ऑपरेशन सिंदूर के बाद जासूसी के आरोप में देश में बड़ी गिरफ्तारियां हुईं। सबसे चर्चित केस रहा यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा और जसबीर सिंह का। दोनों आरोपियों को हरियाणा पुलिस और पंजाब पुलिस दो-दो बार रिमांड में लेकर पूछताछ कर चुकी है। इनके फोन, लैपटॉप और बैंक डिटेल्स की फॉरेंसिक जांच भी कर चुकी है। इन दोनों जांच की काफी हद तक रिपोर्ट भी आ चुकी है। उन रिपोर्ट को लेकर कोर्ट में क्या-क्या पुलिस की तरफ से जानकारी दी गई। ये केस कितने मजबूत हैं। इन्हें कितनी सजा हो सकती है। अभी तक इन दोनों को लेकर गिरफ्तारी और सबूतों को लेकर क्या स्थिति है। जिसमें जासूसी के मामलों में कोर्ट में सजा दी गई।
सबसे पहले बात ज्योति मल्होत्रा की। हिसार कोर्ट में पुलिस की तरफ से दो बार रिमांड के लिए दाखिल किए गए आवेदन की पड़ताल की। ये जाना कि आखिरी हिसार पुलिस ने इस केस को लेकर अब तक कोर्ट में क्या-क्या जानकारी दी है।
दी गई जानकारी से पता चला कि ज्योति मल्होत्रा का जन्म 1 अगस्त 1991 को हुआ। उसने बीकॉम, एमकॉम और बीएड की पढ़ाई की है। उसके इस समय प्रति महीने की इनकम करीब 1 लाख रुपये है। ये पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है। पुलिस ने ज्योति मल्होत्रा के बयान के आधार पर ही 16 मई को पहले FIR दर्ज की। फिर उसे गिरफ्तार कर लिया था। 17 मई को उसे कोर्ट में पेश किया था। शुरुआत में ज्योति के पास कोई वकील भी नहीं था। फिर उसे सरकारी वकील दिया गया। इसके बाद हिसार के एडवोकेट कुमार मुकेश ने ज्योति मल्होत्रा का केस अपने हाथ में लिया।
ज्योति मल्होत्रा को जब 17 मई को कोर्ट में पहली बार पेश किया गया। उस समय पुलिस ने रिमांड पर लेने का आवेदन किया था। उसमें दावा किया गया था… दिल्ली और अटारी बॉर्डर से मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद करने हैं। इसके साथ हरकिरत सिंह का पता लगाना है। आरोपी से सीक्रेट डिटेल का पता लगाने के लिए गहराई से पूछताछ करनी है।
इसी आधार पर पुलिस ने ज्योति रानी उर्फ ज्योति मल्होत्रा का 7 दिनों का रिमांड मांगा था. लेकिन पुलिस को 5 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मिली थी। रिमांड की डेट थी 17 मई से 22 मई तक।
18 मई को आरोपी ज्योति से पूछताछ की गई। संदिग्ध हरकिरत से भी पूछताछ की गई। पूछताछ में हरकिरत ने अपने दो मोबाइल फोन को पेश किया। जांच के लिए उसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया। 19 मई को ज्योति से गहन पूछताछ की गई। ज्योति से पूछताछ पर पुलिस ने एक लैपटॉप, 3 मोबाइल फोन और कुछ कागजात बरामद कराए।
इन सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच के लिए साइबर फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया। इसमें से सेंसेटिव डेटा का निकालने के लिए लैब की मदद ली जा रही है। 20 और 21 मई को भी पुलिस ने आरोपी ज्योति से गहनता से पूछताछ की।
22 मई को फिर से ज्योति को कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने फिर से 7 दिनों की रिमांड पर लेने की अपील की। पुलिस को 4 दिन की रिमांड मिली। यानी 22 मई से 26 मई तक।
दूसरी बार रिमांड पर आई ज्योति मल्होत्रा से बैंक खातों और देश-विदेश यात्राओं की डिटेल ली गई। 22 मई से 26 मई तक मिले पुलिस रिमांड को लेकर कई तर्क दिए गए थे। पहला ये कि आरोपी ज्योति से देश विदेश की यात्रा के बारे में पूछताछ करनी है। ये अभी बाकी है।
