13 रुपये में टॉइम्स ग्रुप TV देखने वाली महिला को बेटर MAN दे रहा है!

Deepankar Patel : “Sex sells better than anything else.” टॉइम्स 13 रूपये महीने में महिला को MAN बेच रहा है. टॉइम्स नेटवर्क का Times of india में एक एडवर्टीजमेंट छपा है. एडवर्टीजमेंट में घुघराले बालों वाली महिला है, और एडवर्टीजमेंट में लिखा है “Gift yourself a better MAN”. आगे विज्ञापन में लिखा गया है… Find …

टाइम्स आफ इंडिया को अमित शाह से डर लगता है! खबर हटाने को हुआ मजबूर… पढ़िए पूर्व संपादक का खुलासा

जैसा कि वादा किया था, इस रहस्य से पर्दा उठाऊँगा कि क्यों और किन हालात में जुलाई 2017 में टाइम्स समूह की वेबसाइटों से अमित शाह के बारे में छपी एक स्टोरी हटा ली गई। क्या यह संपादकों ने ख़ुद हटाई थी, मैनेजमेंट ने इसे हटवाया था या इसे हटाने के लिए किसी बाहरी ताक़त …

सात महिला पत्रकारों ने #metoo किया तो TOI हैदराबाद के संपादक को देना पड़ा इस्तीफा

टाइम्स आफ इंडिया, हैदराबाद के स्थानीय सम्पादक केआर श्रीनिवास ने इस्तीफा दे दिया है. उन पर #MeToo कैंपेन के तहत सात महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. ऐसा पहली बार हुआ है जब मीटू कैंपेन के कारण वरिष्ठ पत्रकार और शीर्ष संपादक ने इस्तीफा दिया है. Share on:कृपया हमें अनुसरण करें और …

TOI को पता है कि कोई किसान टाइम्स आफ इंडिया नहीं पढ़ता, इसलिए वह किसान विरोधी छापता है! देखें

Vibhuti Pandey : आप चाहे कितनी भी बार कह लें, चाहे टाइम्स के संपादक तक आप की बात से सहमत हों, लेकिन The Times of India अपना उच्च मध्यम वर्गीय चरित्र नहीं छोड़ेगा. कल किसान कवरेज पर टाइम्स की हेडलाइन पढ़िए. परसों सोशल मीडिया पर हिट शेयर के लिए इन्होंने जो भी किया हो लेकिन …

क्या टाइम्स आफ इंडिया वालों ने कश्मीर को अलग देश मान लिया!

टाइम्स आफ इंडिया ग्रुप देश का बड़ा अखबार समूह है. इस ग्रुप ने लगता है कि कश्मीर को खुद ही अलग राष्ट्र का दर्जा दे दिया है. तभी तो इस ग्रुप के अखबार मुंबई मिरर ने एक आर्टकिल में जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को जम्मू कश्मीर का प्रधानमंत्री लिख दिया. अगर ये मानवीय …

दो बड़े अंग्रेजी अखबारों के संपादक दिवाकर अस्थाना और पीआर रमेश ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में जुटे हैं! (देखें सुबूत)

टाइम्स आफ इंडिया के एक संपादक हैं, दिवाकर अस्थाना. ये हर किसी को ‘बाबू’ कह कर बुलाते हैं. एक रोज (31 मई, शाम चार बजे) इन्होंने गलती से एक मैसेज टाइम्स आफ इंडिया के पत्रकारों के लिए बने ह्वाट्सअप ग्रुप पर पोस्ट कर दिया. इस मैसेज की शुरुआत भी बाबू संबोधन से हुई थी लेकिन आगे जो कुछ लिखा गया था, उसे पढ़कर ह्वाट्सअप ग्रुप से जुड़े सारे पत्रकारों की आंखें फटी की फटी रह गई.

टाइम्स आफ इंडिया वालों ने चित्रा सिंह को लेकर इतना बड़ा झूठ क्यों छाप दिया!

