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लोकमत से इस्तीफा देकर युवा पत्रकार सतीश राय ‘सन्मार्ग’ में बने डिप्टी न्यूज एडीटर

युवा पत्रकार सतीश राय के बारे में सूचना है कि उन्होंने महाराष्ट्र के लोकमत समूह के औरंगाबाद संस्करण को अलविदा कह दिया है. उन्होंने दैनिक अखबार ‘सन्मार्ग’ के कोलकाता संस्करण में डिप्टी न्यूज एडीटर के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। औरंगाबाद लोकमत में सिटी डेस्क संभाल रहे सतीश के जाने से यहां उथलपुथल मच गई है। इसके चलते सिटी डेस्क प्रभारी पर काफी बोझ आ गया है.

युवा पत्रकार सतीश राय के बारे में सूचना है कि उन्होंने महाराष्ट्र के लोकमत समूह के औरंगाबाद संस्करण को अलविदा कह दिया है. उन्होंने दैनिक अखबार ‘सन्मार्ग’ के कोलकाता संस्करण में डिप्टी न्यूज एडीटर के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। औरंगाबाद लोकमत में सिटी डेस्क संभाल रहे सतीश के जाने से यहां उथलपुथल मच गई है। इसके चलते सिटी डेस्क प्रभारी पर काफी बोझ आ गया है.

सतीश राय को ‘सन्मार्ग’ कोलकाता में डिप्टी न्यूज एडीटर के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौपी गई है. उन्हें बिजनेस संपादक के बाद नंबर दो की पोजिशन पर ज्वाइन कराया गया है. उनके पास डेस्‍क और रिपोर्टिंग टीम की कमान और सारे न्यूज ऑपरेशन का उत्तरदायित्व रहेगा. मूलतः सागर (मप्र) निवासी सतीश ने सागर विवि से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की। ले आउट और डेस्क पर खास पकड़ रखने वाले सतीश ने अब तक शीर्ष अखबारों में अपनी सेवाएं दी हैं। आठ साल पहले दैनिक भास्कर से कैरियर की शुरूआत करने के बाद रायपुर और भोपाल पत्रिका में डेस्क संभाली इस दौरान उन्हें डेस्क पर महत्वपूर्ण योगदान के लिए पुरस्कृत भी किया गया। फिलहाल लोकमत के औरंगाबाद संस्करण में सिटी डेस्क इंचार्ज थे।

उन्होंने अपनी नई पारी के बारे में फेसबुक वॉल पर लिखा है- ”लोकमत से इस्तीफा देते समय मन थोड़ा भारी था। लेकिन नए परिवार से जुड़ने की खुशी भी थी। डेस्क इंचार्ज के तौर पर सेवा देना शुरू कर दिया है। बंगाल की पत्रकारिता और यहां के कल्चर में ढलने में थोड़ा वक्त लगेगा। धन्यवाद दैनिक भास्कर, पत्रिका और लोकमत। मुझे काम, नाम, सम्मान और पहचान देने के लिए। मैंने अपने पत्रकारिता करियर के आठ वर्षों से अपनी पहचान मां सस्वती के सच्चे सेवक के रूप में बनाने की कोशिश की है। पत्रकारिता बलिदान मांगती है,  जिसे स्वीकार कर अपना सफर तय कर रहा हूं’। खैर… फिर करुंगा रहगुजर की मु‌श्किलों का जिक्र, अभी तो आगे बढ़ने से ही फुर्सत नहीं यारो…. जो सफर इख्तियार करते हैं, वही मंजिलों को पार करते हैं, बस एक बार चलने का हौसला रखिए, ऐसे मुसाफिरों का तो रास्ते भी इंतजार करते हैं।”

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