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अब जम्मू से भी छपेगा टाइम्स ऑफ इंडिया

जम्मू्-कश्मीर में विधान सभा चुनावों से ठीक पहले दिग्गज अखबार समूह बेनेट एंड कोलमैन का अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) अब जम्मू से भी प्रकाशित होगा। उसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अखबार की छपाई जम्मू में ही दैनिक जागरण के प्रेस में होनी है। उसके लिए टाइम्स ऑफ इंडिया की टीम जागरण प्रेस का निरीक्षण भी कर आई है। जम्मू में इस बड़े अखबार समूह के दस्तक देने से जहां स्थानीय अखबारों को कड़ी व्यावसायिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, वहीं नया जॉब वर्क मिलने से जागरण समूह की आय के लिए एक और स्रोत खुलेगा, जिससे उसकी कमाई में इजाफा होगा।

जम्मू्-कश्मीर में विधान सभा चुनावों से ठीक पहले दिग्गज अखबार समूह बेनेट एंड कोलमैन का अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया (Times of India) अब जम्मू से भी प्रकाशित होगा। उसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। अखबार की छपाई जम्मू में ही दैनिक जागरण के प्रेस में होनी है। उसके लिए टाइम्स ऑफ इंडिया की टीम जागरण प्रेस का निरीक्षण भी कर आई है। जम्मू में इस बड़े अखबार समूह के दस्तक देने से जहां स्थानीय अखबारों को कड़ी व्यावसायिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, वहीं नया जॉब वर्क मिलने से जागरण समूह की आय के लिए एक और स्रोत खुलेगा, जिससे उसकी कमाई में इजाफा होगा।

जम्मू-कश्मीर में एक दर्जन से अधिक प्रमुख अंग्रेजी अखबार छपते हैं, लेकिन बाजार पर डेली एक्सेल्सियर (Daily Excelsior) का ही कब्जा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेली एक्सेल्सियर का मुकाबला कोई भी बाहरी अखबार नहीं कर सकता, लेकिन यह तो समय ही बताएगा कि टाइम्स ऑफ इंडिया पहले से कश्मीीर में धाक जमाए बैठे डेली एक्सेल्सियर को कितनी चुनौती देता है। पंजाब से छपकर जम्मू पहुंचने वाला अंग्रेजी दैनिक ट्रिब्यून भी खासवर्ग के पाठकों के बीच जगह बनाए हुए है।

भाषा की बात करें तो जम्मू-कश्मीर की प्रमुख और सरकारी कामकाज की भाषा उर्दू है, लेकिन बोलचाल में बहुतायत में डोगरी और हिंदी का प्रयोग किया जाता है। अखबार के मामले में उर्दू और अंग्रेजी का बोलबाला है। अनुच्छेद 370 की वजह से दूसरे प्रदेशों की तरह जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों की बसावट और उनकी धूम कम है, लेकिन सर्विस सेक्टर में बाहरी लोगों का आवागमन होता रहता है। इस वर्ग में मजदूर अधिक होते हैं, जो प्रमुख रूप से बिहार से आते हैं। स्थानीय अभिजात्य वर्ग बहुत अधिक संपन्न है, जो अंग्रेजी अखबार पढ़ने को महत्व देता है। शायद यही वजह है कि दैनिक जागरण और अमर उजाला को छोड़ कर किसी और हिंदी अखबार ने यहां पैर जमाने की जुर्रत नहीं की। अंग्रेजी भाषा के मामले में स्थिति भिन्ऩ है। हो सकता है कि इन्हीं बातों के मद्देनजर टाइम्स ऑफ इंडिया ने जम्मू-कश्मीर में झंडा गाड़ने का मन बनाया हो।

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