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जब सस्पैंड होते होते बचीं यूपीएससी की अध्यक्ष रजनी राजदान

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की वर्तमान अध्यक्ष और हरियाणा कैडर की प्रशासनिक अधिकारी रजनी राजदान एक बार मुअत्तल (सस्पैंड) होते होते बची थीं। यह रोचक घटना उन दिनों की है जब राजदान हरियाणा शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर तैनात थीं। उन दिनों तक मोबाइल फोन नहीं होते थे। एक दिन शाम को उनके फोन पर घंटी बजी कि मैं हरियाणा का मुख्यमंत्री देवीलाल बोल रहा हूं। सीएम तू है या मैं हूं। फोन सुनकर रजनी राजदान भौंचक्की सी रह गई लेकिन तुरंत जवाब दिया कि सीएम तो आप ही हो। उधर से फिर आवाज़ आयी कि मैं तुम्हें मुअत्तल कर सकता हूं।

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की वर्तमान अध्यक्ष और हरियाणा कैडर की प्रशासनिक अधिकारी रजनी राजदान एक बार मुअत्तल (सस्पैंड) होते होते बची थीं। यह रोचक घटना उन दिनों की है जब राजदान हरियाणा शिक्षा विभाग में निदेशक के पद पर तैनात थीं। उन दिनों तक मोबाइल फोन नहीं होते थे। एक दिन शाम को उनके फोन पर घंटी बजी कि मैं हरियाणा का मुख्यमंत्री देवीलाल बोल रहा हूं। सीएम तू है या मैं हूं। फोन सुनकर रजनी राजदान भौंचक्की सी रह गई लेकिन तुरंत जवाब दिया कि सीएम तो आप ही हो। उधर से फिर आवाज़ आयी कि मैं तुम्हें मुअत्तल कर सकता हूं।

रजनी के पति अनिल राजदान भी हरियाणा कैडर के प्रशासनिक अधिकारी हैं। फोन पर हुए संवाद से परेशान रजनी ने अपने पति को फोन करके तुरंत घर पहुंचने को कहा। अनिल राजदान ने बताया कि वे उस शाम को अपने कार्यालय में बैठे लोगों से भेंटवार्ता कर रहे थे। फोन सुनकर वे भी परेशान हो गए। वे आनन फानन में घर पहुंचे और रजनी से चाय बनाने को कहा। आमतौर पर वे शाम की चाय इकट्टे पीते थे। रजनी ने चाय बनाने की बजाय मुख्यमंत्री के फोन आने का पूरा वाक्या बता दिया और यह भी बता दिया कि सीएम साहब ने उन्हें मुअत्तल करने की बात भी कही है। ईश्वर के प्रति आस्था रखने वाले और ईमानदारी से अपनी नौकरी करने वाले दोनों अफसरों को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।

बहरहाल दोनों ने चाय पीने के दौरान पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करना शुरू कर दिया। सहसा रजनी को याद आया कि सुबह ही मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने उन्हें किसी महाविद्यालय में किसी व्यक्ति को लेक्चरर लगवाने की सिफारिश की थी। रजनी राजदान ने साक्षात्कार लेकर उसी दिन योग्यता के आधार पर परिणाम घोषित कर दिए थे। उन्होंने उस अधिकारी को वही बात बता दी थी। निश्चय ही उक्त अधिकारी ने देवीलाल के कान भर दिए होंगे कि ये अफसर आपकी परवाह नहीं करते हैं। रजनी राजदान ने सारा घटनाक्रम एक कागज़ पर लिखा और एक उसकी कार्बन कॉपी भी बना ली।

अगले दिन एक प्रति मुख्य सचिव कुलवंत सिंह को दे दी तथा दूसरी शिक्षा विभाग के आयुक्त को दे दी। उन्होंने मुख्य सचिव से आग्रह किया कि वह पीएचडी करना चाहती हैं इसलिए उनकी छुट्टी मंजूर कर लें। अब मुख्य सचिव हैरान थे। एक ओर तो देवीलाल रजनी की मुअत्तली के लिए कह रहे थे और उधर रजनी ने पीएचडी करने के लिए किसी विश्वविद्यालय में आवेदन भी नहीं कर रखा था। ऐसे में पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति ने उन्हें पीएचडी करने की अनुमति दे दी और मुख्य सचिव ने उनकी छुट्टी मंजूर कर दी।
उधर देवीलाल को बता दिया गया कि रजनी को छुट्टी भेज दिया गया है। काफी समय बाद एक दिन जब देवीलाल को अहसास हुआ तो उन्होंने रजनी को हरियाणवी में कहा कि तूं तो बड़ी काबिल अफ़सर है जो महकमा (विभाग) लेना है ले ले। किसी ने मेरा नाम लेकर फोन कर दिया होगा।

 

पवन कुमार बंसल। उपरोक्त घटना हरियाणा की राजनीति पर आधारित और हाल ही में विमोचित लेखक की पुस्तक ‘गुस्ताखी माफ हरियाणा’ में भी प्रकाशित है।

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