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मध्य प्रदेश

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में बढ़ रहीं छेड़छाड़ की घटनाएं, प्रशासन ख़ामोश

मध्यप्रदेश के “माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय” में छात्राओं के साथ छेड़खानी की कई घटनाएं सामने आयीं है। इनके संबंध में छात्राओं ने विभागाध्यक्षों और शिक्षकों से मौखिक शिकायत भी की थी कि विव के कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा उनके साथ लगातार छेड़खानी और अभद्र हरकतें की जा रही है। शिकायत के बावजूद विवि प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। छात्र-छात्राओं का कहना है कि खराब माहौल की वजह से वे विवि नहीं आ रहे हैं। लेकिन विवि प्रशासन द्वारा नोटिस देकर उन पर आने का दबाव बनाया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के “माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय” में छात्राओं के साथ छेड़खानी की कई घटनाएं सामने आयीं है। इनके संबंध में छात्राओं ने विभागाध्यक्षों और शिक्षकों से मौखिक शिकायत भी की थी कि विव के कुछ शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा उनके साथ लगातार छेड़खानी और अभद्र हरकतें की जा रही है। शिकायत के बावजूद विवि प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। छात्र-छात्राओं का कहना है कि खराब माहौल की वजह से वे विवि नहीं आ रहे हैं। लेकिन विवि प्रशासन द्वारा नोटिस देकर उन पर आने का दबाव बनाया जा रहा है।

ज्ञात हो कि पत्रकारिता विवि प्रशासन ने करीब 50 छात्र-छात्राओं का प्रवेश निरस्त कर दिया है। वहीं कुलपति ने इसे विवि में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के विरुद्ध की गई कार्यवाही बताया।

महिला अधिकारी के साथ छेड़खानी

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कर्मचारी अजय चौहान के खिलाफ सहायक कुलसचिव ने छेड़खानी और अभद्र भाषा इस्‍तेमाल करने की शिकायत की है। कुलपति को की गई लिखित शिकायत में पीड़िता का कहना है कि जब वो ड्यूटी ख़त्म होने के बाद अपने घर जा रही थीं तो विवि के मेन गेट पर कर्मचारी अजय चौहान द्वारा उनके साथ छेड़छाड़ की गई और लोगों के सामने अभद्र शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया गया।

पत्र में लिखा गया है कि कुलपति द्वारा यदि अजय चौहान के विरुद्ध जल्द ही कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई तो वे महिला आयोग में शिकायत करेंगी। ज्ञात हो कि विवि के उक्त कर्मचारी को पहले भी इन्ही हरकतों की वजह से नगर निगम भोपाल की नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। अब सवाल ये है कि ऐसे व्यक्ति को विव में नियुक्ति क्यों दी गई?

 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित।

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1 Comment

1 Comment

  1. Govind singh

    August 20, 2014 at 9:27 am

    बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय घटना है. यह समस्या जैविक और मनोवैज्ञानिक से कहीं अधिक सामाजिक है. लगता है विश्वविद्यालय के बुरे दिन शुरू हो गए है. कभी पत्रकारिता के अध्ययन के लिए महसूर यह विश्वविद्यालय अपनें पतन के रास्ते पर है. इन घटनाओं के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन खामोश और मौन क्यों है?

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