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आज के अखबार : सौ ग्राम में देश की खेल, राजनीति और व्यवस्था सब उघाड़, 56 ईंची करिश्मा तो नहीं?

संजय कुमार सिंह

मैंने कल लिखा था कि राजनीति के साथ खेल हो गया। उसके तुरंत बाद राजनीति ने खेल के साथ खेल कर दिया। खेल को राजनीति से जोड़ने के लिए सबूत चाहिये और सबूत कई हैं। हालांकि, जो हुआ वह अपने आप में खेल ही है वरना साजिश कहना पड़ेगा। यह इस बात के बावजूद हुआ है कि विनेश ने अप्रैल में ही कहा था कि उसे डोप में फंसाने की कोशिश हो सकती है। जो हुआ उससे यही लगता है कि उसे फंसाया चाहे नहीं गया हो भारत सरकार के स्तर का संरक्षण, सुरक्षा और कवच में हासिल नहीं हुआ। दिया भले गया हो या उपलब्ध भी रहा हो। आप मानें या न मानें जो हुआ उससे देश में खेलों के हालात, उससे संबंधित राजनीति और व्यवस्था सब उघाड़ हो गई। आज कई अखबारों ने इसे सामान्य बताने की पेशकश की है उससे भी ताली बजाने वाली पत्रकारिता उघाड़ हुई है। आप जानते हैं कि विनेश फोगाट को कुश्ती में रजत मिलना पक्का था पर वह भी नहीं मिला या कहिये कि जाने दिया गया। जो, सब, जैसे हुआ वह सामान्य नहीं है और उसे सामान्य दिखाने की कोशिश ही आज की मेरी खबर है और इसमें सबसे पहला है, प्रधानमंत्री का ट्वीट।

आप जानते हैं कि विनेश फोगाट को जब रजत पदक मिलना पक्का हो गया और वे स्वर्ण पदक की दिशा में बढ़ गईं तो राहुल गांधी ने बधाई दी थी। ट्वीट किया था जो कल नवोदय टाइम्स में छपा था। मैंने यहां उसका जिक्र किया था। प्रधानमंत्री ने ट्वीट नहीं किया था किया होता तो वह भी खबर होती। कल किया तो खबर है और उसे अमर उजाला ने छापा है। ट्वीट इस प्रकार है, (शीर्षक) “चैंपियनों में चैंपियन हो विनेश हम सब आपके साथ : मोदी”। आगे लिखा है, “विनेश आप चैम्पियनों में चैम्पियन हो। आप भारत का गौरव हो और भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत। आज के झटके से दुख पहुंचा है। काश, मैं शब्दों में बता पाता कि इस समय कितना मायूस हूं। मुझे पता है कि आप फिर वापसी करोगी। चुनौतियों का डट कर सामना करना आपके स्वभाव में है। मजबूती से वापसी करो। हम सभी आपके साथ हैं।”       

प्रधानमंत्री का यह ट्वीट अपेक्षाकृत जल्दी आ गया था इससे देश के बाकी लोगों को निराशा हुई हो या नहीं, कम से कम मुझे लगा कि देश ने हार (खेल से बाहर किया जाना) स्वीकार कर लिया है और अब कुछ नहीं हो सकता है। मेरा मानना है कि उन्हें इसमें जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं थी। हालांकि, बाद में खबर आई जो जाहिर है जारी और प्रचारित की गई होगी कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) की प्रमुख पीटी उषा से उचित कार्रवाई के लिए कहा है। विनेश फोगाट के साथ पीटी उषा की तस्वीर भी आ गई और खबर है कि भारतीय ओलंपिक संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

