HindenburgResearch: हिंडनबर्ग रिसर्च ने आज 10 अगस्त को SEBI की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को लेकर बड़ा दावा किया है। अमेरिकी शॉर्ट-सेलर का दावा है कि सेबी की अध्यक्ष माधबी बुच और उनके पति के पास अदाणी मनी साइफनिंग स्कैंडल में इस्तेमाल की गई अस्पष्ट ऑफशोर एंटिटी में हिस्सेदारी थी।

सुभाष सिंह सुमन-
हिंडनबर्ग ने खुलासे के नाम पर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी वाला काम किया है. मुझे लगता था ‘कहीं का ईंट, कहीं का रोड़ा’ जोड़कर सिर्फ हिन्दी पोर्टल वाले कहानी लिखते हैं, लेकिन नाथन भाई तो उनपर बहुत भारी हैं.
इस रिपोर्ट में पूरा फोकस माधबी पुरी बुच (सेबी चेयरपर्सन) पर है. किसी के पास अगर 10 मिलियन डॉलर की नेटवर्थ है तो यह जरूरी है क्या कि उसने गलत तरीके से पैसे कमाए? टिपिकल कम्युनिस्ट वाला निगेटिव थॉट है. बाकी जितने डॉक्यूमेंट लगाए गए हैं इस रिपोर्ट में, एक भी पुख्ता नहीं हैं.


Whistleblower ने आरोप लगाए 2015 में. उन आरोपों की निश्चित जांच हुई. कुछ नहीं मिला, उसके 2 साल बाद माधबी सेबी की मेंबर बनीं. उसके भी 5 साल बाद सेबी चेयरपर्सन बनीं. और हिंडनबर्ग अब उन आरोपों को खुलासा बताकर सनसनी फैला रहा है. और मजेदार कि ट्रस्ट मी ब्रो टाइप के रिफरेंस भी यूज करने से भाइयों ने परहेज नहीं किया है.
शॉर्ट सेलिंग के लिए सेबी ने टाइट किया तो हिंडनबर्ग ने यह कलाकारी दिखाई है. एसईसी के सामने मुंह से आवाज नहीं आती. काश कि सेबी के पास भी एसईसी की तरह घाव करने वाले दांत होते या फिर भारत थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज का हिस्सा न होता.
हिन्डेनबर्ग की रिपोर्ट आ चुकी है। हिन्डेनबर्ग ने इस बार सीधे सेबी की छाती पर वार किया है। इसी के साथ हिन्डेनबर्ग की पिछली रिपोर्ट को हवा में उड़ाने वाली मोदी सत्ता और न्यायपालिका तक, सभी को कटघरे में खड़ा किया गया है। -सौमित्र रॉय
अडानी सेबी एक हैं, जांच में भरोसा बेईमानी है- हिंडेनबर्ग रिसर्च का खुलासा
पूरे 18 महीनों बाद अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडेनबर्ग ने अडानी और सेबी के गठजोड़ का खुलासा कर बड़ा धमाका किया है. हिंडेनबर्ग के इस धमाके की आंच सबसे ज्यादा सेबी चीफ पर पड़ी है. रिपोर्ट ने सेबी चीफ का पूरा का पूरा कच्चा चिट्ठा मय-सबूत खोलकर बिखेर दिया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि, अडानी पर हमारी रिपोर्ट के अठारह महीने बाद, सेबी ने अडानी की कथित अघोषित वेब ऑफ मॉरीशस और ऑफशोर शेल संस्थाओं की जांच में दिलचस्पी नहीं दिखाई. ये आश्चर्यजनक है. जबकि हमने जबरदस्त सबूत पेश किए थे. हमारी रिपोर्ट में मुख्य रूप से मॉरीशस आधारित शेल संस्थाओं के जाल का खुलासा किया गया था. जिसका उपयोग संदिग्ध अरबों डॉलर के अघोषित लेन-देन, अघोषित स्टॉक हेरफेर के लिए किया जाता था.
रिपोर्ट में इसे भारतीय समूह द्वारा कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया गया था.
इस बार की हिंडेनबर्ग रिपोर्ट में सेबी की चेयरपर्सन की अडानी मनी साइफनिंग घोटाले में इस्तेमाल की गई संस्थाओं में हिस्सेदारी था, इसका खुलासा किया गया है. इसी का हवाला देकर कहा गया है कि यही कारण रहा कि 40 से अधिक स्वतंत्र मीडिया जांचों के साथ-साथ, सबूतों के बावजूद, सेबी ने अडानी समूह के खिलाफ कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं की. रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि 27, जून 2024 को सेबी ने हिंडेनबर्ग को कारण बताओ नोटिस भेजा, लेकिन उसके किसी भी तथ्यामक आरोप को गलत नहीं बताया. सेबी ने तब खुद को वजनदार बताते हुए पहली रिपोर्ट को लापरवाही भरा बताया था.
रिपोर्ट में सेबी की वर्तमान अध्यक्ष माधाबी बुच और उनके पति धवल बुच की अडानी मनी साइफनिंग घाटाले में इस्तेमाल ऑफशोर कंपनियों की हिस्सेदारी को विस्तृत रूप से खोला गया है. वर्तमान सेबी अध्यक्ष माधबी और उनके पति धवल बुच की बरमूडा और मॉरीशस फंड में छिपी हिस्सेदारी उसी तरह पाई गई जिस तरह गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी की निकली थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि माधवी बुच और उनके पति धवल बुच ने पहली बार 5 जून, 2015 को सिंगापुर में आईपीई प्लस फंड 1 के साथ अपना खाता खोला था. आईआईएफएल के एक अधिकारी का हवाला देकर कहा गया है कि बुच पति और पत्नी की कुल संपत्ति 10 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है.
रिपोर्ट में एक लंबे चौड़े लीगल स्टेटमेंट के साथ कहा है कि, हमें नहीं लगता सेबी पर अडानी मामले में जांचकर्ता के रूप में भरोसा किया जा सकता है. हमें लगता है कि हमारे निष्कर्ष ऐसे सवाल उठाते हैं जो आगे की जांच के लायक हैं.


