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सियासत

10 लाख की कार खरीदने के लिए पहले 23 लाख रुपये कमाने होंगे!

मध्यवर्गीय जेब से टैक्स दर टैक्स वसूला जा रहा है—कार खरीदने से लेकर रोज़मर्रा की ज़रूरतों तक। आम आदमी 10 लाख की कार के लिए 13 लाख से ज़्यादा टैक्स देता है, मगर बदले में मिलता क्या है? चमचमाते स्टेशन, जिन्हें बाद में कॉर्पोरेट घरानों के हवाले कर दिया जाता है।

ट्रेनें अब भी लेट चलती हैं, यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है और उड़ीसा जैसी दर्दनाक दुर्घटनाएं सबक नहीं बन पातीं। जनता पूछ रही है—उसकी गाढ़ी कमाई का पैसा विकास में लग रहा है या अडानी जैसे पूंजीपतियों की जेब भरने में?

नीचे कुछ प्रतिक्रियाएं पढ़ें….


शीतल पी सिंह-

मोदीजी का अर्थशास्त्र… मध्यमवर्गीय समाज जो मोदी भक्त है यह सूचना उनके लिए आप मध्यम बजट की 10 लाख की कार पर पहले 28% GST देते हैं 2.8 लाख रुपए फिर 1% cess, फिर 16% रोड टैक्स।

कुल मिलाकर 5 लाख टैक्स।

कार हो गई 15 लाख की। जिसे देने के लिए आपको 23 लाख कमाने होंगे, क्योंकि जब आप 8 लाख income tax देंगेतब पंद्रह लाख रुपए गाड़ी खरीदने के लिए निकाल पाएंगे।

अरे भाई आप कितना tax देते हैं? कमाई से ज्यादा तो आप tax देते हैं। दस लाख की कार खरीदने के लिए आप तेरह लाख रुपए टैक्स भरते हैं।

जनता से ज्यादा टैक्स वसूलना कोई योग्यता है?


राजीव ध्यानी-

हमें मालूम है, मिस्टर मों दी. हमारे टैक्स के पैसे से स्टेशन चमकाओगे. फिर अडानी को बेच दोगे.

होना यह चाहिए था, कि स्टेशन चमकाने के बजाए ट्रेन को समय पर चलाते. ट्रेन में यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाते. उड़ीसा जैसी दुर्घटनाएं रोकने पर हमारा पैसा लगाते. और हां, ट्रेन में यात्रियों की हत्या रोकते.

मगर देश का पैसा तो आपके अंडानी की जेब में भेजना है न!

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