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सियासत

मोदी की ये तस्वीर दो वजहों से हो रही वायरल!

पहला कारण-

कमाल की एक्यूरेसी है। इतनी कर्री ट्रेनिंग तो शाखा , ITC या OTC में भी नहीं होती जो कि तीनों के जूतों के एक्शन में एक ° का भी अंतर नहीं। शायद 29 जनवरी की बीटिंग रिट्रेट की परेड वाले फौजी भी इतनी शानदार शेप बना कर नहीं चल सकते
क्या कमाल का द्वी समबाहु त्रिभुज बना कर चल रहे हैं। -गिरधारी लाल गोयल

दूसरा कारण-

इस तस्वीर में प्रधानमंत्री के हाथ में खाली फोल्डर देखकर मैं कल रात सटायरिकल था। लेकिन यही पिछले 10 साल का सच है। प्रधानमंत्री के पास भारत की आम जनता के लिए कुछ नहीं है।सब–कुछ अदानी और अंबानी के लिए है। बावजूद इस खाली फोल्डर के, प्रधानमंत्री कल नई संसद में तीसरी इकॉनमी की बात फिर कर गए। यह जानते हुए भी कि जीडीपी के अनुपात में देश की बचत 50 साल के सबसे निचले स्तर पर है। 2021–22 में यह 7.9% थी, जो 2022–23 में 5.1% थी। पाई–पाई जोड़ने की भारतीय संस्कृति कहां गुम हो गई? क्यों फटी धोती पर टांके जोड़कर बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने वाला समाज आज भिखमंगा हो गया? 2020–21 में भारतीय परिवारों ने 22.8 लाख करोड़ जोड़े। 2021–22 में यह आंकड़ा 16.96 लाख करोड़ पर आ गया। 2022–23 में और गिरकर 13.76 लाख करोड़ हो गया। लेकिन जुलाई 2022 में इन्हीं परिवारों ने 35.94 लाख करोड़ का पर्सनल लोन लिया। जुलाई 2023 में आंकड़ा उछलकर 47.31 लाख करोड़ पर पहुंच गया। अगर आप इसी अवधि में औद्योगिक कर्ज को देखें तो जुलाई 2022 में यह 31.82 लाख करोड़ था, जो जुलाई 2023 में 33.65 लाख करोड़ है। साफ है कि देश के 50 करोड़ लोग ज़िंदा रहने के लिए बचत से 4 गुना ज्यादा कर्ज ले रहे हैं, जो वे फंदे में झूल जाने पर भी नहीं चुका सकेंगे। दूसरी ओर, लोन माफी और टैक्स माफी की कमाई से सत्ता को टुकड़े फेंककर कॉर्पोरेट्स मलाई चाट रहे हैं। और फिर जनता से लूटकर यही कॉर्पोरेट्स लोन भी बांट रहे हैं। इस देश में बढ़ती आर्थिक असमानता और अमीर–गरीब के बीच बढ़ता फासला भयावह है। -सौमित्र रॉय

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