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‘पायर’ बनाने की कीमत : संघर्ष, अवसाद, कर्ज़ और फिर अंतरराष्ट्रीय पहचान… विनोद कापड़ी की कहानी देखें सुनें!

यशवंत सिंह-

टीवी न्यूज़ में जाने माने संपादक और चर्चित फ़िल्मकार विनोद कापड़ी ने अपने एक हालिया पॉडकास्ट में अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर खुलासा किया है। पायर फ़िल्म के निर्माण के बीच में एक ऐसी स्थिति आई कि उन्हें अपना सर्वस्व इस फ़िल्म के लिए झोंकना पड़ा। उनके सारे पैसे बैंक बैलेंस सब कुछ इसमें लग गया। उनके पास अपने फ्लैट का मेंटेनेंस चार्ज सोसाइटी को देने के लिए पैसे नहीं थे। स्टाफ को सैलरी देने के लिए पैसे नहीं थे। वे अवसाद में चले गए थे। तीन हफ़्ते मानसिक इलाज के लिए एडमिट रहना पड़ा था।

ये सब बातें विनोद कापड़ी बोल गए, और इसे ऐज़ इट इज चला भी दिया गया। ये बड़ी बात है। आमतौर पर लोग अपना बुरा वक्त छुपाते हैं। ये सब कुछ कहने के लिए बहुत आंतरिक ईमानदारी और साहस की ज़रूरत होती है। पायर फ़िल्म ने विनोद कापड़ी की क्रिएटिविटी का चरम दिखाया, दर्जनों इंटरनेशनल अवार्ड झोली में डलवाया, विदेश यात्राओं की न बंद होने वाला दौर एंजॉय किया। हम सब उनकी ये बातें सुन कर सोचते थे, कितना भाग्यशाली आदमी है ये, एक जन्म में सब कुछ पा लिया। लेकिन कहानी का डार्क साइड अब सामने आया है। सफलता अपनी क़ीमत भी माँगती है। पायर फ़िल्म के लिए विनोद कापड़ी को लगभग कंगाल होना पड़ा!

उनका पॉडकास्ट खोजें और ज़रूर देखें। दूसरों की सफलताओं से सम्मोहित तो होइए लेकिन ये भी ज़रूर सोचिए कि उस आदमी ने सफलता पाने के लिए क्या कीमत चुकाई है।

देखें पॉडकास्ट का एक अंश-

https://x.com/yashbhadas/status/2035679505877270544?s=46

पूरा पॉडकास्ट यहाँ देखें सुनें-

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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