जी न्यूज के दागदार संपादक और दलाली में जेल जा चुके सुधीर चौधरी पत्रकारिता की नसीहत दे रहे हैं राजदीप सरदेसाई को!

(File Photo Vinit Kumar)

Vineet Kumar : जी न्यूज के दागदार संपादक और दलाली मामले में जेल जा चुके सुधीर चौधरी आज राज राजदीप सरदेसाई को पत्रकारिता कैसे की जाए, नसीहत दे रहे हैं. चैनल शाम से एकतरफा स्टोरी चला रहे हैं. ‪#‎shameaAbroad‬ को ट्रेंड बनाने की कोशिश में लोगों से प्रतिक्रिया मांग रहा है…. आलोक मेहता जैसे बुरी तरह साख गंवा चुके संपादक हां में हां मिला रहे हैं. मुझे राजदीप सरदेसाई के पक्ष में कुछ नहीं कहना है… बस अफसोस इस बात का है कि आप वरिष्ठ, अनुभवी मीडियाकर्मियों ने जिस तरह अपनी जुबान बंद रखी, गलत का खुलकर विरोध नहीं किया, कई बार सरोगेट ढंग से शह दिया तो ऐसे दिन देखना स्वाभाविक ही है.

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जी न्यूज के दागदार संपादक और दलाली मामले में बुरी तरह साख गंवा चुके सुधीर चौधरी को जिस दिन गिरफ्तार किया गया, उस रात की बुलेटिन में देश के न्यूज चैनल के बेहद ही विश्वसनीय आवाज और चेहरा पुण्य प्रसून वाजपेयी ने कहा- आज देश के लिए काला दिन है, आज देश के लिए इमरजेंसी जैसा दिन है..वाजपेयीजी को जितना मैं जानता-समझता और पढ़ता हूं, ये बात कहने के बाद संभवतः भारी बोझ महसूस किया होगा और जी न्यूज छोड़ दिया..उनकी गिल्ट ऐसा करके कितनी कम हुई होगी, नहीं मालूम लेकिन तोड़-जोड़ करके, बीइए-एनबीए सबको धत्ता बताकर ये दागदार संपादक न केवल जेल से बाहर आ गया बल्कि पहले की तरह उसी बेशर्मी से मूल्यों, नैतिकता, सरोकार का ज्ञान दर्शकों को देने लगा. वाजपेयीजी बेहद सच्चे, संवेदनशील और सादगी पसंद टीवी पत्रकार हैं. ऐसे लोग टेलीवजन दुनिया में अब नहीं आते..उन्हें सुधीर चौधरी की गिरफ्तारी के लिए इमरजेंसी शब्द प्रयोग का शायद हमेशा अफसोस रहे लेकिन उनके जी न्यूज छोड़ देने के बावजूद इन्डस्ट्री के भीतर सडांध कम तो नहीं हो गयी. व्यक्तिगत स्तर का ये फैसला कुछ बदल तो नहीं ही पाया.

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आप अपने देश में रहकर खबर के नाम पर दलाली मामले में जेल जाइए ( जी न्यूज), जेल जाते समय पुलिस को धमकाइए कि तुम्हें पता नहीं है कि मैं कौन हूं..थप्पड़ खाकर गाल रगड़िए. फर्जी स्टिंग ऑपरेशन करवाकर एक शिक्षिका को देह व्यापार का धंधा करनेवाली बताइए( लाइव इंडिया फर्जी स्टिंग ऑपरेशन) लेकिन विदेश में जाने के बाद राष्ट्रभक्त हो जाइए…सुधीर चौधरी की इस अदा पर कौन नहीं मर मिटेगा दोस्तों.

