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स्टार ने ZEE को मारा 94 करोड़ डॉलर का डंक, ज़ी बोला- चंदा जुटाया छँटनी की अब हिम्मत शेष नहीं है!

स्टार इंडिया ने आईसीसी टीवी प्रसारण अधिकार करार खत्म करने के एवज में ज़ी एंटरटेनमेंट के खिलाफ मामला दर्ज कराया है, साथ ही 94 करोड़ डॉलर के हर्जाने का दावा किया है.

ZEE की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में यह सामने आया है. जी एंटरटेनमेंट की तरफ से कहा गया है कि, स्टार इंडिया (अब डिज्नी स्टार) ने लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन में अपील दायर कर हर्जाना मांगा है.

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब बीते वक्त, ज़ी, स्टार इंडिया को तय समयसीमा में 1.4 अरब डॉलर (पहली किस्त) का भुगतान नहीं कर पाया है.

वहीं, ज़ी की तरफ से कहा गया है कि “20 करोड़ डॉलर के भुगतान की पहली किस्त चुकाने में विफल रहने के बाद वह अब भुगतान करने की तथा (स्थिति) में नहीं हैं.” इससे पहले ज़ी ने कहा था- ‘स्टार इंडिया मौजूदा मध्यस्थता प्रक्रिया में क्षतिपूर्ति मांग रही है लेकिन अभी उसकी राशि तय नहीं है.’

बिजनेस स्टैंडर्ड की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ज़ी ने अपने एक बयान में कहा है- “कंपनी स्पष्ट रूप से स्टार के सभी अपुष्ट दावों का जोरदारी से प्रतिवाद करती है.” इस मसले के बाद ज़ी के शेयरों में उतार चढ़ाव भी दर्ज किया गया है, ऐसा यह रिपोर्ट बताती है.

बता दें कि इसी साल मार्च में मुकदमे का यह विवाद शुरू हुआ था. स्टार इंडिया ने लंदन मध्यस्थता पंचाट में मामला दायर किया. एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, स्टार ने 16 सितंबर को लंदन मध्यस्थता अदालत के सामने पेश होकर हर्जाने की मांग करते हुए बताया था कि उसने ज़ी एंटरटेनमेंट के साथ गठजोड़ तोड़ लिया है. स्टार ने हर्जाना तय किए जाने की मांग भी की थी.

ज़ी और स्टार के बीच मूल समझौता 26 अगस्त 2022 को हस्ताक्षर किया गया था. समझौते के तहत ज़ी आईसीसी के प्रमुख आयोजनें की अहम प्रसारक थी. स्टार ने 2024-27 के लिए ज़ी को आईसीसी टूर्नामेंटों के प्रसारण का उप-लाइसेंस दिया था. जिसे बाद में अनुबंध संबंधी उल्लंघनों का हवाला देकर अगस्त 2024 में समाप्त कर दिया गया.

उधर, ज़ी का दावा है कि स्टार ने समझौते का उल्लंघन करते हुए करीब 80 लाख डॉलर के भुगतान की मांग की है. इसके अलावा पिछले महीने ज़ी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क इंडिया ने 10 अरब डॉलर के अपने विफल विलय पर एक दूसरे के खिलाफ सभी दावों को सुलझा लिया है और मामले वापस ले लिए. ज़ी ने 2026 तक बेहतर मार्जिन के लिए पैसे भी जुटाए हैं और खर्च घटाने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी की है.

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