मुद्दा यह है कि जब वजन ज्यादा था तो विरोध किस बात का? क्या ओलंपिक एसोसिएशन को ढील देना चाहिये था? जाहिर है नहीं और मुद्दा यह नहीं है कि ओलंपिक एसोसिएशन ने क्या किया। अभी तक मुद्दा यह   नहीं है कि वजन में गड़बड़ी की गई। यह लगभग स्वीकृत तथ्य है कि वजन ज्यादा था 100 ग्राम ज्यादा था जो कायदे से 49 किलो 900 ग्राम ही होना चाहिये था वह 50 किलो 100 ग्राम था। भले ज्यादा वजन 100 ग्राम है लेकिन आदर्श स्थिति में 50 किलो से इतना कम होना चाहिये था कि यह विवाद ही नहीं होता। यही नहीं, जब पिछले दिन वजन 49 किलो 900 ग्राम था तो एक दिन में 200 ग्राम बढ़ कैसे गया और क्या यह साधारण लापरवाही है? अगर विनेश की भी हो तो नुकसान देश का हुआ। क्यों नहीं माना जाये कि देश की पूरी ओलंपिक टीम ने साजिश किया या चूक गई।

नवोदय टाइम्स ने आज बताया है कि वजन किन कारणों से बढ़ता है। मुझे लगता है कि आज किसी की दिलचस्पी यह जानने में नहीं होगी और जब विशेषज्ञ साथ होते हैं तो इसे जानना और आवश्यक ख्याल रखना उनका काम है और यह साधारण नहीं है तभी विशेषज्ञ साथ भेजे जाते हैं। आज खबर यह होती कि विशेषज्ञों ने क्या कहा या अपने बचाव में क्या किया। लेकिन अखबारों ने और तमाम गैर जरूरी चीजों के साथ यह भी बताया है कि वजन बढ़ना सामान्य है। पर वह सामान्य स्थितियों में होगा। विशेषज्ञों की निगरानी में हो गया तो विशेषज्ञ किस काम के और वे हैं कहां, उनका पक्ष क्यों नहीं है?  

आज के अखबारों में मुद्दा यह नहीं है कि वजन एक या दो दिन में 200 ग्राम कैसे बढ़ गया। जो निगरानी में था (होना चाहिये था) उसका कैसे बढ़ गया। आज की खबरें देखिये, मैं कल से देख रहा हूं इसपर कोई बात नहीं है। यह जरूर बताया गया है कि वजन कम करने के सारे प्रयास किये गये, विनेश ने रात भर वर्क आउट किया, बाल भी काटे गये। हालांकि, मुझे लगता है कि और काटे जा सकते थे। गंजा भले नहीं किया जाता ब्वाय कट करने में किसी को क्या दिक्कत होती। जो भी हो, आज के अखबार यह प्रचार कर रहे हैं कि सरकार, व्यवस्था या आईओए ने कोई लापरवाही नहीं की। हालांकि उपाय के तौर पर बाल काटना और रात भर वर्क आउट ही बताया गया है जो कोई बड़े राज की बात नहीं है।  खेल मंत्री ने संसद में बयान दिया ही है पर सच्चाई यह है कि एक (या दो दिन में) वजन कम से कम 200 ग्राम बढ़ गया जिसे कम होना था। या वहीं रहना था। जाहिर है वजन ज्यादा होने का मामला विनेश के सिर थोपने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर लोग यह भी कह रहे हैं कि रिओ ओलंपिक मे भी इनका वजन ज्यादा था। संभव है, इस तरह यह साबित करने की कोशिश चल रही हो कि गलती विनेश की है। मैं मान लेता हूं कि है भी। लेकिन तब सवाल है कि देश के खर्चे पर उतनी बड़ी टीम वहां किसलिये गई थी और विनेश के प्रशिक्षण, तैयारी आदि में देश का पैसा क्यों खर्च किया गया।

