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मजीठिया मामले में खुद का छल-कपट पकड़ाने से बौखलाए हिंदुस्तान प्रबंधन ने कर्मियों पर गिराई गाज

मजीठिया माँगने पर हिंदुस्तान लखनऊ के चीफ़ सब-एडिटर संजीव त्रिपाठी के बाद, चीफ़ सब प्रवीण पांडेय और वरिष्ठ उपसंपादक संदीप त्रिपाठी को भी नौकरी से निकाल दिया गया। मजीठिया माँग रहे हिंदुस्तान के आठ पत्रकारों ने मंगलवार को कानपुर जाकर लेबर कमिश्नर  रणवीर प्रसाद से अपनी माँगों के संदर्भ में बात की। कमिशनर ने माना हिंदुस्तान कैटेगरी २ (classification-II) की कम्पनी है और प्रबंधन को इसी के तहत वेतन देना होगा।

मजीठिया माँगने पर हिंदुस्तान लखनऊ के चीफ़ सब-एडिटर संजीव त्रिपाठी के बाद, चीफ़ सब प्रवीण पांडेय और वरिष्ठ उपसंपादक संदीप त्रिपाठी को भी नौकरी से निकाल दिया गया। मजीठिया माँग रहे हिंदुस्तान के आठ पत्रकारों ने मंगलवार को कानपुर जाकर लेबर कमिश्नर  रणवीर प्रसाद से अपनी माँगों के संदर्भ में बात की। कमिशनर ने माना हिंदुस्तान कैटेगरी २ (classification-II) की कम्पनी है और प्रबंधन को इसी के तहत वेतन देना होगा।

पत्रकारों ने कमिश्ननर को बताया कि हिंदुस्तान प्रबंधन धोखाधडी करते हुए लेबर विभाग और अदालत को गुमराह कर रहा है। हिंदुस्तान अपने कर्मचारियों को कैटेगरी 5 के हिसाब से वेतन दे रहा है। पत्रकारों ने लेबर कमिशनर को दस्तावेज़ सौंपते हुए बताया कि हिंदुस्तान कैटेगरी 2 नहीं बल्कि कैटेगरी 1 का अख़बार है। लेबर कमिशनर ने पत्रकारों को बताया कि अभी तक हिंदुस्तान के कर्मचारियों की ओर से विभाग को किसी तरह की कोई शिकायत मजीठिया के संदर्भ में नहीं मिली थी, इसी वजह से हिंदुस्तान प्रबंधन ने ग़लत शपथ पत्र देकर ख़ुद को अदालती कार्रवाई से बचा रखा था।

कमिशनर ने पत्रकारों को आश्वस्त किया कि अब हिंदुस्तान कर्मचारियों की ओर से बड़ी संख्या में मजीठिया के संदर्भ में शिकायतें आयी हैं, लिहाज़ा कड़ी कार्यवाही की जाएगी। लेबर कमिशनर की पहल के बाद हिंदुस्तान प्रबंधन को ग़लत तथ्य श्रम विभाग को देने का नोटिस जारी किया गया है। इससे हिंदुस्तान प्रबंधन में हड़कम्प मच गया है। कमिशनर से मिलने गए दल में निष्कासित पत्रकारों के अलावा आलोक उपाध्याय, प्रसेनजीत रस्तोगी, फिरोज़ हैदर, लोकेश त्रिपाठी एवं ल.पी.पंत शामिल थे।

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