आरोपी ज्योति के बैंक के खातों में हुई डेबिट और क्रेडिट ट्रांजैक्शन वाले व्यक्तियों के बारे में पूछताछ की जानी है। यानी ज्योति के बैंक खातों से जिन संदिग्धों से लेनदेन हुए हैं उनके बारे में डिटेल में पूछताछ करनी है। ये जानकारी सिर्फ आरोपी ज्योति ही बता सकती है।
जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। उन डिवाइस के डेटा का विश्लेषण भी आरोपी की मौजूदगी में किया जाना है। आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट के रिकॉर्ड की बारीकी से विश्लेषण किया जाना है। वो बांग्लादेश और चीन सहित कई देशों की यात्रा भी कर चुकी है। इन यात्राओं के बारे में भी गहराई से पूछताछ की जानी है।
सबसे खास बात ये है कि आरोपी युवती पर देशद्रोह का केस है। जिससे जुड़ी जानकारी को यहां ज्यादा लिखा जाना उचित नहीं है। इसलिए 7 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की जरूरत है। हालांकि, पुलिस को 4 दिनों की रिमांड मिली।
22 मई से 24 मई तक ज्योति से पुलिस ने पूछताछ की गई। 25 मई को एक मोबाइल फोन और अन्य कुछ कागजात बरामद कराए गए। 25 मई को ही फॉरेंसिक लैब CFL पंचकुला से कुछ जांच के नतीजे मिले। जिसका विश्लेषण किया जा रहा है।
26 मई को सीएफएल पंचकुला से बाकी रिजल्ट मिल गए। जिसका विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस ने आखिरी में कोर्ट में कहा था कि मामला देशद्रोह से जुड़ा है। इसलिए ज्यादा डिटेल लिख नहीं सकते। अब पूछताछ हो चुकी है। आरोपी ज्योति मल्होत्रा को 14 दिन की ज्यूडिशियल रिमांड में भेजने की मंजूरी दी जाए। इसके बाद कोर्ट ने ज्योति मल्होत्रा को ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल भेज दिया था।
एडवोकेट कुमार मुकेश ज्योति मल्होत्रा से दो बार मिले थे। इस दौरान ज्योति मल्होत्रा ने गिरफ्तारी से पहले और उसके बाद की बातों को लेकर अपने वकील से क्या कहा?
15 मई को ही पुलिस ने ज्योति को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन शाम को छोड़ दिया था। जैसा ज्योति के परिवार ने हमें बताया था। इसके बाद अगली सुबह 16 मई को पुलिस ने फिर से ज्योति को थाने के लिए कहा था। इसके बाद ज्योति खुद ही स्कूटी से पुलिस के पास पहुंची थी। इस स्कूटी को कुछ महीने पहले ही ज्योति ने खरीदा था। थाने में वो खुद स्कूटी से पहुंची थी। वहां कुछ घंटे बाद पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया था।
पुलिस ने ये गिरफ्तारी भी उसी के बयान पर किया था। उसी बयान के आधार पर FIR भी लिखा था। जिसमें ये भी लिखा है कि ज्योति ने बताया कि मैंने पाकिस्तान के लिए जासूसी की है। मतलब पुलिस के पास खुद से कोई सूचना नहीं थी।
इसका मतलब वो FIR ही एक तरह से असंवैधानिक हो जाता है। क्योंकि संविधान के आर्टिकल-20 हमारे अधिकारों से जुड़ा है। ये सेल्फ इंक्रिमिनेटिंग यानी आत्म दोषारोपण कराने वाला मामला है। यानी पुलिस ने ज्योति का बयान लेकर ही उसी के खिलाफ उसका इस्तेमाल किया। लेकिन कानून के तहत पुलिस आपको ही आपके खिलाफ सबूत नहीं बना सकती है। या आपको गवाह नहीं बना सकती है।
