श्याम मीरा सिंह-
लॉरेंस बेश्नोई गैंग के द्वारा सांसद पप्पू यादव को जान से मारने की धमकी दी है। जिस बाबत उन्होंने केंद्र से सुरक्षा माँगी है। पप्पू यादव लंबे समय से संसद सदस्य रहे हैं। उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार की क़ानून व्यवस्था पर तो क्या ही कहें। कोई उम्मीद नहीं।

हंसराज मीणा-
बाबा सिद्दिकी की हत्या के बाद गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई द्वारा खुलेआम सांसद पप्पू यादव को जान से मारने की धमकी देना देश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। गृह मंत्री अमित शाह को इस गैंग पर अविलंब सख्त कार्रवाई करनी चाहिए अन्यथा तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
मुकेश सिंह-
देश अभी, लॉरेंस-लॉरेंस खेल रहा है। बिहार के पुर्णिया क्षेत्र से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने गैंगेस्टर लॉरेंस विश्नोई को, कानून के ईजाजत देने पर 24 घण्टे के भीतर गैंग के सभी शूटरों के साथ खात्मे की घोषणा की थी। तथाकथित लॉरेंस के एक गुर्गे के कॉल को आज पप्पू यादव ने खुद रिसीव किया है, जिसमें वे अपनी राजनीतिक विवशता को ट्वीट करने की वजह बता रहे हैं और बेहद गिड़गिड़ा भी रहे हैं। लॉरेंस के एक और गुर्गे का रिकॉर्डेड ऑडियो वायरल है जिसमें सिर्फ एक हकला बोल रहा है। यह बातचीत काफी लंबी है जिसमें लॉरेंस का शूटर, कथावाचक प्रतीत हो रहा है। लॉरेंस के सहयोगी इस तरह से बात करेंगे, हमें कतई यकीन नहीं हो रहा है। वैसे सांसद पप्पू यादव की ख्वाहिश, अपनी सुरक्षा को चाक-चौबंद करने की है। बेशक उनकी सुरक्षा, बढ़ाई जा सकती है। लेकिन लॉरेंस विश्नोई के गैंग के द्वारा मिली धमकी, हमें हजम नहीं हो रही है। पप्पू जी आप स्वस्थ रहें और ईश्वर आप को दीर्घ जीवन प्रदान करें।
सांसद पप्पू यादव को मैंने पहली बार 1997 में दिल्ली-पटना-रांची उड़ान में देखा था। वे बिजिनेस क्लास में थे और जिस तरह वे बैठे थे, उससे लगा कि शायद अपनी सीट पर वे आराम नहीं महसूस कर रहे थे इसलिए पाँव बाहर को फैलाये थे। एक पैर आगे की सीट पर रखे थे। उनके बारे में मेरी धारणा वैसी ही थी, जैसी कि मीडिया ने बनाई थी। वे तब राजद से थे और उनकी पत्नी रंजीता कांग्रेस से जीतती थीं। पत्नी बिहार की सिख और वे यादव। बाद में बिहार से राजद सत्ता से बाहर होती गई और मैं भी भूल गया। लेकिन दो साल पहले फेसबुक पर पत्रकार ज्ञानेन्द्र वात्स्यायन का एक संस्मरण पढ़ा कि सांसद पप्पू यादव के दिल्ली स्थित आवास के दरवाज़े हर आमो-ख़ास के लिए खुले होते हैं। बिहार के लोग वहाँ वक्त-बेवक्त कभी भी आ सकते हैं। ख़ासकर वे जिन्हें एम्स में इलाज कराना होता है, वे हर एक के लिए एम्स में सिफ़ारिश करते हैं और मरीज़ चंगा हो कर वापस लौटता है। अब वे राजद में नहीं हैं किंतु सांसद तो हैं ही। अभी पिछले दिनों मेरी पत्नी का ट्रामा सेंटर में ऑपरेशन था तब सहरसा में राजद के वरिष्ठ नेता श्री ललित यादव मिलने आए तो मैंने उनको यह बात बताई। वे बोले, भले अब वे साथ न हों लेकिन अपने क्षेत्र का ऐसा ख़्याल किसी ने नहीं रखा होगा। मेरा मन पप्पू यादव के प्रति श्रद्धा से भर उठा। मेरी इच्छा है कि ऐसे जनप्रिय नेता के दर्शन किए जाएँ। -शम्भूनाथ शुक्ला


