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सियासत

सुप्रीम कोर्ट v/s चुनाव आयोग : क्या अब भी आपको लगता है चुनावों में धांधली नहीं हुई?

प्रशांत टंडन-

पिछले 24 घंटों में भारत के चुनाव आयोग ने क्या किया है.

  • राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी आरोपों का कोई जवाब नहीं दिया सिर्फ उनकी सोशल मीडिया पोस्ट पर ‘misleading’ का ठप्पा लगाया.
  • बिहार में SIR में हटाए गए नामों की सूची पॉलिटिकल पार्टियों की दी लेकिन उससे वोटर आईडी और मकान नं और पता हटा दिया.
  • बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची को वेबसाइट से हटा दिया और इसे ऐसे फॉर्मेट में दिया जिसकी मशीन रीडिंग न हो सके.
  • अब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो नियमों से नहीं बंधा है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर कारण भी बताए. आयोग ने ये भी कहा है वो मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की लिस्ट भी जारी नहीं करेगा.

कहने का मतलब है कि जो करेंगे अपनी मर्जी से करेंगे.


रवीश कुमार-

जब से राहुल गांधी ने पर्दाफाश किया है तब से एक तर्क चल रहा है कि SIR होना चाहिए। SIR तो हो ही रहा है। चंद्रबाबू नायडू ने आयोग को लिख कर दिया है कि जहाँ चुनाव हो रहा है वहां छह महीना पहले SIR न हो, साल दो साल का समय लगे और ठीक से हो।

बिहार की यह ख़बर यही कह रही है कि आयोग जल्दबाज़ी में SIR करने योग्य नहीं है। कम समय में करने से इतनी धांधली मिल रही है। SIR का काम था धांधली ख़त्म करना लेकिन ख़ुद में धांधली हो गया है।

अगर SIR का मतलब यह ठीक करना है कि एक मकान में ढाई सौ वोटर कैसे रह सकते हैं लेकिन यहाँ तो SIR के बाद ये सब निकल रहा है।

चुनाव आयोग को कहना चाहिए कि हम आयोग नहीं रंगदार हैं। हम कुछ नहीं देंगे क्योंकि हम बंदा गला का सूट पहनकर दफ़्तर आते हैं। ख़त्म करो एक बार में ही सब।


अजीत अंजुम-

देर से ही सही अखबार में अब ये खबर छपने तो लगी. मुजफ्फरपुर और जमुई के इन दोनों घरों के बारे में मैं कई दिनों से लिख रहा हूं.


प्रभाकर कुमार मिश्रा-

नाउ, ऑल आइज ऑन सुप्रीम कोर्ट! सुप्रीम कोर्ट के लिए परीक्षा की घड़ी है!

याचिका कर्ताओं ने कहा था 65 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। नहीं बताया गया कि किसका काटा गया और क्यों काटा गया! सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि हमें बताइए किसका काटा और क्यों काटा? चुनाव आयोग ने कह दिया, कोई कानून नहीं कि जो हमें ये सब बताने के लिए बाध्य करता हो! हम नहीं बताएंगे!

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने जवाब में चुनाव आयोग ने बोला है कि बिहार में मतदाता सूची से बाहर किए गए 65 लाख लोगों की न तो सूची शेयर करेगा और न ही यह बताने के लिए बाध्य है कि उनका नाम किस वजह से लिस्ट से हटाया गया है।


कुणाल शुक्ला-

11/07/25 को दैनिक भास्कर में छपी यह खबर राहुल गांधी के खुलासे के 27 दिन पहले की है। क्या आप अब भी मानते हैं कि चुनावों में धांधली नहीं हुई है और चुनाव आयोग पाक साफ़ है?


अभिषेक-

चोर की दाढ़ी में तिनका???

चुनाव आयोग ने पत्रकारों और आम जनता को बिहार SIR Draft 2025 की जांच-परख करने और उसमें गलतियों को ढूंढने से रोकने के लिए Voters’ Services Portal से ओरिजिनल PDF फाइल्स को हटाकर, उसका स्कैन कॉपी अपलोड कर दिया.

आसान भाषा में समझिए इससे क्या फर्क पड़ता है?

ओरिजिनल PDF फाइल में टेक्स्ट बेस्ड कॉन्टेंट उपलब्ध था, जिसमें मौजूद जानकारी को आपके कंप्यूटर में Ctrl+F शॉर्टकट या मोबाइल के PDF Reader एप्लिकेशन में सर्च फंक्शन का इस्तेमाल कर जानकारी को सर्च किया जा सकता था. इस PDF फाइल से टूल्स के जरिए समूचा डाटा एक्सट्रेक्ट किया जा सकता है, जिससे पूरे डाटा पर रिसर्च किया जा सकता है, उसमें गलतियां ढूंढी जा सकती है.

लेकिन इसके उलट, स्कैन कॉपी वाले PDF फाइल में कॉन्टेंट तस्वीर के रूप में उपलब्ध है, जिससे उसमें किसी प्रकार का सर्च नहीं किया जा सकता है. इसमें आपके कंप्यूटर का Ctrl+F शॉर्टकट या मोबाइल के PDF Reader एप्लीकेशन का सर्च फंक्शन काम नहीं करता और इस प्रकार ना तो इससे सटीक डाटा इकट्ठे एक्सट्रेक्ट किया जा सकता है, ना ही समूचे डाटा का विश्लेषण, जिससे इसमें गलतियां ढूंढना मुश्किल हो जाता है.

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