाया गया, जिसमें उस समय ज़ी न्यूज़ के संपादक और रिपोर्टर अग्रणी भूमिका में थे। – (1/2)

दूसरा ट्वीट:

अन्य चैनलों ने ज़ी न्यूज़ का अनुसरण किया। ज़ी न्यूज़ का मेंटर होने के नाते, मैं उन्हें सलाह दूंगा कि वे हिम्मत दिखाएं और माफी मांगें। मैं रिया से माफी मांगता हूं, भले ही इसमें मेरी कोई प्रत्यक्ष भागीदारी न रही हो।

मैं बाहर से ‘एक मुख रुद्राक्ष’ और अंदर से ‘एक समान’ हूं। जो सत्य है, वही कहता हूं। – (2/2)


सुभाष चंद्रा की माफी पर वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह की प्रतिक्रिया…

आदरणीय सुभाष चंद्रा जी आपने आगे बढ़ कर ये स्वीकारा है कि रिया चक्रवर्ती को अभियुक्त की तरह पेश करने की मुहिम Zee News ने शुरू की और फिर दूसरे चैनलों ने इसका अनुसरण किया।

आपने ये भी लिखा है कि आपका कोई क़सूर नहीं लेकिन आप अपने एडिटरों और रिपोर्टरों की उस समय की ग़लती के लिए माफ़ी माँगते हैं। ये आपका बड़प्पन है। आपको साधुवाद

आपके इन शब्दों में, मैं एक पत्रकार के तौर पर व्यक्तिगत रूप से, ऐसा अर्थ भी पढ़ पा रहा हूँ कि किसी एडिटर-रिर्पोटर को ख़बरों के मामले में ऐसी ग़लती करनी नहीं चाहिए कि आगे चल कर संस्था प्रमुख को माफ़ी माँगनी पड़े!

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