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महिलाओं को शुरु से अपमानित करते आए हैं सुधीर चौधरीः पहले शिक्षिका उमा खुराना का, अब सागरिका घोष का…  साल 2007 में सुधीर चौधरी जिस लाइव इंडिया के संपादक थे, उनके एक नउसिखुए रिपोर्टर प्रकाश सिंह जो कि रातोंरात चमकना चाहते थे, दिल्ली के एक स्कूल की शिक्षिका का फर्जी स्टिंग किया और उन्हें अपनी स्कूली छात्राओं को देह व्यापार में धकेलने, दलाली करनेवाला बताया. नतीजा, दिल्ली के तुर्कमान गेट पर दहशत का माहौल बन गया. हजारों की भीड़ और शिक्षिका उमा खुराना को खींचते, कपड़े फाड़ते धकियाते लोग..उस दिन उमा खुराना को लोग जान तक से मार देते. जांच हुई. स्टिंग फर्जी पायी गयी. प्रकाश सिंह को निकाला गया. चैनल एक महीने तक ब्लैक आउट किए जाने का फैसला आया..इस पूरे मामले पर संपादक सुधीर चौधरी ने कहा- रिपोर्टर ने मुझे धोखे में रखा, मुझे इस स्टोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. इस मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया. आज इसी सुधीर चौधरी को न केवल अपने चैनल, अमेरिका के चैनल एबीसी की, मोदी सरकार की पल-पल की खबर और जानकारी है बल्कि राजदीप सरदेसाई और मोदी भक्तों के बीच झड़प में राजदीप की पत्नी( उनके लिए सागरिका घोष की पहचान बस यही है, उनकी अपनी पहचान से कोई मतलब नहीं) के नाम को कैसे घसीटा जा सकता है?

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मोदी भक्त और राजदीप सरदेसाई के बीच झड़प में उनकी पत्नी की क्या भूमिका है? हम ये बिल्कुल नहीं कह रहे कि राजदीप सरदेसाई पूरी तरह निर्दोष हैं..लेकिन राजदीप सरदेसाई पर लगातार सवाल कर रहे जी न्यूज से ये कौन पूछेगा कि इस झड़प में राजदीप की पत्नी सागरिका घोष की क्या भूमिका रही है ? सागरिका का नाम जी न्यूज जिस तरह अपनी बुलेटिन में लगातार घसीट रहा है, क्या उसी मीडिया की नैतिकता के दायरे में आता है जिसकी दुहाई दागदार और दलाली के आरोप में जेल जा चुके चैनल के संपादक सुधीर चौधरी, अलग-अलग बुलेटिन के एंकर और आलोक मेहता जैसे संपादक दे रहे हैं. राजदीप सरदेसाइ पर कांग्रेसी होने का ठप्पी लगाने के लिए सागरिका घोष को अलग से टारगेट करना जी न्यूज की किस पत्रकारिता की नैतिकता का नमूना है. आप इस पैकेज को देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि जो झड़प हुई है, उसके लिए राजदीप सरदेसाई न केवल सागरिका घोष से सलाह-मशविरा करके किया बल्कि इसलिए भी किया क्योंकि वो कांग्रेसी हैं..अगर राजदीप इतने दुराग्रही हैं तो जी न्यूज, सुधीर चौधरी तो महान दूरदर्शी ही हुए. https://www.youtube.com/watch?v=54xGasucqAc

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जी न्यूज ने पत्रकारिता की नई परिभाषा दी. चैनल का कहना है कि अगर आपके देश का प्रधानमंत्री भारत को ब्रांड बनाने की कोशिश में विदेश जाता हो तो आप लोगों से कोई ऐसा सवाल न करें कि जिससे कि देशभक्ति पर आंच आ जाये.. आलोक मेहता एंकर और सुधीर चौधरी के समर्थन में कह रहे हैं कि आप पहले भारतीय हैं, उसके बाद पत्रकार है. भारतीयता और मोदी भक्ति कैसे एक-दूसरे में इमर्ज किया जा रहा है, देखते जाइए. सवाल बहुत सीधा है कि अगर आपकी देशभक्ति इस बात से निर्धारित होती है कि विदेश में कोई आपके नेता, मंत्री या प्रभावशाली व्यक्ति से असहमति में बात न करे, खबर न दिखाए तो क्या यही बात आप दूसरे देशों के संदर्भ में बर्दाश्त करते हैं?

युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.


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जी न्यूज के सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के समीर अहलूवालिया के स्टिंग की सीडी, जिसके बाद ब्लैकमेलिंग के आरोप में ये दोनों संपादक जेल गए, देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें… http://goo.gl/N96BR8

 

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Comments on “जी न्यूज के दागदार संपादक और दलाली में जेल जा चुके सुधीर चौधरी पत्रकारिता की नसीहत दे रहे हैं राजदीप सरदेसाई को!

