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राहुल गांधी का ‘चमची’ वाला बयान पकड़कर रुबिका लियाकत रूठ गई हैं!

रूबिका लियाकत-

राहुल गांधी जी… ‘चमची-चमचा वातावरण’ से बाहर निकलिए…उस ज़माने को गुज़रे बरसों हो गए हैं…क्या हुआ आपकी मुहब्बत की दुकान का? न भाषा में संयम, न मर्यादा.. इतनी कुंठा क्यूँ? दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपके सलाहकारों ने आपको राजनेता की बजाए troller बना दिया।

पीएम ने अब तक 71 साक्षात्कार दे दिए हैं..हर सवाल उनसे पूछा गया है… महंगाई से लेकर घुसपैठियों वाले बयान तक. चीन से लेकर पाकिस्तान.. देश से लेकर विदेश तक। पत्रकार का धर्म है सवाल पूछना.. हम हर क़िस्म का सवाल पूछेंगे। आप को किसने रोका है? आप केवल 1 दे दीजिए।

आप अपनी राजनीति पर ध्यान केंद्रित कीजिए, पत्रकारिता से आपको चुनाव नहीं लड़ना है.. चुनाव मोदी से लड़ना है। और हाँ.. मेरा नाम रुबिका लियाक़त है..नाम अगली बार पर्ची पर लिखकर ले जाइएगा..

मोहम्मद जुबैर-

दीदी को बुरा नही लगा जब प्रधान सेवक ने उन्हे और उनकी क़ौम को घुसपेठिया कहा, दीदी को बुरा नही लगा जब उनकी क़ौम को ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले कहा गया, दीदी को बुरा नही लगा.

दीदी को बुरा नही लगा जब प्रधान सेवक ने कहा की कांग्रेस आपकी (हिंदुओ) संपत्ति, मंगलसूत्र, जमीन, टोंटी, घर, जायेदात सब उन्हे (मुसलमानो) को दे देंगे। दीदी को बुरा नही लगा जब प्रधान सेवक और उनके कार्यकर्ता ने अपने वीडियो में मुसलमानो को ज़लील किया।

हिंदुओं और मुसलमानों को बांटने के बाद जब भाजपा ने सिखों और मुसलमानों के खिलाफ भी भड़काया तब भी दीदी को बुरा बिलकुल नहीं लगा। जब पत्रकार के तौर पे इन सब पे दीदी को एक प्रश्न और प्रतिप्रश्न पूछने की हिम्मत नही हुई, पर दीदी को बुरा लगा जब राहुल ने चमची को चमची कहा। वह दीदी वह।

अंकित सिंह-
रुबिका लियाकत नरेंद्र मोदी से सवाल पूछती है कि, मोदी जी आप थकते क्यों नहीं हैं? क्या रुबिका लियाकत ने कभी सवाल पूछा कि, मोदी जी आप मणिपुर क्यों नहीं जाते हैं? मोदी जी आप बलात्कारियों को अपनी पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए टिकट क्यों देते हैं? तुम चमची हो रुबिका, बुरा मत मानो।

पंडित आकाश संखधर-
राहुल गाँधी तुम्हारे नाम की पर्ची लिखकर लेकर जाएंगे. तुम लोगो ने पत्रकारिता के नाम पर चापरलूसी की है उसे पूरा देश देख रहा है तुम्हे ज्ञात है की प्रधानमंत्री ने लास्ट प्रेस कॉन्फ्रेंस कब की थी तुम बाकई एक चापरलुस और अब 4 जून के बाद मोदी फ्री हो रहे है पर्ची लिखकर ले जाना तुम ताकि आगे ऐसे सबाल करके आप ट्रोल ना हो.

गुस्ताखी माफ़ बो दिन दूर नहीं की देश के मिडिया से जनता का विश्वास उठ जाएगा रूबिका लियाकत अभी भी बक्त है सच्ची पत्रकारिता कीजिए.

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