ज्ञानेंद्र शुक्ला-
सामर्थ्यवान का किसी भी परिस्थिति में कोई दोष नहीं होता, आर्थिक मामलों को लेकर सामान्य विधायक नेता तक सुरक्षित माने जाते हैं तो देवतुल्य पदों पर आसीन जनों की महिमा ही बलिहारी है। हम तो बस अवधी कहावत ही दोहरा ले सकते हैं “जैसे इनके दिन बहुरे वैसे सबके दिन बहुरें!!”
IndianExpress ने ये ख़बर छापी है, जिसे लेकर स्पष्टीकरण आना शेष है।
13 दिसंबर, 2023 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद से, मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने 168 एकड़ के कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, कीमत 45 करोड़ रुपये है। ये प्लॉट उन इलाकों में हैं जहां इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) के सरकारी विकास से सबसे ज़्यादा फ़ायदा हुआ, जहां ज़मीनों की माँग जबरदस्त बढ़ी।
मोहन जी 2004-2010 के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, 2011-13 के दौरान MP पर्यटन विकास निगम (MPTDC) के मुखिया और 2013 से उज्जैन (दक्षिण) से विधायक थे। ज़्यादातर प्लॉट या तो उज्जैन और उसके आस-पास घोषित नई सड़क परियोजनाओं के पास हैं, या फिर उन इलाकों में हैं जिन्हें ‘उज्जैन मास्टर प्लान 2035’ के तहत खेती वाली ज़मीन से रिहायशी या कमर्शियल ज़मीन में बदलने के लिए चिह्नित किया गया है।
जनवरी 2024 से, यानी मोहन यादव के मुख्यमंत्री का पद संभालने के कुछ ही समय बाद, राज्य सरकार ने इन्हीं इलाकों में कई नई सड़कों और हाईवे की घोषणा की है। स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारियों का आकलन है कि इससे भविष्य में इन ज़मीनों की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी।
यादव परिवार—जिसमें मोहन यादव के बेटे वैभव और बहन कलावती भी शामिल हैं—के पास उज्जैन और उसके आसपास 179 एकड़ में फैले कम से कम 108 प्लॉट थे। इनमें से कम से कम 85 एकड़ ज़मीन 2021-2023 के दौरान खरीदी गई थी, जब यादव शिक्षा मंत्री थे। लेकिन मोहन यादव के CM पद की शपथ लेने के बाद ही परिवार ने ज़मीन खरीदने का काम बहुत तेज़ी से शुरू किया।
राज्य सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि मोहन यादव जी के परिवार के कारोबार या ज़मीन के लेन-देन को मुख्यमंत्री से जोड़ना सही नहीं है।

मोहन यादव के भाई हैं निलेश.एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज थे.पिछले साल इस्तीफा दिया.एडिशनल एडवोकेट जनरल बना दिए गए.कहते हैं एमपी का क़ानून मंत्रालय वही चलाते हैं.ये महज़ संयोग नहीं है कि इस विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का पद महीनों से खाली है.रिपोर्ट के मुताबिक 108 एकड़ जमीन उनके नाम है।
-पंकज झा, वरिष्ठ पत्रकार
मुकेश कुमार-
मोहन यादव ने वही किया जो इस समय बीजेपी का हर नेता कर रहा है। बहती गंगा में सब हाथ धो रहे हैं। जिसे जहां मिल रहा है लूट-खसोट कर रहा है।
जिन्हें मंदिर मिला उसने मंदिर को मिले दान को लूटा, जिसे सत्ता मिली उसने सत्ता के ज़रिए लूटा। जिन्हें विश्वविद्यालय मिले, दूसरे बड़े संस्थानों की ज़िम्मेदारी मिली, वे वहाँ मैाल बना रहे हैं।
बहती गंगा में सब हाथ धोने में लगे हैं।
मोहन यादव फंदे में आ गए। उनके बहू, बेटे, भाई सबने जमकर ज़मीनें खरीदीं, वहां ख़रीदीं जहां सरकार कुछ करने वाली थी और जमकर मुनाफ़ा कमाया।
