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गुजरात बीजेपी में कलह की वजह बना IFFCO चुनाव, करीबी की हार पर अमित शाह नाराज

गुजरात भाजपा की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है. इस कलह की वजह है सहकारिता फर्म इफको. वही इफको जिसके भ्रष्टाचार को लेकर भड़ास ने पूरी की पूरी सीरीज चला दी थी.

हाल ही में इफको के निदेशक पद के लिए जो चुनाव हुए, उसे लेकर गुजरात भाजपा के भीतर चल रहा तनाव चरम पर पहुंच गया. फलस्वरूप केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक करीबी को हार का सामना करना पड़ा.

Dilip Sanghani Amit Shah Jayesh Rdadiya and Bipin Gota inset

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व सांसद दिलीप संघाणी विश्व की सबसे बड़ी को-ऑपरेटिव संस्था इफको का साल 2022 में दोबारा अध्यक्ष चुना गया था जबकि बलवीर सिंह वाइस चेयरमैन बने थे. 2021 में इफको के अध्यक्ष बलविंदर सिंह नकई के निधन के बाद दिलीप संघाणी 2022 में पहली बार इफको चेयरमैन चुने गए थे. इफको बोर्ड का कार्यकाल पांच साल का होता है. इफको निदेशक मंडल के लिए 15वीं प्रतिनिधि महासभा के चुनाव में 36000 से अधिक सहकारी समितियों के सदस्यों की सहभागिता रही थी.

इसके बाद निदेशक के 21 पदों के लिए इसी साल 9 मई, 2024 को इफको कॉरर्पोरेट कार्यालय, दिल्ली में संपन्न चुनावों में जगदीप सिंह नकई, उमेश त्रिपाठी, प्रह्लाद सिंह, बलवीर सिंह, रामनिवास गढ़वाल, जयेश रदाड़िया, ऋषिराज सिंह सिसोदिया, विवेक बिपिनदादा कोल्हे, सिमाचल पाढ़ी, के श्रीनिवास गौड़ा, एस शक्तिकवेल, प्रेम चंद्र मुंशी, वर्षा एल कस्तूरकर, दिलीप संघाणी, सुधांश पंत, आलोक कुमार सिंह, जे. गणेशन, एम.एन. राजेंद्र कुमार, पी.पी. नागी रेड्डी, बाल्मिकी त्रिपाठी और मारा गंगा रेड्डी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र से निदेशक मंडल के सदस्य चुने गए हैं.

निदेशक मंडल की कुछ सीटों के लिए दिल्ली में इफको मुख्यालय में मतदान हुआ और शाम को गिनती हुई. रादाडिया को चुनाव में 113 वोट मिले, जो गोटा के 64 वोटों की तुलना में एक महत्वपूर्ण संख्या बताई गई थी. यहां से कहल की शुरूआत हुई थी.

मामला तब और गर्माया जब, विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह ने रदाडिया के आवास का दौरा किया था और उनके साथ भोजन किया था. फिर भी, रादाडिया ने शांत होने से इनकार कर दिया और बिपिन गोटा के खिलाफ लड़ने के अपने फैसले पर दृढ़ रहे.

रादाडिया को 2019 में पहली बार इफको के निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में चुना गया था. इससे पहले, उनके पिता विट्ठल रादाडिया ने भी इफको के निदेशक के रूप में काम किया था.

फिर ये कलह हाल ही में बढ़ी जब सोशल मीडिया पर पूर्व बीजेपी सांसद, इफको और गुजरात स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (गुजकोमासोल) के चेयरमैन दिलीप संघानी के खिलाफ भ्रष्टाचार के पुराने आरोप फिर से सामने आए.

इन आरोपों में गुजकोमासोल के भीतर संघानी के खिलाफ भ्रष्टाचार के 12 मामलों का हवाला दिया गया. विडंबना यह है कि जयेश रदाडिया इफको में अपनी सफलता का श्रेय दिलीप संघानी को देते हैं. यह सब सामने आते ही गुजरात बीजेपी में विरोध की लहर फैल गई.

इफको डायरेक्टर चुनाव में सबसे दिलचस्प बात ये रही की भाजपा का प्रत्याशी भाजपा के ही प्रत्याशी से हार गया. चुनाव के बाद इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने सभी जीते लोगों को बधाई भी दी थी. अवस्थी ने कहा था कि, “चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हुए. उन्होंने अध्यक्ष दिलीप संघाणी, उपाध्यक्ष बलवीर सिंह और निदेशक मंडल के सभी सदस्यों को समिति में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए बधाई.”

अब इस पूरे मसले पर कहानी मोड़ लेती है अमित शाह की नाराजगी पर. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नाराज हैं. क्योंकि, गुजरात के लोकसभा चुनावों के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बने इफको डायरेक्टर के चुनाव में जयेश रादाडिया की जीत हुई है जबकि अमित शाह का समर्थन बीजेपी का मैंडेट रखने वाले बिपिन पटेल उर्फ गोटा को था. लेकिन रादोडिया ने गोटा को 46 वोटों से शिकस्त दी. रादोडिया साैराष्ट्र के राजकोट जिले की जेतपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक हैं. वे पिछली बार इफको के निर्विरोध डायरेक्टर चुने गए थे, लेकिन इस बार बीजेपी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी बिपिन पटेल उर्फ गोटा को पार्टी की तरफ से अधिकृत कैंडिडेट घोषित किया था. कहा जा रहा है कि अमित शाह ने गोटा को नामित किया था और मैंडेट बीजेपी गुजरात के अध्यक्ष सीआर पाटिल की तरफ से मिला था.

ऐसे में यह काफी हाई प्रोफाइल हो गया था. रादाडिया ने एक तरह से बगावत करके चुनाव लड़ लिया और जीत भी हासिल कर ली. इसे पार्टी में दूसरी नजर से देखा जा रहा है. वहीं, सीआर पाटिल.. शाह जी के मजे के खास हैं. इसके बाद गुजरात बीजेपी में एक सुर और उठ रहा है वो ये कि, ‘रादाडिया ने अपनी उम्मीदवारी पेश करके और तीसरा कार्यकाल हासिल करके पार्टी के जनादेश की अवहेलना करी है.’

इस पूरे मसले पर गुजरात बीजेपी में हुई जो कलह सामने आई है उसके पीछे रोल इफको के निदेशक की कुर्सी का है. इफको धन से इतना मजबूत है कि इसमें बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग शिफ्ट होने के लिए लालायित रहते हैं. अब, क्यों रहते हैं इसका रहस्य भी भड़ास पर ही अपलोड है. सर्च (iffco by Ravindra singh) करके पढ़ सकते हैं.

बहरहाल अब इस पूरे मसले को लेकर अमित शाह ने कहा है कि, “असंतोष भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है.” और माना यह भी जा रहा है कि गुजरात में किसान समिति के भीतर चल रहे मंथन में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है. जो आने वाले समय में सामने आएगा.

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