वाराणसी। रामकटोरा स्थित समता भवन में रोजगार एवं सामाजिक अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन के राष्ट्रीय संयोजक और ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के संस्थापक सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि देश में तीसरा पिछड़ा वर्ग आयोग (रोहिणी कमीशन) की रिपोर्ट को सरकार तत्काल सार्वजनिक करे और लागू करे, ताकि अति पिछड़ों को उनका हक मिल सके।
उन्होंने कहा कि देश के बड़े पूंजीपतियों पर संपत्ति कर लगाकर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की बुनियादी समस्याओं को दूर कर सकती है। उत्तर प्रदेश की पूंजी गुजरात और महाराष्ट्र में जा रही है, इसे “नए प्रादेशिक उपनिवेशवाद” की संज्ञा देते हुए उन्होंने इसे रोकने की जरूरत बताई। अखिलेन्द्र ने यह भी कहा कि भारत अपनी जीडीपी का एक हिस्सा तकनीकी निर्माण में खर्च कर पूरी दुनिया में तकनीकी सम्प्रभुता हासिल कर सकता है।
सम्मेलन में लोकतंत्र सेनानी विजय नारायण ने सरकार की तानाशाही के खिलाफ यलगार की बात कही। पूर्व एमएलसी एवं पूर्वांचल संयोजक अरविंद सिंह ने घोषणा की कि संगठन पूर्वांचल की सड़कों पर उतरकर शिक्षा से लेकर सबको रोजगार और अति पिछड़ों के अधिकारों के लिए संघर्ष करेगा।
बीएचयू के पूर्व छात्रसंघ महामंत्री सूबेदार सिंह ने कहा कि रोहिणी कमीशन लागू कर सरकार आरक्षण के मूल उद्देश्यों को मजबूत कर सकती है। समाजवादी नेता कुंवर सुरेश ने आगामी आंदोलन की रूपरेखा रखी। वहीं इंद्रजीत शर्मा और तिलकधारी बिंद ने पूर्वांचल के अति पिछड़ों को गोलबंद करने की बात कही।

गाजीपुर से राजेन्द्र वनवासी और आजमगढ़ से वीरेंद्र यादव ने अति पिछड़ों के साथ-साथ दलितों और आदिवासियों की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। योगीराज पटेल (पूर्वांचल किसान सभा) और राजकुमार गुप्ता ने किसानों को एमएसपी दिलाने का मुद्दा उठाया। छात्र नेता डॉ. हर्षवर्धन, शैलेन्द्र कवि, आशुतोष यीशु, विवेक यादव और हरीश मिश्रा ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग उठाई।
युवा मंच सोनभद्र की संयोजक सविता गोंड ने आदिवासी लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अभाव में पलायन की समस्या को उठाया। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए जोखू सिद्दीकी ने पसमांदा मुसलमानों के हक की बात रखी।
सम्मेलन में ‘तानाशाही का नाश हो’ और ‘देश के हर नागरिक को रोजगार और सामाजिक अधिकार मिले’ थीम के साथ एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तहत पूर्वांचल के संघर्षरत संगठनों के बीच से 11 सदस्यीय संयोजन समिति का गठन किया गया, जिसके नेतृत्व में अभियान आगे बढ़ाया जाएगा।
करीब 40 वक्ताओं ने सम्मेलन को संबोधित किया। लब्बोलुआब यह रहा कि देश में धन और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। यदि बड़े पूंजीपतियों पर 2 प्रतिशत टैक्स लगाया जाए और अर्थव्यवस्था को कृषि-आधारित बनाया जाए तो हर नौजवान को रोजगार और आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार रोजगार पर ठोस नीति नहीं बनाती और नागरिक अधिकारों का दमन बंद नहीं करती तो प्रदेश और देश का नौजवान आंदोलन के लिए बाध्य होगा। सम्मेलन के अंत में अगला कार्यक्रम चंदौली में जनसभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
संचालन डॉ. शम्मी कुमार सिंह ने किया।



