
यशवंत सिंह-
राजेश्वर सिंह कुछ वर्षों पहले तक प्रवर्तन निदेशालय के जाने माने अधिकारी थे. उनके नाम जब्ती और जांचों के कई रिकार्ड हैं. देश के सर्वाधिक चर्चित व हाईप्रोफाइल केसों की गुत्थियां इन्होंने सुलझाईं. इन्हें प्रभाव में लेने और डिगाने के लिए क्या कुछ हथकंडे नहीं आजमाए गए. बड़े-बड़े ग्रुपों, बड़े-बड़े लोगों ने विविध तरीके से उन्हें दबाव में लेने के लिए सारे खटकर्म किए. यहां तक कि केंद्रीय सत्ता के तत्कालीन गृह मंत्री तक ने उनका मन बदलने के लिए हर पैंतरे आजमाए. पर राजेश्वर सिंह के मंसूबों को कोई बदल न पाया.
ये सब कांग्रेस राज की बातें थीं. नौकरी की मजबूरियों, दबावों और दिक्कतों से उबे राजेश्वर ने सरकार बदलते और भाजपा शासन आते ही इस्तीफे की पेशकश कर दी. उन्हें समझाया गया, पर वे अड़े रहे. उनकी सेवाओं को देखते हुए भाजपा ने उन्हें सियासत में पारी शुरू करने का आफर किया जिसे उन्होंने कुबूल कर लिया. अब वे लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से विधायक हैं और सूबे की तरक्की में मुख्यमंत्री योगीजी के सपनों को साकार करने में लगे हैं.
राजेश्वर सिंह के प्रयासों से देश-विदेश की सैकड़ों कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में विविध क्षेत्रों में न सिर्फ निवेश किया है बल्कि कामों-प्रोजेक्ट्स को तीव्र गति से पूरा करते हुए रिजल्ट देना शुरू कर दिया है. भूख, अशिक्षा, बेरोजगारी के मोर्चे पर काफी काम किया है राजेश्वर ने. उत्तर प्रदेश में निवेश और प्रोजेक्ट्स के लिए वे देश-विदेश में घूमते रहते हैं, कंपनियों-ग्रुपों से बात करते रहते हैं. इसी सबमें से समय निकालकर वे घर-परिवार से जुड़े आयोजनों में भी शिरकत करते रहते हैं. ऐसे ही एक कार्यक्रम में वे शामिल होने के लिए हैदराबाद पहुंचे हुए थे.
मौका था भांजी इशा सिंह को गृहमंत्री अमित शाह के हाथों ‘Manipur Cup for Law’ पदक प्रदान किया जाना… इस आयोजन को लेकर कई ट्वीट राजेश्वर सिंह ने किए हैं, देखिए-


उपरोक्त दोनों स्क्रीनशाट्स के लिंक-
पुलिस अफसर रह चुके राजेश्वर सिंह जब हैदराबाद गए तो वहां के चर्चित सरदार वल्लभ भाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी जाना नहीं भूले. यहां उन्होंने एक तस्वीर खिंचाई और एक महिला आईपीएस अधिकारी की तारीफ करते हुए उसे ट्वटिर पर पोस्ट कर दिया. इस पर कई लोग सवाल पूछने लगे कि आखिर विधायकजी एक महिला आईपीएस अधिकारी की इतनी तारीफ क्यों कर रहे हैं.

जाहिर है, जिन्हें नहीं पता, वे ही ऐसे सवाल पूछ रहे हैं. महिला आईपीएस अफसर लक्ष्मी सिंह दरअसल राजेश्वर सिंह की पत्नी हैं. लक्ष्मी सिंह इन दिनों नोएडा में पुलिस कमिश्नर के रूप में पदस्थ हैं. लक्ष्मी सिंह पुलिसिंग के क्षेत्र में चर्चित नाम हैं. वे अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए जहां बेहद सख्त हैं तो गरीबों-पीड़ितों के लिए बेहद सहज और भावुक. यही वजह है कि लखनऊ में लंबी पारी खेलने के बाद अब वे नोएडा की पुलिस कमिश्नर हैं. लक्ष्मी सिंह को कई पुरस्कार मिले हैं. उन्हीं में से एक पुरस्कार का जिक्र हैदाराबाद वाली पुलिस एकेडमी में गर्व से दर्ज है जिसके करीब खड़े होकर गर्व से राजेश्वर सिंह ने तस्वीर खिंचाई और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया.



राजेश्वर सिंह की इस पोस्ट से लर्निंग ये है कि कितने भी बड़े बन जाइए, विनम्र रहिए, दूसरों के योगदान को स्वीकार कीजिए, समय-समय पर तारीफ करिए, उन्हें पर्याप्त महत्व दीजिए. और मामला जब घर का हो तो क्या कहने. हालांकि कहने वाले कहते हैं कि समझदार लोग अपनी समझदारी की शुरुआत अपने घर से ही कर लेते हैं. यही वजह है कि राजेश्वर जी देश दुनिया को ठीक दुरुस्त करने के अभियान के साथ-साथ बीच बीच में अपने घर में भी सहज-सकारात्मक माहौल बनाए रखने की कवायद करते रहते हैं. कहीं ये तारीफ उसी की एक कड़ी तो नहीं 🙂
सोचिए, पति विधायक, पत्नी पुलिस कमिश्नर…. कभी तो ऐसा होता होगा कि कोई आदमी विधायक जी का रिफरेंस लेकर कमिश्नर मैडम के यहां मिलने पहुंचे और लौट कर बताए कि हमें तो बहुत बेइज्जत किया मैडम ने. जी हां. ऐसा हो चुका है. एक माननीय टाइप शख्स विधायक राजेश्वर जी के माध्यम से पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से मिलने उनके आफिस पहुंचे और वहां जिन फऱियादियों को अपने साथ ले गए थे, उन्हें दिखाने के लिए कुछ जोर-जोर से सबके सामने नेतागिरी झाड़ने लगे. सीपी लक्ष्मी सिंह ने कुछ देर धैर्य से सुना, फिर हड़काते हुए बस इतना कहा- ”देख रहो हो न ये खिड़की, उठाकर बाहर फेंक दूंगी. नेतागिरी यहां न करना. जो फैक्ट्स है वो शांति से बताओ.”
फर्स्ट फ्लोर पर मैडम के सामने बैठे माननीय तो सन्न रह गए. वे अपना-सा मुंह लिए हुए लौट गए. जाकर विधायक जी के यहां दुखड़ा रोए. मैडम ने ऐसा कहा वैसा कहा. राजेश्वर जी भी क्या कहते, बोले- ”भइया वो मेरी भी नहीं सुनतीं हैं कई बार. जाने दीजिए. भूल जाइए. आगे बढ़िए.”
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह को शुभकामनाएं. ऐसे ही बने रहिए. दबंग, जीवट और संवेदनशील.
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