खबर पढ़ाने के चक्कर में खबरों के साथ जो बलात्कार आजकल अखबार वाले कर रहे हैं, वह हृदय विदारक है. टाइम्स आफ इंडिया वालों ने छाप दिया कि सिंगर चित्रा सिंह ने 26 साल बाद का मौन तोड़ा और गाना गाया. टीओआई में सचित्र छपी इस खबर का असलियत ये है कि चित्रा सिंह ने कोई ग़ज़ल / भजन नहीं गया. उन्हें मंच पर बुलाकर सिर्फ सम्मानित किया गया था. लेकिन खबर चटखारेदार बनाने के लिए छाप दिया कि चित्रा ने गाना गाया.

टीओआई के राजशेखर झा बताएं, किसके कहने पर नजीब-आईएस वाली ख़बर प्‍लांट की थी?

जेएनयू के लापता छात्र नजीब के बारे में टाइम्‍स ऑफ इंडिया में इसके पत्रकार राजशेखर झा ने फर्जी खबर प्‍लांट की. इस खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया है कि नजीम यूट्यूब और गूगल पर आईएस (इस्लामिक स्टेट) के बारे में वीडियो आदि खोज देखा करता था, साथ ही वह आईएस की कार्यप्रणाली, विचारधारा, भर्ती आदि के बारे में अध्ययन करता था. खबर में बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने नजीब की लैपटाप के जांच के बाद यह जानकारी हासिल की है. उधर, इस खबर के छपने के बाद दिल्ली पुलिस ने खंडन भेज दिया कि उसने ऐसी कोई जांच लैपटाप की नहीं की और न ही ऐसा कोई नतीजा निकला है.

TOI MUST APOLOGISE FOR FALSE NAJEEB STORY

The Delhi Union of Journalists is shocked that a leading daily like the Times of India should have discredited itself by publishing a malicious and misleading report on the missing JNU student Najeeb. The DUJ demands that the TOI issue an immediate apology for maligning a boy who is ‘missing and unable to defend his reputation.

TOI का पेड न्यूज : इससे ज्यादा बिकी हुई राजनीतिक खबर आज तक नहीं पढी

Chandan Srivastava : कुछ पैसे लेकर The Times of India ने आज एक पेड न्यूज अयोध्या विधानसभा से बसपा प्रत्याशी के समर्थन में छापी है। इस पेड न्यूज में मतदाताओं के बयान कुछ इस प्रकार छपे हैं-

टाइम्स आफ इंडिया में प्रिंट मीडिया मालिकों के पक्ष में छपे संपादकीय का जवाब डीयूजे ने भी भेजा

A Reply to The Times of India

On the eve of the budget session and state elections the newspaper industry has made out a case for financial sops, including exemptions from the forthcoming Goods and Services tax, and higher government advertisement rates. The pretext is the losses it claims it faces as a result of paying journalists and other employees fair wages. This is a case of killing two birds with one stone: make a killing by getting more money from the government and by denying employees the dues ordered by the Majithia Wage Board.

झूठ का पुलिंदा है टाइम्स ऑफ इंडिया का संपादकीय

जयपुर। सुबह-सुबह टाइम्स ऑफ इंडिया खोलते ही संपादकीय पेज के Indian newspaper industry : Red ink splashed across the bottom line शीर्षक से प्रकाशित लेख पर निगाह पड़ गई। चूंकि मसला प्रिंट मीडिया से संबंधित था, तत्काल पढ़ डाला। पूरा लेख झूठ का पुलिंदा है। प्रिंट मीडिया के मौजूदा हालात पर आंसू (घड़ियाली) बहाए गए हैं। अपने एक भी कर्मचारी को मजीठिया वेजबोर्ड का लाभ न देने वाले टीओआई ने वेजबोर्ड को लागू करने से हो रहे नुकसानों को बताया है। अखबार लिखता है कि स्थितियां इतनी गंभीर हो चली हैं कि बड़े नेशनल डेली न्यूजपेपर्स को संस्करण (हाल में हिंदुस्तान टाइम्स ने चार संस्करणों पर ताला लगाया है) बंद करने पड़ रहे हैं, स्टाफ की छंटनी हो रही है, कास्टकटिंग जारी है, खर्चे कम करने पड़ रहे हैं। लेख में अखबारों को नोटबंदी से हुए नुकसान और आगामी जीएसटी की टैक्स दरों पर चिंता जाहिर की गई है।

