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सुख-दुख

कुम्भ मेले को लेकर अफ़वाह फैलाने के आरोप में एक सप्ताह जेल काटकर लौटे विवेक पवार ने क्या ग़लत लिखा था?

सुशील मानव-

साथी विवेक पंवार ने जो सवाल कुम्भ मेला की शुरुआत में उठाया था, लगभग उन्हीं सवालों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के सामने उठाया है.

यानी विवेक भाई के सवाल शत प्रतिशत वैज्ञानिक, तार्किक और तथ्यपरक थे। बावजूद इसके उन्हें कुम्भ मेले को लेकर अफ़वाह फैलाने के आरोप में एक सप्ताह (11-17 फरवरी) जेल में काटना पड़ा।

ये Vivek Pawar हैं सच्ची बात कही थी इन्होंने सरकार ने जेल भिजवाया अंधविश्वास और पाखंड के दौर में तार्किक बात करना अपराध हो गया है जिसे इच्छा हो उठाओ और जेल में डालो हद है मजबूत इरादों वाले विवेक भाई को जेलें नहीं तोड़ा करतीं

विवेक की क़ैद की कुछ तस्वीरें और उनकी वॉल के स्क्रीनशॉट्स-

जेल से लौटकर विवेक पवार ने क्या लिखा पढ़ें-

मैं पहली बार जेल गया था साल 2003 में! तब बालाघाट जिले में आदिम जन जाति समूह की बैगा बहनों के साथ हुए दुष्कर्म के मामले को उठाया था। साथ में मेरी मां सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती अनिता पवार और मित्र राकेश शर्मा को भी जेल की हवा खानी पड़ी थी।

दूसरी बार 2008/09 में! कटंगा ग्राम पंचायत (बिछिया मप्र) के सरपंच सचिव के कारनामों से त्रस्त ग्रामीणों और ग्रामसभा के अधिकारों के संघर्ष में संगठन के अन्य 7 साथियों के साथ। तब सत्ता पक्ष ने भ्रष्ट सरपंच सचिव को बचाने में पूरी ताकत लगा दी थी, अन्ततः जीत हमारी हुई थी।

तीसरी बार अभी ! अभी उन ताकतों का हाथ है जो अव्यवस्था पर सवाल खड़े करने और अंधभक्ति के प्रति जागरुक करने के हमारे प्रयास से चिढ़े हुए हैं।

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