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ट्रंप प्रशासन ने वॉयस ऑफ अमेरिका और रेडियो फ्री एशिया की फंडिंग में कटौती की, चीनी मीडिया में जश्न

बीजिंग | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वॉयस ऑफ अमेरिका (VOA) और रेडियो फ्री एशिया (RFA) जैसी मीडिया एजेंसियों की फंडिंग में भारी कटौती करने के फैसले पर चीनी सरकारी मीडिया ने खुशी जाहिर की है।

द गॉर्जियन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) समर्थित अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह “झूठी और भ्रामक रिपोर्टिंग” करने वाली अमेरिकी मीडिया एजेंसियों को करारा जवाब है। ग्लोबल टाइम्स के एक संपादकीय में लिखा गया, “VOA ने शिनजियांग में मानवाधिकारों को बदनाम करने, दक्षिण चीन सागर विवाद को तूल देने, चीन वायरस जैसी झूठी खबरें फैलाने और चीन की ओवरकैपेसिटी को मुद्दा बनाने जैसी कई गलत सूचनाएं फैलाई हैं।”

इसी तरह, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार बीजिंग डेली ने भी इस कदम को अमेरिका का “सही निर्णय” बताया।

ट्रंप प्रशासन ने क्यों की कटौती?

ट्रंप प्रशासन ने यूएस एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (USAGM) की फंडिंग घटाकर इसे न्यूनतम स्तर तक सीमित करने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह कदम “अमेरिकी करदाताओं को रेडिकल प्रोपेगेंडा का बोझ उठाने से बचाने” के लिए उठाया गया है। USAGM के तहत VOA और RFA जैसी मीडिया एजेंसियां आती हैं, जो विभिन्न देशों में स्वतंत्र पत्रकारिता को बढ़ावा देने का काम करती हैं। 2024 में इस एजेंसी का बजट 886 मिलियन डॉलर था और इसमें लगभग 3,500 कर्मचारी कार्यरत थे।

कटौती से मीडिया पर क्या असर पड़ेगा?

RFA के अध्यक्ष बे फेंग ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे तानाशाहों और निरंकुश सरकारों को दी गई एक बड़ी सौगात बताया। उन्होंने कहा, “यह फैसला उन 60 मिलियन लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर देगा, जो हर हफ्ते सच्ची खबरें पाने के लिए RFA पर निर्भर रहते हैं।”

RFA के पत्रकार संघ ने भी इस फैसले को “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए जीत” और “उत्तर कोरिया के तानाशाही शासन के लिए संजीवनी” करार दिया। संगठन ने इसे “अमेरिका की लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ उठाया गया कदम” बताया और कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया।

VOA के निदेशक माइक अब्रामोविट्ज के अनुसार, ट्रंप के इस फैसले के कारण VOA के 1,300 से अधिक कर्मचारियों को प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया है।

पत्रकारों ने जताई नाराजगी

VOA के वरिष्ठ पत्रकार ब्रायन पैडन ने इस फैसले को “गंभीर झटका” बताया। उन्होंने कहा, “यूक्रेन में रिपोर्टिंग के दौरान मुझ पर गोली चलाई गई, मुझे धमकाया गया, लेकिन मैंने हमेशा सच्ची खबरें दीं। VOA कोई प्रोपेगेंडा नहीं करता, बल्कि निष्पक्ष पत्रकारिता करता है।”

VOA की व्हाइट हाउस ब्यूरो प्रमुख पैट्सी विडाकुसवारा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “VOA का हर पत्रकार अपनी चार्टर नीति का सख्ती से पालन करता है। हम उन देशों से आते हैं, जहां निष्पक्ष पत्रकारिता की कोई स्वतंत्रता नहीं है, इसलिए हम इसकी कद्र करते हैं।”

दक्षिण-पूर्व एशिया पर असर

दक्षिण-पूर्व एशिया में इस फैसले के दूरगामी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी संस्था USAID द्वारा फंडिंग में कटौती के कारण म्यांमार में युद्ध अपराधों की रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।

पूर्व कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन सेन, जिन्होंने 2023 में सत्ता अपने बेटे को सौंप दी थी, ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह फर्जी खबरों, झूठ और उकसावे की राजनीति को खत्म करने में बड़ा योगदान देगा।”

हालांकि, कंबोडिया में VOA के पत्रकार सन नारिन ने इस फैसले को “लोकतंत्र के लिए काला दिन” बताया। उन्होंने कहा, “कंबोडिया में स्वतंत्र मीडिया लगातार संकट में है। अब जब VOA बंद हो जाएगा, तो जनता के पास निष्पक्ष खबर पाने का कोई विकल्प नहीं रहेगा।”

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