सोशल मीडिया पर पासपोर्ट से जुड़ी एक पोस्ट को लेकर विवाद तेज हो गया है। पत्रकार विवेक त्रिपाठी को अधिवक्ता गोरांग गुप्ता के माध्यम से एक कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें फर्जी दस्तावेज प्रकाशित करने, मानहानि करने और निजी जानकारी सार्वजनिक करने के आरोप लगाए गए हैं। नोटिस में 10 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग भी की गई है।
अधिवक्ता गोरांग गुप्ता, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली द्वारा 1 मार्च 2026 को जारी इस लीगल नोटिस में कहा गया है कि उनके मुवक्किल शैलेंद्र शर्मा (न्यूज़ इंडिया चैनल के चेयरमैन) एक सम्मानित नागरिक हैं और उनकी सामाजिक एवं पेशेवर छवि बेदाग रही है। आरोप है कि विवेक के. त्रिपाठी ने अपने सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट साझा की, जिसमें शैलेंद्र शर्मा के कथित पासपोर्ट की तस्वीरें लगाकर आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की गईं।
नोटिस में दावा किया गया है कि साझा किया गया पासपोर्ट दस्तावेज मनगढ़ंत, मॉर्फ्ड, एडिटेड और छेड़छाड़ कर तैयार किया गया है। इसे जानबूझकर जनता को गुमराह करने और मुवक्किल की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया। नोटिस में इसे दुर्भावनापूर्ण कृत्य बताया गया है।
वकील ने यह भी आरोप लगाया है कि पासपोर्ट की छवि का प्रकाशन निजी और संवेदनशील जानकारी का अनधिकृत खुलासा है, जो गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन है। नोटिस के अनुसार, बिना वैधानिक अधिकार या सहमति के किसी व्यक्ति के पासपोर्ट दस्तावेज को सार्वजनिक करना कानूनन दंडनीय है।
कानूनी नोटिस में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 356 के तहत मानहानि, पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12 के तहत दुरुपयोग और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धाराओं 66C तथा 72 के तहत पहचान चोरी और गोपनीयता भंग जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि इन धाराओं के अंतर्गत आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है।
नोटिस में 24 घंटे के भीतर संबंधित पोस्ट, तस्वीरें, कैप्शन और उससे जुड़े सभी कंटेंट को हटाने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में सामग्री नहीं हटाई गई तो पुलिस और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, विवेक के. त्रिपाठी से यह भी मांग की गई है कि वे लिखित रूप में यह बताएं कि कथित पासपोर्ट दस्तावेज उन्हें कहां से और किस माध्यम से प्राप्त हुआ। नोटिस में समान प्रमुखता के साथ सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने की भी शर्त रखी गई है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि कथित मानहानि से हुई क्षति के मद्देनजर 10 करोड़ रुपये का दीवानी दावा दायर किया जाएगा। समय सीमा में अनुपालन न होने की स्थिति में स्थायी निषेधाज्ञा, हर्जाना और अन्य कानूनी उपचारों के लिए सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने की चेतावनी दी गई है।