  • VINEET KUMAR JAISE PATRKARO KO RAJDEEP ME KOI BURAI NAHI DIKHEGI KYONKI RAJDEEP KE PAS SECULAR HONE KA BITO POWE JO THAHARA, IN SECULAR CONGRESSI V VAMPANTHIYON KO DALALI V BINA TATHYO KI JANCH KIYE UGALI LENI AADAT JO THAHARI, BJP V SANGH KO GALI DENA INKA JANMSIDH ADHIKAR H LEKIN CONGRESS V KOMREDO KI HARKAT PAR YAH CHUP BAITH JATE H

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  • Prashant Singh says:

    विनीत जी सुधीर कुमार मीडिया मे बड़े दलाल है यह तो बात हम सबको पता है लेकिन पुण्यप्रसून वाजपेयी?
    आप किस मुह से इनकी सच्चाई का बखान कर रहे हैं? वाजपेयी को पूरे देश ने केजरीवाल के साथ इंटरव्यू मे सेटिंग करते हुए पूरे देश ने देखा है वो कितने सच्चे पत्रकार है यह पूरा देश जान चुका है। लेकिन आपको कुछ लोग बड़े पत्रकार बड़े पत्रकारों की च्प्लूसी से बाज नही आते है।

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  • विनीत जी आप या तो बहुत भोले हैं या फिर जान बूझ कर अनजान बन रहे है हैं. बाजपेयी जी ने मालिको को ये कहा था की आप चैनल की कमान हमारे हाथ में दे दीजिये बस. हम संभाल लेंगे. वो ज़ी में कंसल्टिंग एडिटर थे। उन्हें ये भरोसा दे दिया गया. बस वो स्टूडियो की ओर दौड़ लिए और कर दी सुधीर समीर की तुलना इमर्जेंसी के पत्रकारों से. पर ज़ी के मालिको ने धोखा दे दिया. इन्हे एडिटर घोषित करने के बजाये राकेश खर को कार्यवाहक एडिटर घोषित कर दिया और सुबह चैनल की प्रेस कांफेरेंस में खर ने ही मोर्चा संभाला. इससे आहात होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
    क्या कहीं उन्होंने कहा या फिर लिखा की की वो गिल्टी फील कर रहे हैं? आप यु ही खुद उन्हें देवता बना रहे हैं सर. .

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  • स्टोरी बनाकर प्रकाशित्त करने अथवा अपने कैसे भी विचारों को प्रकशित कर जनता के समक्ष रखकर जनता को बेवकूफ बनाने का घोरख धंधा पत्रकारिता कहलाता है मुझे आज यकीं हुआ.अब तक मै पत्रकारिता लोगो की इच्छा आकांक्षाओ मांग भावना जरुरत आदि आवाज को माध्यम के द्वारा प्रकाशित करने को समज रहां था ,मेरी धारणा गलत साबित हुई.अबसे सच तो यह है की जो किसी भी लोगो को के विरुध्ध अपने तरीके से स्टोरी बनाके छापने को और टेबल में बैठ कर अपने व्यक्तिगत विचारों को जनता को थोपना ही पत्रकार्रीता है .इस लेख से तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है.समय बेसमय पत्रकार बोलते रहते है की जनता की आवाज को सरकार दबा रही है.पर पत्रकार जनता के कबसे हुए है?सरकारी तन्त्र के साथ ये जमात भी लुटती ही नजर आती है.सभ्य समाज में एक पत्रकार की हैसियत सकारी मुलाजिम से अधिक नहीं जो, जनता से गाहे बगाहे रिश्वत लेती रहती है.

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  • MUKESH KUMAR says:

    SIRF SUDHIR CHAOWDHARY HI NAHI PURA ZEE GROUP SAALE LOG YAHI KAAM KARTE HAI.BIHAR ME ZEE PURVAIYA KHOL KAR SALE LOG APNA PAUKET GARAM KAR RAHE HAI OR REPORTER KO PAISA NAHI DETE.MEETING KAR KE KAHA JAATA HAI DALALAI KARO.KISI BHI REPORTER KO PICHHLE DAS MAHINE SE PAISA NAHI DIYA SAALON NE

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