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गुजरात

अडानी, गुजरात व ड्रग्स मामले को लेकर डॉ मुकेश कुमार और निर्णय कपूर में एक्स पर भिड़ंत!

डॉ मुकेश कुमार-

गुजरात में देश का 30 फ़ीसदी ड्रग्स पकड़ा गया है और पत्रकार महोदय गुजरात पुलिस की तारीफ़ कर रहे हैं कि उसकी ज़ीरो टालरेंस की नीति से ऐसा हुआ है।

https://x.com/nirnaykapoor/status/1850555931420930471?s=46

इतनी चापलूसी ठीक नहीं। अरे गुजरात में इतनी ड्रग्स आ क्यों रही है और अगर इतनी पकड़ी गई है तो सोचिए कितनी आई होगी।

अडानी के पोर्ट पर पकड़ी गई ड्रग्स के बारे में भी ज़रा बताइए कि उस पूरे मामले का क्या हुआ, गुजरात पुलिस ने क्या किया?
सच बात तो ये है कि इससे गुजरात पुलिस का निकम्मापन और ड्र्ग माफिया के साथ उसकी मिलीभगत का ही पता चलता है। कुछ पकड़ ली बाक़ी जाने दी…दोनों खुश।


निर्णय कपूर-

गुजरात की 1600 किलोमीटर की समुद्री सीमा को अंतर्राष्ट्रीय ड्रग्स माफिआ जब ट्रांज़िट पॉइंट के तौर पर उपयोग करने की लगातार कोशिश कर रहा हो .. और गुजरात पुलिस उसे लगातार उसे नाकामयाब बना रही हो उसकी जितनी तारीफ़ की जाते उतनी कम है.. सिर्फ इतना ही नहीं ट्रेडिशनल ड्रग्स ही नहीं सिंथेटिक ड्रग्स की फैक्ट्रियां भी बेपर्दा हुई हैं.. डार्क वेब के जरिये भेजे जाने वाले पार्टी ड्रग्स भी बच के निकल नहीं पा रहे हैं …. तो आप क्या चाहते हैं ये सब पकड़ा ना जाये .. शर्म आती है ऐसी सोच पर जी आपको सच का स्वीकार नहीं करने देता .. वैसे “सावन के अंधे को सब हरा नज़र आता है”। एजेंडा जर्नलिज़्म के दिन चले गए महोदय।


डॉ मुकेश कुमार-

एजेंडा जर्नलिज्म तो आप और आपका चैनल करता है निर्णय जी।
गुजरात पुलिस की कारगुजारियां पूरा देश पिछले चौबीस साल से देख रहा है। अपराधियों को संरक्षण देने से लेकर फ़ेंक एनकाउंटर तक हज़ारों मामले आपको हमको मालूम हैं। जाने कितने लेख, रिसर्च पेपर और क़िताबें लिखी जा चुकी हैं। आप भी ये सब बख़ूबी जानते हैं। मगर मैं आपकी मजबूरी समझता हूं। बस इतना कह रहा हूं कि थोड़ा संतुलन रखिए। एकतरफा रिपोर्टिंग से गुजरात का भला नहीं होगा।


निर्णय कपूर-

आदरणीय डॉ मुकेश कुमार जी गुजरात के बारे में आपकी जानकारी उतनी ही है जितनी मेरी चाँद की सतह के बारे में है… इसमें दोष आपका नहीं है, पत्रकारों की उस बिरादरी का है जिसने fact based journalism को बड़ी ही चालाकी से हाशिये पर धकेलने की कोशिश की है… गुजरात और गुजरात की पुलिस को कुंठित मानसिकता के साथ देखने की बजाये, तथ्यों पर भी कभी गौर किया होता तो आज ये जहर न उगल रहे होते.. खैर आप उस eco system का भाग हैं जो गुजरात को लेकर selective amnesia से पीड़ित है… इस लिए इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं करता..


डॉ मुकेश कुमार-

आ गए न संघी शब्दावली पर। वही भाषा, वही विचार। कितना भी छिपाओ संघी संस्कार सामने आ ही जाते हैं। पत्रकारिता की आड़ में हिंदुत्व का प्रचार, यही तो है आपका और आपके चैनल का एजेंडा। लगे रहिए। ध्यान रखिए, हिंदुत्व के इस घृणित और हिंसक दौर के बाद भी पत्रकारिता करनी है। इसलिए थोड़ी सी साख बचाने रखिएगा ताकि पत्रकार बिरादरी में शर्मिंदा न होना पड़े। और हां, मोदी पापा की नक़ल मत कीजिए। उनकी तरह दंभी मत बनिए । जानकार होने का इतना अहंकार अच्छा नहीं।


निर्णय कपूर-

कोई तर्क नहीं बचा तो अब धमकी देने पर उतर आये आप तो .. पिछले 3 दशकों की पत्रकारिता में कई दौर देख लिए हैं जनाब.. इतनी आसानी से नहीं डरने वाला.. खैर सालों से यही करते आ रहे हैं आप लोग .. कंट्रोल खो जाने की छटपटाहट साफ़ दिख रही है आपके इस कॉमेंट में .. वैसे आपको बता दूँ आपके साथी भी जब आपके कॉमेंट पढ़ेंगे तो आप ही की खिल्ली उड़ाएंगे .. हद्द है यार fact based journalism में भी इन्हे कलर दिखता है।

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