नुकसान तो देश का भी हुआ। जिन लोगों ने देश की चिन्ता नहीं की उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिये। उनकी पहचान क्यों नहीं होनी चाहिये। लेकिन कल जब यह खबर आई उसके बाद से ही यह भी पता चलना शुरू हुआ कि पूरी टीम में संघ, भाजपा, अंबानी से जुड़े और गुजराती लोग हैं। सरकार से जुड़े लोग होने ही थे और विनेश उनसे भिड़ती रही है। इसलिए दिखाया और कहा चाहे जो जाये तथ्य यह है कि विनेश को सरकारी संरक्षण नहीं मिला या उसका कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसा नहीं है कि उसे इसका आभास नहीं था। उसने पहले ही लिखा था कि उसे डोप में फंसाने की साजिश हो सकती है। अब लगता है कि वह इसे लेकर सतर्क थी इसलिए उसके खिलाफ यह तरीका नहीं अपनाया गया और ऐसा तरीका अपनाया गया जिससे बदनामी की आशंका ज्यादा थी पर परवाह करने की जरूरत भी नहीं थी। आज के अखबारों में जो है उसपर आने से पहले यह बता दूं कि इस खबर के बाद ओलंपिक टीम से संबंधित जो जानकारी सामने आई वह इस प्रकार है –

  1. ओलंपिक टीम में पीटी उषा से लेकर नीता अंबानी तक सरकार की करीबी हैं
  2. मख्य चिकित्सा अधिकारी दिनशा पारदीवाला अंबानी के अस्पताल से हैं
  3. गुजराती, दिनशॉ पारदीवाला आर्थ्रोस्कोपी और शोल्डर सर्विस के निदेशक हैं
  4. भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह, ब्रजभूषण सिंह के करीबी हैं  
  5. मिशन प्रमुख, गगन नारंग की सफलता पर भाजपा अध्यक्ष ने बधाई दी थी
  6. गगन नारंग को 2019 में राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जा चुका है
  7. पूर्व कोच ने कहा है, वजन नापने वाली मशीन की जांच होनी चाहिए
  8. रेसलिंग फेडरेशन ने कहा है, ‘हम देख रहे हैं, हमें क्या करना है…’
  9. नरेंद्र मोदी ने आईओए प्रमुख पीटी उषा से उचित कार्रवाई के लिए कहा है
  10. पीटी उषा ने बयान जारी करके कहा है कि वे चकित और निराश हैं
  11. संजय सिंह ने कहा कि इसके लिए कोच और न्यूट्रिशनिस्ट जिम्मेदार हैं
  12. जवाब टीम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी दिनेशॉ परदीवाला ने दिया है 
  13. कोच और न्यूट्रिशनिस्ट का बयान मुझे ना आज अखबार में ना कल कहीं दिखा 
  14. खेल मंत्री ने संसद में बताया कि विनेश को क्या (आर्थिक) सहायता दी गई है
  15. विनेश ने अप्रैल में ही कहा था कि डोप में फंसाने की साजिश हो सकती है
  16. सबके बावजूद हुआ यह कि जो रजत पदक मिल सकता था वो भी नहीं मिला
  17. नरेन्द्र मोदी ने कहा था, पांच सात दस मेडल तो सेना के हमारे जवान ले आयेंगे
  18. अब विनेश की योग्यता के मद्देनजर उन्हें राज्यसभा में मनोनीत करने की मांग है।

अमर उजाला में यह खबर लीड है और पूरा शीर्षक है, 140 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों पर भारी 100 ग्राम वजन। विनेश ओलंपिक में अयोग्य करार, वजन बढ़ने पर फाइनल में खेलने से रोका। देश एक निश्चित पदक से वंचित। एक ‘खबर’ और उसका शीर्षक यह भी है, एक ग्राम भी वजन अधिक तो अयोग्य। कहने की जरूरत नहीं है कि पूरी खबर का भाव इस दुर्लभ घटना को सामान्य बनाने वाला है। एक ग्राम भी वजन अधिक तो अयोग्य – बताने वाली बात नहीं है सबको पता है। हालांकि सोने की खरीद में तो ग्राम और उसके भाग का भी वजन और मतलब होता है लेकिन सीमा एक टन हो तो भले मतलब यही हो कि एक टन एक ग्राम नहीं चलेगा पर सबको पता है कि एक टन में एक ग्राम की औकात कितनी है और उसे बिला वजह बड़ा मामला बनाने की कोई जरूरत नहीं है।

