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अमर उजाला वाराणसी से रिटायर हुए वरिष्ठ पत्रकार अजय राय!

मुलाजिमत से मुक्ति : गाज़ीपुर के शेरपुर गांव के मूल निवासी और 1942 के क्रांतिकारी शहीद डॉ शिवपूजन राय के पौत्र अजय राय ने 25 साल बाद अमर उजाला की मुलाजिमत से मुक्ति पा ली। लगभग 32 साल के अपने पत्रकारीय जीवन में उन्होंने सर्वाधिक समय यहीं बिताया। इससे पहले उन्होंने ईनाडु, अमृत प्रभात, स्वतंत्र भारत जैसे अखबारों में काम किया और लंबे समय तक फ्रीलांसिंग भी की। रीच मीडिया, बनारस बिड्स आर्थिक पत्रकारिता, बीएचयू भोजपुरी अध्ययन केंद्र के मानद फेलो जैसे एक दर्जन से अधिक पुरस्कार और फेलोशिप से सम्मानित हो चुके हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा पूरी करने वाले अजय राय का छात्र जीवन से ही राजनीतिक जुड़ाव रहा है लेकिन उन्होंने जनसरोकार पर अपनी विचारधारा को कभी प्रभावी नहीं होने दिया। काशी की संस्कृति के साथ ही पूर्वांचल में कुपोषण, बंधुआ मजदूरी और भुखमरी जैसे मुद्दों बेबाक लेखन किया और खलबली मचाई। पद और प्रगति के लिए भी कभी अखबार के भीतर या बाहर समझौता नहीं किया। हमेशा अपना पक्ष रखा और उस पर कायम रहे। न्यूज रूम और उसके बाहर लगातार जन सरोकार के लिए संघर्ष करते हुए उनका एक ही अखबार में सेवानिवृत्ति तक डटे रहना किसी आश्चर्य से कम नहीं। यह प्रेरणा दायक भी है। इसी को कहते हैं जमीन में गड़कर जीना।

बनारस अमर उजाला में पुरवाई का पेज पांच साल और देखी तुमरी काशी जैसे कालम डेढ़ दशक तक उन्होंने चलाया। दोनों की असाधारण लोकप्रियता थी।

उनके सुखद भाविष्य की कामना के साथ उम्मीद है कि वह सक्रिय रहेंगे क्योंकि पत्रकार मुलाजिमत से मुक्त होता है सेवानिवृत्त नहीं होता। कुछ तस्वीरें-

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