आगे एडवोकेट कुमार मुकेश कहते हैं कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा-25 और 23ए के तहत पुलिस कस्टडी में दिया गया बयान कोर्ट में मान्य नहीं है। इसलिए ये एफआईआर का लिखा जाना ही गलत है। पिछले दिनों ज्योति की जमानत पर हुई बहस के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या साक्ष्य मिले हैं। इस पर पुलिस ने कहा है कि अभी एनालिसिस चल रही है। 3 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप पुलिस के कब्जे में है। लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला।
ज्योति इस वजह से पाकिस्तान जाने की तैयारी में थी, वकील ने उसी से बात कर दी जानकारी कि आखिर ज्योति पाकिस्तान जाना ही क्यों चाहती थी। घूमने के लिए तमाम देश हैं। दूसरे देशों में भी गई। लेकिन पाकिस्तान जाने का खास कारण क्या था। क्या इस बारे में ज्योति और उसके परिवार ने क्या बताया है। इस पर एडवोकेट कुमार मुकेश ने बताया …
ज्योति ने हमें इस बारे में पूरी जानकारी दी है। कोरोना के पहले वो नौकरी करती थी। नौकरी छूट जाने के बाद वो ट्रैवल व्लॉगर बन गई। वो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं गई। कई बाहर के देशों में जा चुकी है। पाकिस्तान जाने की एक बड़ी वजह और है। जिसे ज्योति ने बताया है। असल में भारत पाकिस्तान बंटवारे के समय पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से कई परिवार अलग-अलग हो गए थे। काफी लोग पाकिस्तान गए। और काफी संख्या में लोग पाकिस्तान से इंडिया भी आए। ज्योति के दादा-दादी भी पाकिस्तान से इंडिया आए थे। इसलिए ज्योति हमेशा चाहती थी कि मेरे दादा-दादी पाकिस्तान में कहां रहते थे। अपने पैतृक घर को देखना चाहती थी। इसलिए उसने करतारपुर साहिब जाने के लिए धार्मिक वीजा के लिए पहले आवेदन किया था।
आखिर ज्योति पाकिस्तानी दानिश से कैसे मिली। ये हरकीरत की क्या भूमिका है। इस पर एडवोकेट कुमार मुकेश ने बताया कि…
13 मई 2025 से पहले दानिश से मिलना ऑफिशियल था। क्योंकि उसकी दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन में पोस्टिंग थी। दानिश से मिलने की वजह वीजा है। उसे वीजा मिलने में दिक्कत हुई। इसलिए ज्योति पहले हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पहुंची। हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में एक हरकीरत सिंह हैं। उनसे ज्योति की मुलाकात हुई। हरकीरत ने वीजा के लिए दानिश के बारे में जानकारी दी। क्योंकि पाकिस्तान जाने के लिए वीजा के सभी मैटर वही देखते थे। इसलिए हरकीरत के कहने पर ज्योति ने दानिश से संपर्क किया। इसके अलावा कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था। इसीलिए पुलिस ने हरकीरत से भी पूछताछ की है। उससे 2 मोबाइल फोन रिकवर किए हैं। उसकी जांच की जा रही थी।
ज्योति का इनकम सोर्स क्या है। आखिर पुलिस ने कैसे लिखा है कि वो हर महीने 1 लाख रुपए कमाती है?
इस पर एडवोकेट कुमार मुकेश कहते हैं कि पुलिस की कस्टडी में जो होता है उससे कोई जांच अधिकारी कुछ भी लिखवा सकता है। कुछ भी बयान लिया जा सकता है। इसलिए कोर्ट उस बयान को सच नहीं मानती है। ये सही है कि पुलिस ने अपने रिकॉर्ड में लिखा है कि ज्योति की इनकम प्रति माह 1 लाख रुपए है। वो सोशल मीडिया भी चलाती रही है। असल में ज्योति को यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया से भी इनकम होती है। लेकिन साथ में स्पॉन्सरशिप से भी पैसे मिलते हैं। ये सबकुछ मिलाकर इनकम होती है।
कई मीडिया में आया था कि ज्योति पाकिस्तान में शादी करने वाली थी। इस पर खुद ज्योति ने क्या बोला है?