मुख्य खबर के साथ तीन कॉलम का एक शीर्षक है, रात भर वजन कम करने का करती रहीं प्रयास। एक खबर का शीर्षक है, 53 किलो वर्ग में खेलती थीं, 50 में खेलना पड़ा। इसमें बताया गया है, 50 किलो विनेश का नियमित भार वर्ग नहीं है। वह 53 किलो भार वर्ग में खेलती हैं। लेकिन इस भार में अंतिम पंघाल ने क्वालीफाई कर लिया। क्वालीफायर में भी उन्हें वजन कम करने के लिए जूझना पड़ा था। उनका आम दिनों में वजन 56 से 57 किलो रहता है। इसमें सवाल यह है कि जिस भार वर्ग में खेलती हैं उसके अलावा दूसरे में मौका दिया गया तो यह नियमों के अनुकूल ही होगा पर 56-57 किलो को 50 के नीचे रखना साधारण नहीं है और यह सबको पता था उसके बाद भी वजन बढ़ गया और 100 ग्राम ही और वह भी एक ही दिन में – इसका स्पष्टीकरण नहीं है। अगर यह सामान्य है और वजन कम रखना वाकई मुश्किल था तो विनेश को इस भार वर्ग में भेजा ही क्यों गया। रजत बचाने की कोशिश क्यों नहीं हुई जो स्वर्ण के लिए जोर लगाया गया। आखिर यह सब किसे देखना था विनेश पर मेहरबानी अगर हुई तो किसने की और किसलिये? क्या यह सब किसी बृहद साजिश का भाग नहीं है?

खबर यह भी है कि खिलाड़ी अपने सामान्य वजन से कम में ही खेलते हैं ताकि प्रदर्शन अच्छा रहे। इसलिए यह बहाना व्यर्थ है। खबर और शीर्षक से यह भी बताया गया है कि बाल तक काटे गये। इसका जिक्र मैं ऊपर कर चुका हूं। नवोदय टाइम्स का मुख्य शीर्षक है, 100 ग्राम की कीमत जान गया देश। खबर के साथ प्रधानमंत्री के ट्वीट का एक हिस्सा और यह खबर भी है कि उन्होंने पीटी उषा से बात की। यहां और भी कई खबरों के साथ एक सवाल वह भी है जो मैंने ऊपर उठाया है। शीर्षक है, चाचा का सवाल एक रात में वजन कैसे बढ़ा। मुझे लगता है कि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है और पूरी ओलंपिक कमेटी को इसका जवाब देना चाहिये लेकिन यह सवाल मुद्दा ही नहीं है। विनेश के चाचा महावीर फोगाट पूर्व में ओलंपिक कुश्ती कोच रह चुके हैं और कहा है कि इसका ध्यान कोच को रखना था।

इंडियन एक्सप्रेस में आज पहले पन्ने पर विनेश का विज्ञापन है। नवोदय टाइम्स की खबर में बताया गया है कि लवली प्रोफेसनल यूनिवर्सिटी उन्हें 25 लाख रुपये देगा। यह राशि विश्वविद्यालय ने रजत पदक विजेता के लिए घोषित कर रखी थी। विनेश जलंधर में इस विश्वविद्यालय में एमए मनोविज्ञान की छात्रा है। हिन्दुस्तान टाइम्स में आज यह खबर लीड है। शीर्षक है, बगैर मेडल चैम्पियन। बाकी जो कुछ है वह सब वैसे ही है जैसे यह सामान्य बात है। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, 100 ग्राम ने अरबों उम्मीदों को कुचला, स्वर्ण (पदक) के सपने को धूल में बदला। नवोदय टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा है कि विनेश ने कहा, खेल में ऐसा होता है। इससे लगता है कि विनेश के लिए यह बड़ी बात नहीं है और वे इसे सामान्य खेल मान रही हैं।    

