मजीठिया वेज बोर्ड की जंग में राजस्थान पत्रिका के 2 साथियों को मिली जीत

दैनिक भास्‍कर और दैनिक जागरण के बाद राजस्‍थान पत्रिका को भी मप्र हाईकोर्ट में हार का मुंह देखना पड़ा है। मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय में मजीठिया पर बनी विशेष खंडपीठ ने 18 जुलाई को सुनाए गए अपने ऐतिहासिक फैसले में WJA की धारा 17 (1) में कौशल किशोर चतुर्वेदी और जूही गुप्ता के पक्ष में उप श्रमायुक्‍त (DLC) द्वारा जारी RCC को सही माना है। डीएलसी ने इन दोनों कर्मियों के मामले में 20जे का निपटारा करते हुए विवादित राशि पर कोई विवाद नहीं होने पर 2016 आरसीसी जारी कर दी थी।

इस पर पत्रिका का प्रबंधन ने उच्‍च न्‍यायालय का रूख किया था। लगभग तीन साल तक चली कार्रवाई के दौरान यह मामला मजीठिया पर बनी विशेष खंडपीठ के पास आ गया। प्रबंधन की याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने 20जे पर सुप्रीम कोर्ट की मंशा स्‍पष्‍ट करते हुए इस आदर्श स्थिति में काटी आरआरसी मानते हुए कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया था। सुनवाई के दौरान माननीय विद्वान न्यायाधीश श्री सुजय पॉल की बेंच ने स्पष्ट किया था कि 19 जून 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मंशा कतई ये नहीं है कि कर्मचारियों के कम वेतन पर 20 जे लागू होगा। 20जे केवल अधिक वेतन के मामले में वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

मालूम हो कि प्रबंधन और कर्मचारी पक्ष में 20जे को लेकर अदालत में जबरदस्‍त बहस हुई थी। प्रबंधन का सारा जोर 20जे के आधार पर डीएलसी द्वारा आरआरसी को खारिज करवाने का था। जिसपर कर्मचारी के वकील ने अदालत के समक्ष जबरदस्‍त दलीलें पेश की थी। अदालत ने साथ इस आरसीसी को आदर्श स्थिति में जारी हुआ माना। यानि इस पर राशि या अन्‍य मुद्दों पर कोई विवाद की स्थिति नहीं थी। तभी डीएलसी ने इसे जारी किया था।

मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय की मजीठिया पर बनी विशेष खंडपीठ का यह फैसला उन साथियों के लिए बेहद काम का है, जिनके मामले में कंपनी अदालत में 20जे का हवाला दे रही है। इसके अलावा अदालत ने नईदुनिया का एक मामला और भास्कर के अन्य करीब 22 मामलों को लेकर उपश्रमायुक्त को 17 (2) में भेजने के निर्देश दिए हैं। इन मामलों में राशि पर विवाद था, जिसका निर्धारण अब श्रम न्यायालय से होगा।

इस महत्‍वपूर्ण फैसले को डाउनालोड करने के लिए यहां क्लिक करें : 20j court order

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