मोहन यादव अकेले नहीं होंगे। उनके मंत्रिगण भी इसी तरह नोट छाप रहे होंगे। आरएसएस के लोग भी हिस्सा-बाँट रहे होंगे। एकाध नेता के बारे में किसी तरह से रिपोर्टें छप जाती हैं, इसलिए हम जान पाते हैं।
ज़रा इन्हें सत्ता से हटने दीजिए तब पता चलेगा कि इनकी अलमारी में कितने कंकाल पड़े हुए हैं। इसमें आप बीजेपी-आरएसएस का असली चरित्र देख सकते हैं। उनका ढोंगीपन देख सकते हैं।
मध्य प्रदेश पूरी तरह भूमाफिया प्रदेश बन गया है। आज इंडियन एक्सप्रेस ने मुख्यमंत्री के परिवार के ज़मीन सौदों को उजागर किया है।
10 मई को दैनिक भास्कर ने मध्य प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के जमीन सौदों को उजागर किया था।
इस तरह शासन और प्रशासन दोनों के शीर्ष स्तर पर भूमाफिया विराजमान हैं।
-पीयूष बबेले, सूचना सलाहकार, पूर्व मुख्यमंत्री एमपी
राकेश कायस्थ-
तुम भी खा लो मोहन प्यारे
बुद्धि विरोधी क्रांति के महाविस्फोट से 2014 में भारत में नये युग की शुरुआत हुई। भगतों ने कहा- 1947 वाली आजादी नकली थी, ये वाली असली है। अब हर तरफ तमल थिलेगा, न्यू इंडिया बनेगा और हम अमेरिका से पूछेंगे—तू क्या है बे?
देश का हर औसत बुद्धि वाला आदमी जानता था कि असल में यह चोट्टा युग की शुरुआत है। धर्म की आड़ लेकर भावनाएं भड़काकर, संस्थाओं को खरीदकर चोरों की जमात दोनों हाथों से लगातार लूटेगी और जब भी कोई सवाल उठेगा किसी मूर्ति, किसी प्रतीक या किसी समुदाय के पीछे जाकर छिप जाएगी। इन्हें सिर्फ इतना ही आता है।
अयोध्या के महालूट की कहानी अभी खुलनी शुरू ही हुई थी कि मध्य-प्रदेश वाले मोहन जी के खानदान का कारनामा सामने आ गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विकास की योजना बनवाई और जहां-जहां से सड़क निकलनी थी, वहां पूरे खानदान से सैकड़ों एकड़ जमीन खरीदवा दी। सड़क का मुआवजा बंटना शुरू होगा और रातो-रात अरबों के वारे-न्यारे हो जाएंगे। जब घोषित इतना है तो बेनामी कितनी होगी!
इस कहानी के सामने आने पर मुझे किसी तरह का ताज्जुब नहीं है। जिन्हें इस देश के बारे में ज़रा भी पता है, वो जानते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक दोनों हाथों किस तरह की लूट मची है। क्या आपने कभी ये सोचा है कि जब इकॉनमी की बैंड बजी है, धड़ाधड़ नौकरियां जा रही हैं, आपका इंक्रीमेंट पांच परसेंट पर अंटका है, तब दिल्ली एनसीआर सहित देश के बड़े शहरों में प्रॉपर्टी के भाव सातवें आसमान पर क्यों हैं? बाज़ार में पैसा कहां से आ रहा है और कौन नोएडा से लेकर गुड़गांव तक में पांच-पांच करोड़ के फ्लैट खरीद रहा है?
लूट के लिए जिस विकास का फरेब रचा गया उसकी कहानियां अपने आप निकलकर सामने आ रही हैं। नये पुल नदी में कूदकर आत्महत्या कर रहे हैं। सड़क अपना सीना चीरकर ये बता रहे हैं कि देख लो मैं अंदर से खाली हूँ, असली माल कहीं और गया है। एथॉनल के नाम ऐसी लूट मची है कि देश के बड़े हिस्से में जल संकट पैदा होनेवाला है। असली माल कौन कमा रहा है बताने की जरूरत नहीं है।
सांप्रादायिक नारेबाजी और तेज होगी, भगवान का नाम और जोर-जोर से लिया जाएगा क्योंकि चोरों के लिए छिपने की जगह कम पड़ रही है। जब चंपत भगवान को चूना लगा रहा है तो फिर मोहन इस लूट में पीछे क्यों रहे। ये ऐसा समय है, जहां देश की आम जनता को कुछ भी हासिल नहीं होना है, सिवाय सैडिस्टिक प्लेज़र के। भक्त जब बाप-बाप करना शुरू करें तो आप ये समझ लीजिये कि आपके मोदी-मोदी करने का वक्त आ गया है।