द हिन्दू में भी यह लीड है, अतिरिक्त 100 ग्राम ने विनेश के ओलंपिक सपने को चूर किया। खबर का उपशीर्षक बताता है कि आईओए ने छूट की मांग की पर नहीं मिली। मुझे लगता है कि इस मांग का कोई मतलब नहीं है और 50 किलो वर्ग में उसी को खेलना चाहिये जिसका वजन 50 के नीचे रहता है। और नीचे का मतलब 100 ग्राम कम नहीं दो किलो कम होना चाहिये ताकि अंतिम समय में इस तरह का धोखा नहीं हो पर खबरों से लगता है कि यही सामान्य है। द हिन्दू ने विनेश के साथ पीटी उषा की फोटो भी छापी है। द टेलीग्राफ में भी यह खबर लीड है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, 100 ग्राम का बोझ जो झेलने लायक नहीं है। मोटे तौर पर यहां भी यह रूटीन खबर की ही तरह छपी है। हांलांकि अखबार ने 28 मई 2023 की एक तस्वीर छाप कर पुराने मामले को याद किया है और बताया कि गुस्सा और तकलीफ में उनका चेहरा कैसा दिख रहा है। एक फोटो छोटे बालों में भी है और उसके साथ बताया गया है कि खाने की किन चीजों का वजन 100 ग्राम होता है। ये हैं – 1) मध्यम आकार के सेव का आधा 2) मध्यम आकार का एक केला 3) चौथाई कप आटा 4) व्हाइट ब्रेड के पांच स्लाइस 5) बेक किये हुए मध्यम आकार के आलू का आधा 6) मध्यम आकार का एक टमाटर 7) टी-बोन स्टीक का 1/5 पौंड। इससे आप समझ सकते हैं कि विशेषज्ञों की निगरानी में रहते हुए 100 ग्राम वजन कम रखना या कम करना या बढ़ना कितना मुश्किल या आसान होगा। जो भी हो, अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। 

कल दिन भर सोशल मीडिया में जो चला उसी से साफ हो गया था कि मुद्दा एक रात में वजन बढ़ने का है। जब वजन घटाना मुद्दा था तो बढ़ कैसे गया। नहीं घटता तो बात समझ में आती। जाहिर है कहीं कुछ गड़बड़ है पर लीपापोती की कोशिशें तो हैं सन्नाटा भी कम नहीं है। जो सवाल हर किसी को करना चाहिये वह सिर्फ विनेश के चाचा ने किया है। इन खबरों के साथ आज अमर उजाला की एक खबर उल्लेखनीय है। खबर का शीर्षक है, नफरत की हद : बंग बंधु पर फिल्म बनाने वाले निर्माता व उनके अभिनेता बेटे की पीटकर हत्या। उपशीर्षक है, अभिनेता शांतो खान व पिता सलीम खान गृहनगर से जान बचाकर भाग रहे थे, भीड़ न दबोचा। एक और खबर में बताया गया है कि शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के 29 समर्थकों के शव बरामद हुए हैं। यह डरावनी खबर है। खबरों से पता चलता है कि बांग्लादेश में  शेख हसीना और इस कारण उनके पिता को लेकर कितनी नाराजगी थी। अखबार ने इसे नफरत की हद कहा है और यह सब एक दिन में नहीं हुआ होगा और हम जानते हैं कि वे वहां की लोकप्रिय नेता थीं तथा चौथी बार की प्रधानमंत्री थीं। जाहिर है उनके समर्थक भी होंगे पर उन्हें पद से हटाने के बाद उनकी हत्या हो रही है, उनपर फिल्म बनाने वालों की भीड़ मार डाल रही है तो आप समझ सकते हैं लोगों की नाराजगी क्यों और कैसे बढ़ी होगी। पता नहीं वहां सरकार समर्थकों की भीड़ विरोधियों को मारती थी कि नहीं पर अब सरकार समर्थकों को तो मारा जा रहा है और जाहिर है यह काम सरकार के विरोधी मौका मिलने पर कर रहे हैं। लेकिन यह सब कोई तभी करता है जब नाराजगी से भरा हो और बहुत दिनों तक लाचारी महसूस की हो। बांग्लादेश की खबरों में सीख तो है पर आज भी मैं खेल में राजनीति के खेल पर ही लिख गया। हालांकि अखबारों में यही ज्यादा है।

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