विश्व दीपक-
असली मास्टर माइंड कौन है? शक की सुई तो धर्मेन्द्र प्रधान की तरफ़ जा रही है. लेकिन निष्पक्ष जाँच हो पाए तो सच्चाई पता चले. सवाल है सीबीएसई चेयरपर्सन और सेक्रेटरी को हटाने से क्या होगा? तेलंगाना में 23 छात्रों की मौत की जिम्मेदार कंपनी – कोएम्प्ट – को कॉपी जांचने का ठेका क्या केवल चेयरपर्सन या सेक्रेटरी की सहमति से मिला होगा?

देश में पेपरलीक कोई हवा में नहीं हो रहे हैं. एक के बाद एक पेपर लीक होना बताता है कि इस राज में पूरा सिस्टम सड़ चुका है. माफियाओं और अपराधियों के कब्जे में है पूरा का पूरा एजुकेशन सिस्टम.
सीबीएसई ने जिस तरह से नियमों को धज्जियां उड़ाते हुये कोएम्प्ट को ठेका दिया वह बिना मंत्री की सहमति के नहीं हो सकता. सीबीएसई चेयरपर्सन और सेक्रेटरी अपनी नौकरी क्यों खतरे में डालेगा? कोएम्प्ट को ठेका देने के लिये सीबीएसई ने क्या किया – यह देखिए.
सबसे गंदा काम जो सीबीएसई ने किया वह था ब्लैकलिस्टिंग के नियमों को पूरी तरह अनदेखा करना. नियम था कि अगर कोई कोई कंपनी अतीत में ब्लैकलिस्ट हो चुकी है तो उसे कॉपी जांचने का काम नहीं मिलेगा. लेकिन कोएम्प्ट को ठेका देने के लिये सीबीएसई ने यह शर्त हटा दी.
इसकी जगह नई शर्त गढ़ दी जिसमें कहा गया कि कंपनी वर्तमान में अगर ब्लैकलिस्टेड न हो तो उसे ठेका मिल सकता है. यह किसके कहने पर हुआ? आपको लगता है कि सेक्रेटरी और चेयरपर्सन के लेवल का काम है यह.
कोएम्प्ट 2019 में तेलंगाना में ब्लैकलिस्ट हो चुकी थी. तब इसका नाम ग्लोबरेना हुआ करता था. इस कंपनी के हरामीपन की वजह से तेलंगाना में 3.8 लाख विद्यार्थी फेल हुये थे. अवसाद में आकर 23 छात्रों ने आत्महत्या कर ली.
धर्मेन्द्र प्रधान 2021 में शिक्षा मंत्री बने. आपको क्या लगता है कि सीबीएसई या शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को कोएमप्ट का इतिहास नहीं मालूम रहा होगा?
23 छात्रों की मौत की जिम्मेदार कंपनी को कॉपी जांचने का ठेका क्या केवल चेयरपर्सन या सेक्रेटरी की सहमति से मिला होगा? मंत्री जी के यहां से ग्रीन सिग्नल आये बिना यह काम नहीं हुआ होगा. अगर नैतिकता के आधार पर किसी को हटना चाहिये तो वो इस देश का शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान है.



