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मैं अख़बार का संपादक होता तो फ्रंट पेज पर इन दोनों तस्वीरों को ज़रूर लगाता

प्रशांत टंडन-

मैं अखबार का संपादक होता तो फ्रंट पेज पर इन दोनों तस्वीरों को ज़रूर लगता. कोई भी संपादक लगाता.

लेकिन आजकल संपादकों का भी एक संपादक है हीरेन जोशी.

मैं चीफ सब–एडिटर भी रहा हूं 90 के दशक में. हर चीफ़ सब यादगार फ्रंट पेज बनाने की ख्वाहिश रखता है. कल एक अच्छा मौका था – अधिकांश ने गंवा दिया.

सिर्फ नौकरी कर रहे हैं – अपने काम के प्रति passion नहीं है.


डॉ राकेश पाठक-

सही कहा आपने। हम भी कई अखबारों में संपादक रहे हैं। ऐसे मौके संपादक के लिए अपना संपादकीय कौशल दिखाने का अवसर होते हैं।

हमें पहला पेज सजाने का जुनून था। नब्बे के दशक में जब पेस्टिंग से पेज लगाए जाते थे तब हाथ में कैंची लेकर खुद खड़े होते थे। बाद में भी DTP रूम में बैठ कर पेज लगवाए।

प्रसंगवश : एक बार बड़ी जबर चुनौती सामने आ गई।

हम जबलपुर नईदुनिया की लॉन्चिंग के इंचार्ज थे। हम तब ग्वालियर में संपादक थे। जिस दिन अख़बार के उद्घाटन हुआ उसी शाम भारत ने T20 विश्वकप जीता था।

राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि थे, शिवराज और रमन सिंह विशिष्ट अतिथि। अब समस्या ये कि अपने अख़बार की लॉन्चिंग और विश्व कप की जीत को पहले पेज पर कैसे सजाएं कि किसी ख़बर के साथ अन्याय न हो।

राजीव मित्तल (अब स्मृति शेष) स्थानीय संपादक थे। उद्घाटन के दिन का सब तामझाम और पहले दिन का अख़बार हमारे जिम्मे था। राजीव ने कहा कॉमरेड अब आप ही बताओ कैसे क्या किया जाए!

हम ख़ुद जुटे और दोनों ख़बरों को पहले पेज पर बराबर स्थान में सजाया। उद्घाटन समारोह की तमाम फोटो को अंदर दो पेज में फोटो फीचर में लगाया। उस दिन के ले आउट को खूब सराहा गया।

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