न्यूज़ चैनलों द्वारा मोदी की अमरीका यात्रा की कवरेज चारण-भाट क़िस्म की थी

अति हर चीज़ की बुरी होती है। फिर चाहे वो किसी का मण्डन ही क्यों न हो। मोदी के अमरीका की धरती पर चरण रखने से पहले ही भारतीय न्यूज़ चैनलों के पत्रकार वहां पहुंच चुके थे। और फिर शुरू हुआ मोदी का गुणगान। पूरे हफ्ते चली इस सांस रोक देने वाली कवरेज ने मोदी के बारे में हमें इतना बता दिया है कि अब कल्पना के लिए कुछ भी शेष नहीं है।

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देशी मीडिया सरकारी भोंपू की तरह मोदीमय रहा। अमरीका में भारत की छवि पर इस मोदी यात्रा का क्या और कितना असर पड़ा ये तो आने वाले समय में पता चलेगा। लेकिन भारत द्वारा मंगलयान की सफलता के बाद अमरीकी अख़बार न्यूयार्क टाइम्स ने एक आपत्तिजनक कार्टून (ऊपर देखें) को छाप कर नई बहस शुरु कर दी, क्या अमरीकी जनमानस भारत को लेकर अब भी प्रजातीय पूर्वाग्रहों से ग्रसित है। कार्टून में एक पगड़ी पहने ग़रीब भारतीय को गाय ले जाते हुए दिखाया गया है जो एक ‘एलीट स्पेस क्लब’ के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी तब अमरीका में ही थे।

वहीं अमरीका के राजनीतिक व्यंगकार जॉन स्टेवार्ट ने मोदी की यात्रा और परफार्मेंस पर खूब चुटकी ली। विडियो देखने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करेंः

Jon Stewart Reacts To Narendra Modi Visit To USA

चलते-चलते पढ़ें बिज़नेस स्टैण्डर्ड ने अपने एडिटोरियल में मोदी यात्रा के दौरान मीडिया की भूमिका पर क्या कहाः

“Prime Minister Modi’s trip to the United States was marred by news reporting that was excessively fawning. Coverage was, in fact, reminiscent of the bad old days of state-controlled media, when the nightly news bulletin on Doordarshan was little more than a paean of praise to Rajiv Gandhi or Indira Gandhi. In fact, the saturation coverage was so disproportionate to the actual scope or achievements of the prime minister’s visit that it was embarrassing….
 
“Modi has begun a new tradition since taking office. Journalists no longer travel with him on Air India One. This is part of a larger attempt to keep the media as distant as possible. Only a few journalists from state-controlled agencies went along with the prime minister. Others went there themselves. But the cost of the tickets was wasted when they wound up sounding like state-controlled media themselves.”

 

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