टाइम्स समूह ने नहीं सौपा श्रम अधिकारी को कर्मचारियों की सूची और एरियर का डिटेल

शशिकांत सिंह

हो सकती है कानूनी कार्यवाई, आरटीआई से हुआ खुलासा…

मुंबई : देश के नंबर वन समाचार पत्र समूह बेनेट कोलमैन एन्ड कंपनी लिमिटेड अपने कर्मचारियों का ना सिर्फ जमकर शोसण कर रहा है बल्कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीमकोर्ट के आदेश को भी ठेंगे पर रखता है। इस समूह के समाचार पत्रों टाइम्स आफ इंडिया, मुम्बई मिरर, नवभारत टाइम्स और महाराष्ट्र टाइम्स में काम करने वाले हजारों लोग भले गर्व से कहते हों मैं टाइम्स समूह का कर्मचारी हूँ मगर इन्हें शायद ये जानकार काफी दुःख पहुंचेगा कि इस कंपनी ने श्रम अधिकारी को अपने कर्मचारियों की लिस्ट ही नहीं सौंपी है।

टाइम्स आफ इंडिया के दिल्ली आफिस में लगी आग, हड़कंप

दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर आईटीओ स्थित टाइम्स आफ इंडिया के आफिस में भयंकर आग से सनसनी मच गई है. टीओआई बिल्डिंग के आगे पीछे दोनों तरफ धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा है. करीब आधा दर्जन दमकल की गाड़ियां आग बुझाने में जुटी हैं. बताया जा रहा है कि आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी है. आग और धुएं की तीव्रता का आलम ये था कि लोग टाइम्स बिल्डिंग के आसपास खड़े नहीं हो पा रहे थे.

औरत के उड़ते वस्त्रों वाली यह तस्वीर छापने पर टाइम्स आफ इंडिया की सोशल मीडिया पर खिंचाई

ये फोटो टाइम्स ऑफ इंडिया के मुखपृष्ठ पर है. कभी विदेशी अतिथियों की उडती ड्रेस की तस्वीर तो कभी दीपिका पादुकोण की क्लीवेज पर चर्चा पत्रकारिता के कौन से मापदंड स्थापित किए जा रहे हैं. पता नहीं. टाइम्स ऑफ इंडिया का यह कृत्य न केवल स्त्री की गरिमा पर वार करता है बल्कि यह यह भी दिखाता है कि उसकी मानसिकता क्या है? खैर, मैं टाइम्स ऑफ इंडिया लेना काफी पहले बंद कर चुकी हूं, पर कभी कभी ई-पेपर पढ़ती हूं.

यौन उत्पीड़न के कई आरोपों से घिरे आरके पचौरी ने टीओआई और टाइम्स नाऊ के खिलाफ दायर याचिका अदालत से वापस ली

यौन उत्पीड़न के कई मामलों में आरोपी टेरी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और जाने माने पर्यावरणविद आरके पचौरी ने टाइम्स आफ इंडिया और टाइम्स नाऊ को संचालित करने वाली मीडिया कंपनी बेनेट कोलमैन कंपनी लिमिटेड के खिलाफ याचिका अदालत से वापस ली. पचौरी ने बेनेट कोलमैन के खिलाफ कार्यवाही करने और जांच के नतीजे से संबंधित खबरों के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग मानने से इनकार करने वाले एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी थी.

टाइम्स ग्रुप के मालिक विनीत जैन का वो ट्वीट पढ़िए जो उन्होंने डर के मारे कुछ ही देर में हटा लिया

सबसे उपर विनीत जैन की तस्वीर और उसके नीचे उनके द्वारा किया गया ट्वीट.

Priyabhanshu Ranjan : देश के सबसे बडे मीडिया ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर ने की RSS प्रमुख मोहन भागवत की गिरफ्तारी की मांग! चौंकिए मत। आप बिल्कुल सही देख रहे हैं। भारत के सबसे बडे मीडिया ग्रुप Bennett, Coleman & Co. Ltd ( The Times of India अखबार की parent company) के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत जैन ने आज ट्वीट किया है-

टाइम्स आफ इंडिया प्रबंधन ने अपने मीडियाकर्मियों से ट्विटर व फेसबुक एकाउंट का पासवर्ड मांगा!