इस पर एडवोकेट कुमार मुकेश ने बताया कि हां ये बात सही है कि कई मीडिया में चल रहा था कि वो पाकिस्तान में शादी करने वाली थी। या फिर शादी कर चुकी थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। ज्योति ने खुद इस बात को गलत करार दिया है। इससे पहले हिसार पुलिस ने भी इस बात की संभावना से साफतौर पर इनकार कर दिया था।
एडवोकेट कुमार मुकेश ने बताया कि ज्योति पर सबसे पहले बीएनएस की धारा 152 है। इसमें अधिकतम उम्रकैद और न्यूनतम 7 साल की सजा है। दूसरी धारा है ऑफिस सीक्रेट एक्ट की 3 और 5 है। इसमें 3 से 7 साल तक की सजा है।
जहां तक अभी के हालात को लेकर ज्योति से पूछा था। तब ज्योति ने कहा कि… मैंने कुछ गलत नहीं किया है। मुझे यकीन है कि मेरे साथ भी गलत नहीं होगा। जो मीडिया में चल रहा है। उससे बहुत दुखी हूं। मुझे जासूस घोषित कर दिया गया है। लेकिन अभी मामला कोर्ट में है। लेकिन मीडिया में जासूस कहे जाने से काफी परेशान है। लेकिन कोर्ट से पूरी उम्मीद है। न्याय जरूर मिलेगा।
ज्योति मल्होत्रा को लेकर हमने एसपी हिसार से कई बार संपर्क किया। लेकिन कोई बात नहीं हो पाई। इसके बाद हमने जांच से जुड़े कुछ अधिकारियों से बात की। नाम न बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि ज्योति मल्होत्रा के मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक खातों में ट्रांजैक्शन को लेकर कुछ अहम सबूत मिले हैं। जिसे लेकर हम चार्जशीट तैयार कर रहे हैं। चार्जशीट में ही वो सबूत पेश किए जाएंगे।
“ज्योति की गिरफ्तारी और दानिश के साथ फोटो वायरल होते ही जसबीर सिंह की शुरू हो गई थी जांच, हिसार पुलिस से समन आते ही किया गया गिरफ्तार” – एडवोकेट
अब बात पंजाब में गिरफ्तार हुए जसबीर सिंह की। जसबीर सिंह को पंजाब पुलिस ने 4 जून को अरेस्ट किया था। 3 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी। जसबीर सिंह ने इस बारे में अपने एडवोकेट माधव शुक्ला से बात की। एडवोकेट माधव शुक्ला से गिरफ्तारी से पहले के बारे में जानकारी मांगी।
इस पर एडवोकेट कहते हैं… इसकी शुरुआत होती है ज्योति मल्होत्रा की अरेस्टिंग से। उस दौरान पाकिस्तान हाई कमीशन में हुई पार्टी के फोटो और वीडियो वायरल हुए थे। उस कार्यक्रम में जसबीर सिंह भी था। ज्योति के साथ फोटो भी सोशल मीडिया पर आए। तभी से इस पर पुलिस की भी नजर पड़ गई।
पंजाब के रोपड़ की पुलिस ने शुरुआती जांच 17 मई से ही शुरू कर दी थी। 17 मई को इससे पूछताछ शुरू हुई। इसे करीब-करीब रोजाना थाने बुलाया गया। फिर उसी दौरान जसबीर सिंह से उसके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट मांगे गए। जिसमें फोन और लैपटॉप लिए गए थे। जसबीर ने तुरंत दोनों सामान पुलिस को जांच के लिए सौंप दिया था। एडवोकेट का दावा है कि 21-22 मई को जसबीर सिंह को फिर से थाने बुलाया गया। उससे सभी बैंक की डिटेल्स मांगी गई। जिससे फाइनैंसल ट्रांजैक्शन की जांच की जा सके। इसकी भी जांच शुरू हो गई थी। पुलिस ने उस समय रूटीन में जांच शुरू की थी।
इसी बीच जसबीर ने खुद ही पंजाब पुलिस को बताया कि हिसार में पूछताछ के लिए एक समन मिला है। उसे 6 जून को बुलाया गया है। इसलिए 6 जून को वो थाने नहीं आ सकेगा। इस बारे में जसबीर सिंह ने 3-4 दिन पहले ही पंजाब पुलिस को सूचना दे दी थी। क्योंकि रोज-रोज जसबीर को थाने भी जाना होता था। इसके बाद अचानक पंजाब पुलिस ने उसे 3 जून को ही अरेस्ट कर लिया। इसके बाद 4 जून को कोर्ट में पेश किया गया था।
रिमांड पर जसबीर के पास से क्या क्या मिला। क्या आरोप है। इस पर पुलिस ने FIR में लिखा है कि…जसबीर सिंह के आईएसआई (ISI) से लिंक हैं। इसकी जांच करना जरूरी है। इसके अन्य साथी भी जासूसी में शामिल हैं। उसने भारतीय सेना की मूवमेंट के बारे में आईएसआई को सूचनाएं दी हैं।
जसबीर सिंह की गिरफ्तारी के बाद उसे 3 दिनों के लिए पुलिस रिमांड में भेजा गया था। उस दौरान कोर्ट में कहा गया था कि जसबीर सिंह देश की सूचनाएं पाकिस्तान को भेजे हैं। इसलिए उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच कराना जरूरी है। ये कब्जे में लेकर जांच कराई गई।
