ज़ी न्यूज से 11 साल बाद इस्तीफा देने वाले पत्रकार विशाल पांडेय ने संस्थान और सुभाष चंद्रा के नाम पत्र लिखा है. पत्र में विशाल ने जी में बिताए अपने दिनों को याद कर क्या लिखा है नीचे पढ़िए…
आप सभी को नमस्कार !!

जुलाई, 2013 में ज़ी न्यूज़ के साथ मैंने अपने करियर की शुरूआत की थी। आज 11 साल बाद एक अच्छे नोट पर यहाँ से प्रस्थान का निर्णय लिया है। किसी भी संस्था में जब हम 11 साल काम कर लेते हैं, तो वो हमारे घर और परिवार जैसा बन जाता है। मेरे लिए यह मेरा पहला घर बन चुका था।
ज़ी न्यूज़ मेरे सपनों का केन्द्र बना, यहाँ से मैंने बहुत कुछ सीखा। संस्थान ने मुझे अनगिनत और शानदार मौक़े दिए। मुझे एक बेहतरीन रिपोर्टर बनाया। किसी भी रिपोर्टर का एक सपना होता है कि वो ज़ी न्यूज़ जैसे संस्थान में काम करे, जो कि रिपोर्टर आधारित चैनल माना जाता है। यहाँ हर आवाज़ की एक वैल्यू मानी जाती है। Zee News हमेशा मेरे दिल में रहेगा, क्योंकि यह मेरा पहला प्यार है। ज़ी न्यूज़ संस्थान को मुझ पर भरोसा करने के लिए मैं सदैव आभारी रहूँगा।
जुलाई, 2013 में ज़ी न्यूज़ के साथ मैंने अपने करियर की शुरूआत की थी। आज 11 साल बाद एक अच्छे नोट पर यहाँ से प्रस्थान का निर्णय लिया है। किसी भी संस्था में जब हम 11 साल काम कर लेते हैं, तो वो हमारे घर और परिवार जैसा बन जाता है। मेरे लिए यह मेरा पहला घर बन चुका था।
ज़ी न्यूज़ मेरे सपनों का केन्द्र बना, यहाँ से मैंने बहुत कुछ सीखा। संस्थान ने मुझे अनगिनत और शानदार मौक़े दिए। मुझे एक बेहतरीन रिपोर्टर बनाया। किसी भी रिपोर्टर का एक सपना होता है कि वो ज़ी न्यूज़ जैसे संस्थान में काम करे, जो कि रिपोर्टर आधारित चैनल माना जाता है। यहाँ हर आवाज़ की एक वैल्यू मानी जाती है। Zee News हमेशा मेरे दिल में रहेगा, क्योंकि यह मेरा पहला प्यार है। ज़ी न्यूज़ संस्थान को मुझ पर भरोसा करने के लिए मैं सदैव आभारी रहूँगा।
मैं सबसे पहले ज़ी ग्रुप के संस्थापक श्री सुभाष चंद्रा सर को बेहद धन्यवाद करता हूँ कि जिन्होंने हमें खुलकर पत्रकारिता करने का मौक़ा और मंच दिया। कभी भी और किसी भी मुद्दे पर डॉ चंद्रा सर से बातचीत कर सकते हैं, वो हमेशा संवाद के लिए ओपन रहते हैं। एक अभिभावक की तरह जिनका प्यार और स्नेह मुझे इन 11 सालों के दौरान मिलता रहा। आख़िरी दिन जब मैं उनसे मिलने गया तो उन्होंने अपना आशीर्वाद दिया और बेहतर भविष्य की शुभकामनाएँ दी। मेरे लिए यह बेहद सौभाग्य की बात रही कि मुझे मीडिया मुग़ल डॉ सुभाष चंद्रा सर के नेतृत्व में काम करने का मौक़ा मिला। यह हर पत्रकार का एक सपना होता है। मैं पुनः डॉ सुभाष चंद्रा सर को तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। डॉ सुभाष चंद्रा सर के व्यक्तित्व पर कुछ लाइनें हमें हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी-
“उनका दृढ़ संकल्प देखकर, आलस्य-अंधकार मिटता है
बाधाएँ खुद राह दिखातीं, उन सा कर्मठ जब बढ़ता है”।
HR टीम को बहुत बहुत धन्यवाद, हर कदम पर मेरा साथ दिया है। हर चीज़ का समाधान तुरंत मिला है। एडमिन टीम को भी धन्यवाद, जिनके सपोर्ट के बग़ैर यह यात्रा संभव नहीं होती। लायब्रेरी, फैसिलिटी, कैमरा सेक्शन, आईटी, टेक्निकल, ग्राफ़िक्स, पीसीआर, स्टूडियो टीम को धन्यवाद। 2C, आउटपुट, इनपुट और रिपोर्टिंग टीम को भी बहुत धन्यवाद। सिक्योरिटी टीम और Pant
मेरे सभी साथी-सहयोगी और सीनियर्स को बहुत धन्यवाद, जिन्होंने मेरे 11 साल के इस सफ़र में हर कदम पर मेरा साथ दिया। उन “चुनिंदा” लोगों को तो विशेष धन्यवाद, जिन्होंने कई बार कुछ नयी चुनौती खड़ी कर मुझे और दृढ़ संकल्पित होने की प्रेरणा दी, ताकि मैं अपने पत्रकारिता के लक्ष्यों को लेकर सजग और सतर्क रहूँ। उन “चुनिंदा” लोगों पर किसी ने लिखा है-
“हालात की तब्दीली शायद इसे कहते हैं
जो फूल का दुश्मन था, वो बाग का माली है”।
और उन्हीं चुनिंदा लोगों के लिए अंग्रेज़ी में भी एक कहावत है-
“Some people will never support you,
because they are afraid of what you might become”
इस संस्थान को छोड़ना मेरे लिए एक बहुत भावुक क्षण है। संस्थान से विदा लेना मेरे लिए आसान नहीं है। भारत भाग्य विधाता की टीम में Production Executive के तौर पर अपने करियर की शुरूआत की। आज राष्ट्रीय ब्यूरो में Chief Special Correspondent के पद से विदा ले रहा हूँ, तो मेरे लिए इस दफ़्तर का कोना कोना मानो एक आवाज़ दे रहा है। इस संस्थान के साथ मेरा एक आत्मीय रिश्ता सा बन चुका है।
इस 11 साल के दौरान अगर मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हुई हो, किसी को कोई कष्ट पहुँचा हूँ, उन सभी से मैं माफ़ी माँगता हूँ।
फिर मिलेंगे चलते चलते…..
फ़िलहाल के लिए अलविदा…..
आपका, विशाल


