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मार दी गई संस्था ‘बीईए’ से काम निकालने की कोशिश और इसमें ‘बीईए’ भी नष्ट हो जाये तो बड़ी बात नहीं होगी!

संजय कुमार सिंह-

देश भर के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार चैनलों की शीर्ष संस्था, ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) ने देश के 14 प्रमुख एंकर्स का इंडिया समूह द्वारा बायकाट किये जाने की घोषणा के बाद इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। 18 सितंबर को नोटिस भेजकर 19 को बैठक हुई। सादे कागज पर जारी बयान के अनुसार, एंकर बॉयकॉट के लिए इंडिया एलायंस की आलोचना हुई और इसे वापस लेने की मांग की गई।

आप जानते हैं कि देश में प्रिंट मीडिया के संपादकों की संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया है और टेलीविजन समाचार संस्थानों के संपादकों की संस्था बीईए है। मोदी सरकार में प्रिंट मीडिया के साथ टेलीविजन मीडिया भी सरकारी बाजा बन गये हैं और सरकार जनहित की रक्षा करने वाली सभी संस्थाओं को एक-एक कर नष्ट कर रही है। अकेले व्यक्ति की कोई हैसियत ही नहीं है और उसके कंप्यूटर में सबूत प्लांट कर जेल में बंद रखने के आरोप हैं। ऐसे में लंबे समय से निष्क्रिय बीईए की आपात बैठक सामान्य नहीं है।

खासकर एडिटर्स गिल्ड की रिपोर्ट के बाद टीम के सदस्यों पर एफआईआर तथा उस मामले में गिल्ड की बैठक न होने तथा जो खबरें हुईं और नहीं हुईं के आलोक में उस मुद्दे पर बीईए की बैठक नहीं होना तो मायने रखता ही है। बायकाट किये जाने वाले एंकरों में आजतक के एंकर के शामिल होने के बाद आजतक के सुप्रिय प्रसाद द्वारा अपने ही दफ्तर में बैठक बुलाना और इंडिया टुडे समूह के परिसर में बैठक होने के भी मायने हैं।

यहां यह बताना अप्रासंगिक नहीं होगा कि इंडिया टुडे समूह द्वारा चलाये जाने वाले एक स्कूल के पूर्व छात्र ने इंडिया टुडे समूह के प्रमुख अरुण पुरी को एक चिट्ठी लिखी है जो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं।

इसमें दिलचस्प यह भी है कि यूट्यूबर अजीत अंजुम ने इन एंकर्स के कारनामों और इस मामले में कई वीडियो बनाए हैं और वे भी बीईए के सदस्य हैं। बुलावा उन्हें भी था पर वे गए नहीं और अपनी बात कई वीडियो के जरिये रखी है। अजीत अंजुम के एक वीडियो (तीसरे) का शीर्षक है, टीवी एडिटर्स की मीटिंग में दागी एंकर्स को बचाने के लिए आज क्या सब हुआ।

बैठक के बाद जारी बयान को पढ़ने के बाद वेंकट वेमुरी (वीवीपी शर्मा) ने पूछा है, क्या बीईए को आंतरिक तौर पर इस मामले से नहीं जूझना चाहिये था। उन्होंने लिखा है कि पेशेवर ढिलाई से पत्रकारिता की साख खत्म होती जा रही है। यह ढिलाई जब पूर्वग्रह दिखाने की होती है तो कुछ एंकर कथित रूप से जो करते हैं उसे खुलेआम सांप्रदायिक माना जा सकता है और इसे दूर करने की आवश्यकता नहीं है? और इसके लिए सबसे अच्छे लोग कौन हैं बल्कि वही जिनके नेतृत्व में ऐसे आरोप लगे हैं। या अगर यह महसूस किया जाता है कि एंकर्स ने कुछ गलत नहीं किया है तो एसोसिएशन को ऐसा खुलेआम और अधिकार पूर्वक कहना चाहिए। पर एसोसिएशन जो नहीं कर सकता है वह है, इसे पूरी तरह नजर अंदाज करना।

ऐसे एसोसिएशन की बैठक की सूचना के साथ ही कार्यकारणी के चुनाव की भी बात कही गई थी। इसका मतलब है कि जो कार्यकारिणी समिति चल रही है उसकी मियाद निकल चुकी है। ऐसी समिति की बैठक और उसके निर्णय के मायने स्पष्ट हैं। और इसके बारे में बीईए के सदस्यों में एक और एनके सिंह ने पूछा है, कौन सा बीईए? वही जो साजिशन लंबे समय पहले दफन किया जा चुका है और अब उसे फिर से खड़ा किया जा रहा है ताकि उसके नाम पर कुछ बेशर्मी और की जा सके।

बैठक में और उसके नाम पर जो बेशर्मी हुई उसे बताना मेरा मकसद या काम नहीं है। मैं सिर्फ यह बताना चाहता हूं कि जो बैठक थी वह कैसी होगी।

उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ पत्रकार और बीईए के पूर्व महासचिव एनके सिंह, एनडीटीवी के बिग फाइट कार्यक्रम में कह चुके हैं कि मालिकों के हसतक्षेप के कारण भारत में मीडिया का आत्मनियमन बाधित हुआ है। मुझे बीईए का कोई वेबसाइट या ट्वीटर हैंडल नहीं मिला।

यहां यह बताया जा सकता है कि 2012 में जब सुधीर चौधरी पर वसूली का आरोप लगा था तो वह ज़ी न्यूज का संपादक और बिजनेस हेड था। बीईए ने तब उसे कोषाध्यक्ष के पद से हटाने के साथ-साथ संस्था की प्राथमिक सदस्यता से भी निलंबित कर दिया था। अब वह बायकाट किये जाने वाले 14 एंकरों में भी है। इसके बावजूद बीईए की बैठक हुई और उसकी खबर चल रही है तथा सोशल मीडिया पर शेयर भी हो रही है। बीईए की आपात बैठक दागी और सांप्रदायिक एंकरों पर लगे कलंक को धोने की कोशिश के अलावा क्या हो सकती है। इसमें दफन की जा चुकी एक संस्था के नाम पर सत्ता के समर्थन की कोशिश भी की जा रही है।

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