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उत्तर प्रदेश

वोट देने का हक़ छीन रही संवाददाता समिति!

नवेद शिकोह-

प्रसार भारती के आकाशवाणी और दूरदर्शन के न्यूज सेक्शन के मान्यता प्राप्त पत्रकार उ.प्र. राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के चुनाव में वोट नहीं दे सकेंगे। इनका वोटिंग का अधिकार छीन लिया गया है। ऐसा अन्याय क्यों? चुनाव संचालन समिति के नये फरमान के मुताबिक इन पत्रकारों को 31 अगस्त को होने वाले चुनाव में वोट देने का अधिकार क्यों नहीं मिलेगा?

इस गंभीर सवाल का जवाब बहुत बचकाना और हास्यास्पद है। जवाब ये है कि ये पत्रकार सरकारी कोष से वेतन पाते हैं इसलिए इन्हें वोट देने का अधिकार अब नहीं दिया जाएगा।

यदि इसी तर्क से प्रसार भारती से संबद्ध पत्रकारों को संवाददाता समिति के चुनाव में वोट देने से वंचित रखा गया है तो एक तर्क ये भी है कि सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को पूरा नहीं आधा वोट देने का ही अधिकार मिले। क्योंकि समस्त पत्रकारों को मिलने वाले वेतन या आय में सरकारी राशि का आधा योगदान तो रहता ही है। मसलन बड़े अखबारों से लेकर मझोले अखबार और छोटे-बड़े न्यूज चैनल्स की आय सरकारी विज्ञापनों के सहयोग पर निर्भर होती है। और मीडिया समूहों को मिलने वाली सरकारी राशि से ही पत्रकारों को वेतन मिलता है।

पीटीआई, एएनआई और यूएनआई जैसी न्यूज एजेंसियां भी भारत सरकार से संबद्ध है।

कई दर्जन मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार केंद्र सरकार के आकाशवाणी और दूरदर्शन में न्यूज से संबंधित कार्यक्रमों में अनुबंध पर काम करते हैं और उनकी आंशिक आय यहीं पर निर्भर है।

तो क्यों इन सैकड़ों पत्रकारों से भी वोट देने का अधिकार छीन लिया जाना चाहिए ! या इन्हें पूरा नहीं आधा वोट देने का ही अधिकार दिया जाना चाहिए, क्योंकि दूरदर्शन/आकाशवाणी के न्यूज पैनल में शामिल स्वतन्त्र पत्रकार अनुबंध पर न्यूज संबंधित कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। और बतौर स्वतंत्र पत्रकार इनकी लगभग आधी आय शासकीय कोष से प्राप्त होती है।

प्रसार भारती के राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों ने उ प्र राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति की चुनाव संचालन कमेटी के तुगलकी फरमान का जम कर विरोध किया है। इस तानाशाही फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें पूर्व की भांति वोट देने का अधिकार दिया जाए। पूर्व में इन्हें वोट देने का अधिकार था।

आखिर अब ऐसा क्या हो गया या उनकी स्थिति में क्या परिवर्तन हो गया है कि इन्हें वोट का अधिकार नहीं दिया जा रहा है।

लेखक कार्यकारिणी सदस्य प्रत्याशी हैं।

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