Rakesh Praveer : पत्रकारों पर प्रबंधन का पहरा… दुनियाभर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दम भरने वाले एक बड़े मीडिया घराने ने अपने यहां कार्यरत पत्रकारों और स्टाफ से सोशल मीडिया के उनके निजी अकाउंट डीटेल्स मांगे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट क्वॉर्ट्ज के भारतीय संस्करण में प्रकाशित समाचार के अनुसार ‘बैनेट एंड कोलमैन’ अखबार समूह ने अपने तमाम पत्रकारों से कहा है कि वे अपने ट्विटर और फेसबुक के पासवर्ड दफ्तर के हवाले कर दें।

ये कैसी पत्रकारिता कर रहा है टाइम्स आफ इंडिया!

टाइम्स आफ इंडिया की वेबसाइट पर ‘सेलेब ट्विटपिक्स’  नामक एक कालम है. इसमें सेलेब के नाम पर युवतियां हैं और उनकी अधनंगी, नंगी तस्वीरें हैं. ”Here’s a look at the celebs who posted their pics on Twitter. A few days ago, porn star Sunny Leone has posted this topless photo of herself. 15 Jan, 2012” यह वाक्य उस तस्वीर के बाएं तरफ लिखा है, जिसमें पोर्न स्टार सन्नी लियोन अपने खुले स्तन को दोनों हाथ से ढंक रखा है और दूसरा हाथ नीचे पैंटी में. सनी लियोन की तस्वीर का स्क्रीनशाट देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: porn journalism

Shame on you TOI its NIT (An Institute of National Importance), not NIIT

 

Since the time I remember, one thing that comes to my mind is the newspaper vendor flinging Times of India at the main gate of my house. I was an avid reader of prominent national daily, The Times of India. The exclusive coverage of issues of national importance always fascinated me. The idea of switching loyalty to any other national daily didn’t even cross my mind. I would have labelled that an exceedingly absurd thought. Today, in the hustle and bustle of college life, I somehow carve out time to login Times Of India on my laptop and go through the electronic version of it. It was my love for Times Of India that drove me crazy.

टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादकों ने तो शर्म भी बेच दी

Dhiraj Kulshreshtha : आज टाइम्स ऑफ इंडिया में संपादकीय पेज पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का लीड आर्टिकल छपा है…..यह आर्टिकल अखबार और राजनेता दोनों की गिरावट का बेहतरीन नमूना है… ‘अ रिवोल्यूशन इन सब्सिडीज’ यानि आर्थिक सहायता में क्रांति…के हैडिंग से छपा यह लीड आलेख सरकार के विभिन्न विभागों की संयुक्त सालाना रिपोर्ट से ज्यादा कुछ नहीं है…जिसे वसुंधरा राजे नहीं बल्कि नौकरशाह तैयार करते हैं, और जनसंपर्क विभाग विज्ञप्ति के रूप में जारी करता है….पर बहुप्रतिष्ठित अखबार के संपादकजी क्या कर रहे हैं…अगर सेटिंग (मार्केटिंग) के तहत इस विज्ञप्ति को छापना ही था, तो अखबार के किसी भी पेज पर छाप सकते थे।

अनिल अंबानी ने TOI पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का मुकदमा

अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।

धार्मिक जनगणना के डाटा पर टीओआई और द हिंदू के इन शीर्षकों को गौर से पढ़िए

See how two of India’s leading newspapers have today reported the same data (of the latest Census)

Nadim S. Akhter : इसे देखिए, पढ़िए और समझिए. देश के दो प्रतिष्ठित अखबारों निष्ठा. किसकी निष्ठा पत्रकारिता के साथ है और किसकी चमचई में घुली जा रही है, खबर की हेडिंग पढ़ के समझा जा सकता है. मैंने कल ही फेसबुक की अपनी पोस्ट में लिखा था कि अलग-अलग चम्पादक, माफ कीजिए सम्पादक धार्मिक जनगणना के इस डाटा का अपने अपने हिसाब से इंटरप्रिटेशन करेंगे. आज फेसबुक पर एक ही खबर के दो एंगल, बिलकुल जुदा एंगल तैरता हुआ देखा तो आपसे साझा कर रहा हूं.

