Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

तुर्की अहसान फरामोश मुल्क है!

सागर डी-

तुर्की के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। देश भर के कारोबारी तुर्की से नाता तोड़ रहे हैं। आज भारत सरकार ने तुर्की की एयरपोर्ट ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी चेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया की सिक्योरिटी क्लीयरेंस को रद्द कर दिया है।

पिछले दिनों तुर्की ने पाकिस्तान में भारत के हवाई हमलों की निंदा की और पाकिस्तान का समर्थन किया था। तब से देश के लोग गुस्से में हैं। तुर्की एहसान फरामोश मुल्क है। दो साल पहले तुर्किये में इस सदी का सबसे शक्तिशाली भूकंप आया, तो मदद के साथ सबसे पहले भारत के C-17 विमान पहुंचे थे। भारत ने नाम दिया- ऑपरेशन दोस्त। भारतीय सेना के जवानों ने मलबे में फंसे तुर्कियों को बचाया था। और तुर्की को देखिए उसने दोस्त बन कर पीठ में छुरा भोंका है।

अब Boycott Turkey ट्रेंड कर रहा है। अरबपति हर्ष गोयनका ने एक्स पर लिखा है-पिछले साल भारतीयों ने पर्यटन के जरिए तुर्किये और अजरबैजान को 4,000 करोड़ रुपए दिए। इससे नौकरियां पैदा हुईं। उनकी अर्थव्यवस्था, होटल, शादियां, उड़ानें बढ़ीं। आज, पहलगाम हमले के बाद दोनों पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। भारत और दुनिया में बहुत सी खूबसूरत जगहें हैं। कृपया इन दो जगहों पर न जाएं। जय हिंद।’

तो आप भी अगर तुर्किए घूमने का प्लान बना रहे हैं तो अपना इरादा बदल लीजिए।


हयात कुमार-

तुर्की से भारत ने 2024/25 में 2.8 बिलियन का इंपोर्ट किया जो उसके कुल आयात का मात्र आधा प्रतिशत है। जबकि भारत से तुर्की को 5.8 बिलियन का एक्सपोर्ट हुआ है। यानी हम ट्रेड सरप्लस हैं इसलिए इस तरह के कदम से तुर्की का कोई खास नुकसान नहीं है जबकि अगर तुर्की ने भी इसी तरह के कदम उठाए तो हमारे व्यापार को दस बिलियन का धक्का लग सकता है।

इसी तरह घूमने के लिए पूरे विश्व से 62 मिलियन लोग हर साल हर साल तुर्की पहुंचते हैं इनमें भारतीयों की हिस्सेदारी सिर्फ 330000 ही है। यानी तुर्की पहुंचने वाले कुल टूरिस्ट का मात्र आधा प्रतिशत। जबकि तुर्की से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या इसकी दोगुनी है। यहां भी हम नुकसान में हैं।

असल दुश्मन तो हमारा चीन है। जिससे न सिर्फ हमारी घरेलू उत्पादन इकाइयों को चोट पहुंच रही है बल्कि वह दक्षिण एशिया में हमारे पड़ोसियों के माध्यम से हमको घेर रहा है। आज नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, पाकिस्तान सब हमको चीन के दम पर आँखें दिखा रहे हैं। हम दिवाली पर सिर्फ चीनी झालर का बहिष्कार करके खुश हो जाते हैं जबकि हमारा कारपोरेट जगत उसके साथ लगातार व्यापार बढ़ा रहा है।


रवि-

Indians can BoycottTurkey all they want

But India can’t match Turkey when it comes to economic success and nationalism

Not one city in Turkey looks like a shithole unlike every city of India

Turkey is benchmark of backwardness in Europe yet so far ahead of India

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन