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भाजपा की सेवा में कई वर्षों से जुटे लखनऊ के सीनियर फोटो जर्नलिस्ट आर बी थापा को बेघर किए जाने की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं!

Shailendra Singh-

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक भ्रष्ट एलडीए के बाबू के सामने फ़ोटो जर्नलिस्ट आर.बी.थापा की पत्रकारिता कमजोर पड़ गई. पिछले 8 सालों से थापा जी भाजपा की सेवा में है. थापा जी और जिनका परिवार पिछले 55 वर्षों से जिस निवास स्थान पर रहता आया, उसे एलडीए के एक भ्रष्ट बाबू और वहीं एलडीए पर कार्यरत उसके भ्रष्ट बेटे ने कौड़ियों के भाव खरीद कर उनके 50 /55 वर्षीय घोसले को तीतर- बितर कर दिया.

पुलिस और प्रशासन की ज़ोर ज़बरदस्ती के आगे उस मकान पर माननीय न्यायाधीश का ऑर्डर छिन्न-भिन्न होकर रह गया. पुलिसकर्मी और बेनाम अधिवक्ताओं द्वारा थापा जी के परिवार की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का जो साहस किया गया. वह ईमानदार पत्रकारिता के मुँह पर तमाचा है.

पत्रकारों के हितों की इस तरह हो रही रक्षा ? फ़ोटो जर्नलिस्ट को न्याय दो. आरबीथापा के साथ सभी पत्रकार साथियों को खड़ा होना चाहिए.


Naved Shikoh-

झुक गया कंधा लेकिन ईमान नहीं झुका… डिजिटल युग से पहले छायाकारों के कैमरे और उससे जुड़े उपकरणों का एक भारी बैग होता था जो एक कंधे पर टंगा रहता था। ये कैमरे वाला बैग इतना भारी होता था कि छायाकारों का शरीर ही बेडौल लगता था। एक कंधा झुक जाता था।

आर बी थापा जी के साथ काम करने के अलावा भी इनका साथ रहा, इनसे नजदीकी रिश्ता रहा। तीस साल में हमने कभी इन्हें कैमरे के बैग के बिना नहीं देखा। बीस-बाइस बरस पहले इनका बैग इतना भारी था कि थापा जी का एक कंधा हमेशा झुका होता था। कंधे का बोझ बढ़ाने वाला बैग जितना जर्जर था उससे ज्यादा उनकी स्कूटर जर्जर थी। लेकिन प्रेरणादायक बात ये है कि झुके कंधे वाले इस छायाकार का धनाभाव में भी ईमान नहीं झुका।

मैं तो कहता हूं कि कंधे के साथ ईमान भी झुक जाता तो आज आर बी थापा बेघर सड़क पर नहीं होते। पानी की बौछारों, आग के शोलों लाठीचार्ज और फायरिंग के बीच तस्वीर को कैद करने में थापा सबसे आगे रहे। अयोध्या में बाबरी विध्वंस की उनकी पहली तस्वीर विश्व विख्यात है।

लेकिन जिन्दगी शोहरत, मेहनत और ईमानदारी के तीन कांधों पर चलते चलते डगमगाने लगती है। एक कंधा थोड़ी बहुत बेइमानी का भी होना चाहिए है। ईमानदारी और गरीबी के बोझ से झुका कंधा तो था लेकिन थापा के पास बेइमानी वाला भी एक कांधा होता तो जिन्दगी इन चार कांधी पर आराम से चलती।

आर बी थापा भाई को बेघर किए जाने की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। ये इतने पुराने फोटो जर्नलिस्ट हैं कि पुराने मीडियाकर्मियों से इनसे पसीने का रिश्ता हो गया है। पसीने का रिश्ता भी ख़ून के रिश्ते से कम नहीं होता। पहले अखबार कम थे और संसाधन और भी कम थे इसलिए पसीना ज्यादा बहाना पड़ता था। जिसने-जिसने इनके साथ काम किया है उनका इनसे पसीने का रिश्ता है। पसीने में नमक होता है इसलिए नमक के रिश्ते की तरह पसीने का रिश्ता भी काफी गहरा होता है।

अब सवाल ये कि सोशल मीडिया ही नहीं जमीन पर उतर कर अपने साथी की मदद कैसे की जाए? लेकिन उनसे संपर्क और फिर सहमति के बिना कुछ नहीं किया जा सकता !!!

थापा को उनका हक़ क्यों नहीं मिला !

सवाल ये नहीं कि लखनऊ जिला प्रशासन/पुलिस ने उन्हें घर से बाहर किया ! सवाल ये कि लाख जायज़ कोशिशों के बाद राज्य सम्पत्ति विभाग ने उन्हें आवास क्यों नहीं दिया ! जबकि राज्य सम्पत्ति में पत्रकार को जिन मानकों और नियमों के तहत मकान दिया जाता है वो सारे मानकों/नियमों के तहत थापा को आवास मिल जाना चाहिए था –

नियम एक- अभ्यार्थी के नाम कोई मकान ना हो।

(माननीय हाई कोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार के जिला प्रशासन ने दलील दी है कि फोटो जर्नलिस्ट आर बी थापा के नाम आवास नहीं है।)

नियम दो- अभ्यर्थी अपना अनुभव साबित करे
(आर बी थापा चालीस साल से अधिक समय से निरंतर लखनऊ में श्रमजीवी फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते रहे।

थापा ने टाइम्स ऑफ इंडिया/नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, कुबेर टाइम्स, स्वतंत्र भारत.. इत्यादि प्रतिष्ठित अखबारों में चार दशक से अधिक समय तक काम किया। )


Gyanendra Shukla-

घोर अनर्थ-विडंबना, पत्रकार अपने घर से बेदखल, ज्यादती का शिकार पर सरकार-तंत्र का मरहम नदारद… वरिष्ठ फोटो पत्रकार आर बी थापा चार दशकों से ज्यादा वक्त से लखनऊ की पत्रकारिता में बतौर फोटो जर्नलिस्ट सक्रिय रहे हैं। दैनिक जागरण, स्वतंत्र भारत, एनबीटी सरीखे संस्थानों में कार्यरत रहे हैं। कार्य की अधिकता व स्वास्थ्य कारणों से मैं इधर फेसबुक पर सक्रिय नहीं रहा। इसलिए समय से जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में वरिष्ठ पत्रकार Naved Shikoh की पोस्ट के जरिए ये प्रकरण संज्ञान में आया।

पता चला कि प्रशासन-अदालत की चकरघिन्नी में थापा जी का परिवार उलझ गया, किसी भी सामान्य नागरिक की तरह कुटिल दांवपेंचों को समझ नहीं सके लिहाजा तंत्र के उत्पीड़न का शिकार हुए। परिजनों को अपमानित होना पड़ा। घर से बेदखल कर दिए गए। ये अति दुखद और असहनीय है। कल देर रात काफी कोशिश के बाद थापा जी के पुत्र रविन्द्र से संपर्क हो सका तो उसने सारी जानकारी दी।

रविन्द्र बीजेपी मुख्यालय में फोटोग्राफी का काम देखते हैं पर विडंबना देखिए कि सत्ताधारी संगठन में काम करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो सकी। थापा जी की सरलता या तंत्र की कठोरता वजह रही हो पर ये हकीकत है कि चालीस वर्षों से पत्रकारिता का हिस्सा रहे थापा जी को बीते कई वर्षों से प्रयत्न के बावजूद सरकारी आवास आवंटित नहीं हो सका। जबकि अपना आलीशान मकान होने के बावजूद सरकारी आवास में काबिजजनों की तादाद बढ़ चुकी है। फिलहाल सभी सुधि पत्रकारों और तंत्र के संवेदनशील जिम्मेदारों से विनम्र आग्रह है कि थापा जी की मुश्किलों में कमी लाने में सार्थक सहयोग दें.


कुछ अन्य प्रतिक्रियाएं-

Yogesh Insaan
घर तो किसी भाजपाई का भी ना टूटना चाहिए, ये तो फिर भी पत्रकार हैं ! डूब मरना चाहिए उन पत्रकारों को जिनको पता होते हुए भी कुछ नहीं कर रहे, उनके सामने ये सब हो रहा ! बहुत दुख की बात है !

Ashish Tiwari
लखनऊ के पत्रकारों को इतने में सरकार का कान पकड़ लेना चाहिए था। हो क्या गया है महारथियों को?

Gaurav Gupta
इस नवरात्रि, मैं सारे चाटुकार पत्रकारों के लिए यही प्रार्थना करूंगा की, उनको भी ये दिन जल्दी नसीब हो।

Dhiraj Kumar Singh
ठीक किया , ऐसे पत्रकारों के साथ यही होना चाहिए जो सत्ता की चाटुकारिता कर रहे है । अभी जो किया कम किया

Kashi Pd
अब तो बुखार उतर जाना चाहिए। नहीं तो भला करेंगे राम!!! वैसे योगी जी के एक प्रमुख सचिव हैं जो पत्रकारों के बड़े मित्र बनते हैं लेकिन मन में बहुत खोट है। हमारे तमाम कथित बड़े पत्रकार उनकी धोती छांटने में कोई कसर नहीं रखते। सूचना निदेशक फिर भी बहुत संतुलित दृष्टिकोण रखते हैं।

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3 Comments

3 Comments

  1. SANJOG WALTER

    October 15, 2023 at 3:39 pm

    #आरबीथापा जी किसी परिचय के मोहताज़ नहीं है। क़ानूनी पक्ष जो भी हो ।आज आर बी थापा जी के पास सर पर छत नहीं है। दूसरा आरोप यह है LDA के बाबू के पास मकान को खरीदने लिए रूपये कहां से आये ? पुलिस ने मकान खाली करवाते समय उनके परिवार के साथ जो बर्ताव किया है वो नाकाबिले बर्दाश्त है।

  2. kailash Nath verma

    October 15, 2023 at 7:11 pm

    थापा जी के साथ अन्याय हुआ है,भरस्टाचारियो,माफियाओं जैसा सलूक लोक तंत्र की हत्या है,थापा जी को तत्काल आवास की व्यवस्था हो।सरकार न कर पाए तो हम सभी पत्रकार थोड़ा थोड़ा सहयोग करे तो आवास की स्थायी व्यवस्था हो जाएगी।

    • सत्येंद्र चौधरी

      October 16, 2023 at 4:11 pm

      सही कहा आपने

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