कलाम और याकूब की खबरों के साथ खिलवाड़ की आलोचना

याकूब मेमन की फांसी और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम के निधन से जुड़ी खबरों पर इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया के रवैये को लेकर देश के बौद्धिक जगत में जमकर आलोचना का सिलसिला सोशल मीडिया पर अभी थमा नहीं है। 

इतनी बड़ी कॉरपोरेट जालसाज़ी के आरोपियों में टाइम्‍स ऑफ इंडिया समूह के मालिक समीर जैन भी

कोई भी कहानी कभी भी खत्‍म नहीं होती। बस, हम उसका पीछा करना छोड़ देते हैं। पचास साल पुरानी एक लंबी और जटिल कहानी से मेरी मुलाकात दस साल पहले 2005 में हुई थी जिसका नायक उस वक्‍त 84 साल का था। निर्मलजीत सिंह हूण नाम के इस एनआरआइ के इर्द-गिर्द मुकदमों का जाल था। एक ज़माने में कॉरपोरेट जगत पर राज करने वाले शख्‍स को इस देश के कारोबारियों, पुलिस और न्‍याय व्‍यवस्‍था ने पंगु बनाकर छोड़ दिया था। फिर इस शख्‍स ने इस देश की न्‍याय प्रणाली का परदाफाश करने को अपना मिशन बना लिया। उसके मिशन में से एकाध कहानियां हमने भी उठाकर 2005 में ‘सीनियर इंडिया’ में प्रकाशित की थीं, जिसके बाद प्रतिशोध की कार्रवाई में संपादक आलोक तोमर समेत प्रकाशक और मालिक सबको जेल हो गई। पत्रिका बंद हो गई, आलोकजी गुज़र गए, हूण से हमारा संपर्क टूट गया, लेकिन उनका मिशन जारी रहा।

जस्टिस काटजू और टाइम्स ऑफ इंडिया को कोर्ट का नोटिस

इलाहाबाद की जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू के खिलाफ क्रिमिनल केस की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब तलब किया है। गाय के मांस संबंधी काटजू के बयान पर जस्टिस काटजू जवाब मांगते हुए कोर्ट ने टाइम्स ऑफ इंडिया को भी नोटिस जारी कर दिया है, क्योंकि उसने खबर प्रकाशित की थी। 

टीओआई के मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले हूण को मिली एक सफलता

Abhishek Srivastava : कोई भी कहानी कभी भी खत्‍म नहीं होती। बस, हम उसका पीछा करना छोड़ देते हैं। पचास साल पुरानी एक लंबी और जटिल कहानी से मेरी मुलाकात दस साल पहले 2005 में हुई थी जिसका नायक उस वक्‍त 84 साल का था। निर्मलजीत सिंह हूण नाम के इस एनआरआइ के इर्द-गिर्द मुकदमों का जाल था। एक ज़माने में कॉरपोरेट जगत पर राज करने वाले शख्‍स को इस देश के कारोबारियों, पुलिस और न्‍याय व्‍यवस्‍था ने पंगु बनाकर छोड़ दिया था।

गाजियाबाद में निजी फ्लैट पर टाइम्स ऑफ इंडिया का जबरन कब्जा, मालिक का अपहरण कराया, पीएम से गुहार

गाजियाबाद (उ.प्र.) : बड़े अखबार घराने भी अब किस तरह माफिया तत्वों की तरह अपराध जगत में घुस चुके हैं, इसका एक ताजा वाकया संज्ञान में आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने राजेंद्रनगर (साहिबाबाद) सेक्टर-2 में एस के ठाकुर पुत्र जे एन ठाकुर के आरएच-47 एचआईजी डुपलेक्स फ्लैट पर कब्जा कर लिया है। ठाकुर ने अपना फ्लैट खाली कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है।