रायबरेली। जनपद की पत्रकारिता जगत के लिए आज का दिन अत्यंत दुखद रहा। अपनी धारदार लेखनी और पुलिस विभाग की खबरों पर गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार सूरज यादव का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से मीडिया जगत और उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर है।
‘राष्ट्रीय सहारा‘ में काम करते हुए पुलिस बीट में रही विशेष पहचान
सूरज यादव ने लंबे समय तक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘राष्ट्रीय सहारा’ में जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दीं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें मुख्य रूप से ‘क्राइम बीट’ का माहिर माना जाता था। पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और आपराधिक मामलों की बारीकियों को समझने की उनकी अद्भुत क्षमता के कारण उनकी खबरें अक्सर चर्चा का विषय रहती थीं। जिले के पुलिस अधिकारियों से लेकर आम जनता तक, उनकी रिपोर्टिंग का लोहा सभी मानते थे।
कल डलमऊ घाट पर दी जाएगी अंतिम विदाई
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, सूरज यादव पिछले काफी समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की परेशानियों के चलते वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे थे। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद आज उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनका अंतिम संस्कार कल, रायबरेली के पवित्र डलमऊ घाट पर संपन्न होगा, जहाँ उनके परिजन, पत्रकार साथी और मित्रगण उन्हें अंतिम विदाई देंगे।
पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति
एक निर्भीक और अनुभवी पत्रकार के रूप में सूरज यादव ने रायबरेली में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उनके सहयोगियों का कहना है कि क्राइम रिपोर्टिंग की जो समझ सूरज जी के पास थी, वह विरले ही देखने को मिलती है। उनके निधन पर जिले के पत्रकारों, पुलिस कर्मियों और विभिन्न संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे जिले की पत्रकारिता के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
बड़े भाई की तरह स्नेह देने वाले पत्रकार साथी सूरज यादव जी का जिला अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन, ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे और परिवार को असीम दुःख सहन करने का साहस दे।
विनम्र श्रद्धांजलि, ओउम शांति।-कुमार देवेश
एक दुखद खबर मिल रही है
पत्रकार Suraj Yadav जी अब हमारे बीच नहीं रहे,उनका असमय जाना रायबरेली के पत्रकारिता जगत में एक खाली स्थान छोड़ गया है सूरज जी अच्छे स्वभाव के व्यक्ति थे. अघोरेश्वर महाप्रभु से कामना है कि वह सूरज जी की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और उस पीड़ित परिवार को इतनी शक्ति दें कि वह इस दुख को सह सके.ओम शांति ओम
-गोविंद सिंह एडवोकेट
अनुज अवस्थी-
आज रात का सन्नाटा कितना चुभ रहा है। दिल में एक ऐसा शून्य फैल गया है कि सांस लेना भी बोझिल लग रहा है। वो आखिरी कॉल… अभी भी कानों में गूंज रही है। सिर्फ दो शब्द—”भाई, एम्स…”।
आवाज इतनी कमजोर, इतनी थकी हुई कि लगा जैसे हर अक्षर के साथ उनकी जिंदगी का एक-एक लम्हा निकल रहा हो। मैने कहा अभी बाहर हूं, भाई रेफर कराकर एम्स पहुंचो भर्ती कराया जाएगा। उनकी पत्नी बोली, भइया बात नहीं कर पा रहे हैं आप आ जाइए। मैं उन्हें बताता बाहर हूं इससे पहले फोन कट। दोबारा मिलाने पर उठा नहीं, और आज ये खबर… कि वो अब इस दुनिया में नहीं रहे। वो जा चुके हैं, वहां, जहां से कोई फोन नहीं आता, कोई मैसेज नहीं आता, कोई भाई नहीं कहता।
सूरज यादव सिर्फ एक साथी नहीं थे, वो हमारे बीच का वो धड़कता हुआ हिस्सा थे, जो हर मुश्किल खबर में भी उम्मीद की किरण ढूंढ लेता था। उनकी सूचनाएं कभी गलत नहीं होती थीं। कितनी बार रात के 12-1 बजे फोन आता था-“अनुज भाई, ये खबर चेक कर लो, सच है”—और सच ही होता।
खास कर पुलिस विभाग की खबरें। उनकी पैठ अंदर तक थी। कई उनकी सटीक सूचना के कारण हमारी स्टोरी पूरी हुई। कुछ बातों पर हमसे बहस भी हुई, कुछ गुस्से भी आए। कभी-कभी वो जिद्दी हो जाते, कभी मैं। फोन उन्हीं का आता “भाई चाय कहां पिलाओगे”। आज वो सब कितना फीका लगता है।
हां, इंसान थे तो कुछ कमियां भी होंगी—कौन सा इंसान परफेक्ट होता है? लेकिन उनकी अच्छाइयां इतनी ज्यादा थीं कि हर बार बुराइयां कहीं पीछे छूट जाती थीं। वो हम सबके साथी थे, भाई थे। पत्रकारिता का वो जुनून जो आजकल कम होता जा रहा है, वो उनमें जिंदा था। अब वो नहीं हैं। फोन उठाता हूं तो लगता है उनका नंबर डायल कर दूं। कोई खबर आती है तो मन करता है उन्हें बताऊं। पुलिस की कोई खबर मिलती है तो लगता है कि पुछूं कि—”भाई पता करो सही है क्या?” लेकिन जवाब सिर्फ खामोशी। वो खामोशी जो सीने को चीर रही है। सूरज भाई, तुम्हारी कमी अब जिंदगी का हिस्सा बन गई है। हर बार जब पुलिस की खबर लिखूंगा, तुम्हारी याद आएगी। तुम चले गए, लेकिन हमें सिखाते रहोगे कि पत्रकारिता सिर्फ शब्द नहीं—एक जिम्मेदारी है, एक इबादत है। जहां कहीं भी हो, बस इतना कहना चाहता हूं—खुश रहना।
ओम शांति…


