पूजन प्रियदर्शी-
सुनील सरदाना (Sunil Sardana) कैथल में अमर उजाला के लिए फील्ड में काम करते थे। पुलिस का उनका एक मित्र रोजाना ही साथ बैठता था। वर्दी के गुरूर में उनका मित्र एक चाय वाले को चांटा मार बैठा। उसकी सुनने की क्षमता चली गई।
अगले दिन दोस्ती का लिहाज किए बिना सुनील ने खबर फाइल कर दी। खबर छपी। जिला मुख्यालय पर हंगामा हो गया। एसपी साहब ने मौखिक रूप से हमारे प्रतिनिधि के मिनी सचिवालय में प्रवेश व रूटीन प्रेस नोट तक देने पर प्रतिबंध लगा दिया।
फिर जो हुआ वो महीनों पुलिस की फजीहत का कारण बना। खबरें पुलिस के नहीं पीड़ितों के हवाले से छपती रहीं। सुनील छा गए। मतलब,,,आप निकालते रहिए।

सुनील सरदाना-
प्रभु धन्य हो गया आज। 23 साल पुरानी बात वो भी इतने बेहतरीन तरीके से याद है और इतने सलीके से पिरोई गई है मानो कल की ही बात रही हो। पूजन प्रियदर्शी सर कमाल के थे वो दिन, कमाल की थी कलम की कला, कमाल का कार्यकाल था कैथल का।
अमर उजाला ने उस दौर में कैथल में जो डंका बजाया था वैसा फिर कभी हो ही नहीं पाया, और जो डंके आपने और मैंने बजाए, वो दौर भी कभी नहीं आ सका। याद ही होगी बस स्टैंड वाले चौक की यादें। आप, मैं, फोटोग्राफर रमेश बाबू, उपायुक्त कार्यालय के सामने ऑफिस और साथ में था वो ठरकी बाबा का पीसीओ। कुछ भी भुलाया ही नहीं जा सकता।
आप जैसे अनुभवी गुरू का जीवन में आना भी ऊपरवाले की नियती और खुद के अच्छे कर्मों का परिणाम है। आपके सहयोग से जो हिंदी टाइपिंग सीखी, आज गौरवांवित महसूस करता हूं कि उसकी स्पीड देखने के लिए लोग आते हैं, वीडियो बनाते हैं।
चप्पल में दुल्हन आपकी सुपरहिट स्टोरी थी, बारात की बस पर बिजली का तार गिरने से दर्जनों मौत हों या फिर कंडेला कांड, आपने सफलतापूर्वक तरीके से जिस प्रकार शब्दों में उकेरे, उसका आज भी कोई सानी नहीं।
याद है मुझे कि उस वक्त पर मेरे पास शब्दों की कमी हुआ करती थी लेकिन आपके पढ़ाए पाठ, अखबार पढ़ने की दी गई नसीहत ने मुझे उस मुकाम पर खड़ा किया कि कम उम्र में खुद को स्थापित कर पाया।
गोलू, गुडिया और भाभी जी आज भी याद आते हैं।



Sunil Kumar
July 2, 2025 at 6:01 pm
धन्यवाद bhadas4media टीम