यशवंत सिंह-
आज नोएडा कोर्ट से मेरा एक केस खत्म हुआ। हाईकोर्ट में आपसी सहमति से केस खत्म करने का अनुरोध डाला गया था जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया और उसके आदेश को आज नोएडा के लोअर कोर्ट में सबमिट कर दिया गया। इलाहाबाद में एडवोकेट Ramesh Kumar जी ने मेहनत की, नोएडा में एडवोकेट Bhupendra Mangal भाई ने।
ये मुक़दमा Sakshi Joshi जी से जुड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने उदारता दिखाते हुए प्रकरण ख़त्म करने के अनुरोध को स्वीकार किया था। पहली तस्वीर में हमारे नोएडा कोर्ट के वकील भाई भूपेंद्र मंगल जी हैं।


दूसरी तस्वीर में हमारे इलाक़े के डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी जी हैं। कचहरी से निपटने के बाद थोड़ी दूर स्थित डीसीपी ऑफिस पैदल ही चला गया। डीसीपी के सामने कई लोग अपनी समस्या लेकर आए हुए थे। जन सुनवाई चल रही थी। ज्यादातर का मामला पैसे और जमीन के फ्रॉड से जुड़ा हुआ था। सिविल नेचर के कई केस थे। युवा अफसर द्वारा पूरी तल्लीनता से लोगों की समस्याओं को सुनते हुए देखना अच्छा लगा। डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी जी लखनऊ के निवासी हैं। आईपीएस ट्रेनिंग के बाद मुरादाबाद गए। फिर आजमगढ़ में एएसपी के रूप में तैनाती हुई। नोएडा में बतौर डीसीपी तीसरी पोस्टिंग है। ढाई साल से जमे हैं।
सबके जाने के बाद ग्रीन टी के साथ पुलिसिंग से लेकर राजनीति, पत्रकारिता सब पर चर्चा शुरू हुई। अपराध के नए ट्रेंड के बारे में अवस्थी जी की समझ काफ़ी गहरी है। नोएडा की सोसायटीज में ए ओ ए की राजनीति और व्हाट्सएप पर झगड़ों को लेकर बात हुई। कई मजेदार वाक़ये बताए उन्होंने कि ह्वाट्सऐप ग्रुपों में किस किस तरह के छोटे छोटे मुद्दों – शब्दों को लेकर लोग शिकायत करने थाने आ जाते हैं और पुलिस की काफ़ी एनर्जी इसी पंचायत में चली जाती है। उनकी बात से समझ आया कि सोसाइटीज के ह्वाट्सऐप ग्रुप में बहुत एक्सट्रीम भावुकता या किसी नशे के प्रभाव में आकर नहीं लिखना लड़ना चाहिए। ज़्यादा अच्छा है मिल बैठकर बात कर लें जिससे मनभेद मतभेद न हो।

डीसीपी ऑफिस से बाहर निकला तो नोएडा के कई टीवी पत्रकार साथी मिल गए। एक सेल्फी उनके साथ हुई।
फिर Kanhaiya Shukla भाई को जन्मदिन की बधाई देने उनके फ्लैट पहुँचा।
इस तरह एक दिन व्यय हुआ।
भड़ास फाउंडर यशवंत की एफबी वॉल से.