कोर्ट में ये पुलिस की तरफ से ये भी कहा गया कि जसबीर सिंह की एक महिला दोस्त के साथ रिलेशन है। उस महिला को भी दानिश के साथ बुलाया गया था।
हालांकि, ये महिला कौन है। इसे लेकर एडवोकेट ने बताया कि जसबीर सिंह को भी नहीं जानकारी। क्योंकि वो किसी पाकिस्तानी महिला को नहीं जानते। एडवोकेट का कहना है कि वो महिला कोई भारतीय हो सकती है। लेकिन इस बारे में भी अभी पुलिस ने कोई जानकारी नहीं दी है।
जासूसी के मिलते जुलते अन्य मामले भी पढ़ें…
ज्योति मल्होत्रा और जसबीर सिंह जैसा ही केस साल 2010 में हुआ था। वो केस था माधुरी गुप्ता का। उस केस में भी माधुरी दो पाकिस्तानी खुफिया एजेंट के संपर्क में थी। करीब 8 साल बाद मई 2018 में दिल्ली कोर्ट ने 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसे ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धारा 3 और 5 के तहत दोषी माना गया था।
हालांकि, माधुरी गुप्ता ने सभी आोपों से लगातार नकारती रही। इस केस में सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। हाईकोर्ट में फैसला पेंडिंग था। उसी समय अक्तूबर 2021 में माधुरी गुप्ता की मौत हो गई। उस समय माधुरी गुप्ता की उम्र करीब 64 साल थी।
माधुरी गुप्ता इस्लामाबाद स्थित इंडिया हाई कमीशन के प्रेस एंड इन्फॉर्मेशन में सेकेंड सेक्रेटरी के पोस्ट पर थी। आरोप था कि माधुरी ने सीधे और ईमेल के जरिए सेंसेटिव सूचना पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को भेजी थी। माधुरी गुप्ता की दो पाकिस्तानी ISI एजेंट मुबस्सर रजा राणा और जमशेद से मुलाकात हुई थी। ये मुलाकात पाकिस्तानी अखबार जंग के पत्रकार जावेद राशिद ने कराई थी। 22 अप्रैल 2010 को इस बारे में विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने दिल्ली स्पेशल सेल को दी थी। पुलिस ने जांच शुरू की। आरोपी माधुरी गुप्ता से उसके ईमेल का पासवर्ड मांगा। वो पासवर्ड था 20021957। इसे डालते ही माधुरी गुप्ता का ईमेल atlastrao @gmail. com ओपन हो गया। ईमेल के इनबॉक्स के 19 ईमेल और 54 सेंट बॉक्स में मिले थे।
पाकिस्तानी एजेंट सुल्ताना राव के नाम से ईमेल इस्तेमाल करता था। जिसकी आईडी थी sultanarao @gmail. com। जांच में पुलिस को माधुरी गुप्ता के घर से मिले कंप्यूटर से भी खुफिया सूचनाएं भेजने की जानकारी मिली थी। ये भी पता चला था कि माधुरी 5 अलग-अलग ईमेल आईडी का इस्तेमाल करती थी। जम्मू कश्मीर के प्रस्तावित हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के बारे में भी मार्च 2010 में जानकारी मांगी थी। माधुरी अपना नाम बदलकर डियर सुल्ताना लिखकर सभी ईमेल भेजती थी। जिससे किसी को शक ना हो। इन ईमेल में The India Mind Set, New Kashmir Policy, Indian PM visit to Kashmir जैसे विषयों पर डिटेल भेजी गई थी।
18 मई 2018 को न्यू दिल्ली डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने माधुरी गुप्ता को ऑफिस सीक्रेट एक्ट के सेक्शन 3(1)c के पार्ट-1 और सेक्शन-5 के साथ आईपीसी की धारा-120(बी) यानी साजिश रचने की धाराओं में दोषी माना था। इसके लिए 3 साल की सजा सुनाई गई थी।
भारतीय सेना के जासूस को मिल चुकी है 5 साल की सजा
पिछले साल अगस्त 2024 में लखनऊ NIA कोर्ट ने पाकिस्तान से जुड़े जासूसी के मामले पूर्व सैनिक सौरव शर्मा को अधिकतम 5 साल की सजा और जुर्माना लगाया था। ये सौरव शर्मा यूपी के हापुड़ का रहने वाला है। ये पहले इंडियन आर्मी में सिग्नलमैन था। उसी समय ISI के संपर्क में आ गया। उसने फर्जी नाम नेहा शर्मा के जरिए कई सीक्रेट जानकारी लीक की थी। सौरव शर्मा को जनवरी 2021 में गिरफ्तार किया गया था। इसके साथ अनस याकूब नाम का शख्स भी अरेस्ट हुआ था।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्टर सुनील मौर्या की खबर पर आधारित
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