अमित चतुर्वेदी-
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने राजभवन में ख़ुद अपनी ही प्रतिमा का अनावरण किया..इस पर मुझे दो बातें कहनी है.. पहली, राज्यपाल जी, प्रतिमा लगवानी ही थी तो थोड़ी अच्छी बनवाते, बिल्कुल हुबहू बनवाने की क्या ज़रूरत थी. और दूसरी, चूँकि आप पश्चिम बंगाल से हैं इसीलिए राज्यपाल जी… TMC!
यशवंत सिंह-
मोदी जी के राज्यपाल उनके ही नक्शे कदम पर चलते हुए ख़ुद की भयंकर वाली ब्रांडिंग में जुटे हैं। देखिए इन राज्यपाल महोदय की शकल। जीते जी ख़ुद की / अपनी ही मूर्ति का राजभवन में अनावरण कर कैसे दाँत चियार रहे हैं। अमृतकाल का पूरा माहौल राग दरबारी से गुंजायमान है!

पुष्प रंजन-
महामहिम गदगद थे-आत्ममुग्ध थे. जब बाँस-बल्ली हुई, तो इनोसेंट बन गए !
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आनंद बोस ने पिछले हफ्ते कोलकाता में अपनी खुद की प्रतिमा का अनावरण कर लिया था. पब्लिक ने जब उनके मसखरेपन का मज़ाक़ उड़ाया, तब राजभवन से स्पष्टीकरण जारी किया, कि वो इससे अनजान थे.
बोस ने एक्स पर एक स्पष्टीकरण में कहा कि मुझे मूर्ति के बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। राजभवन में कई कलाकार कलाकृति प्रस्तुत करते हैं। राजभवन की विज्ञप्ति में कहा गया, “एक रचनात्मक मूर्तिकार ने राज्यपाल आनंद बोस की मूर्ति बनाई थी, और उसे प्रस्तुत किया था. मीडिया में इसे दुर्भाग्य से उनकी खुद की प्रतिमा का अनावरण करने के रूप में वर्णित किया गया है।”
ध्यान से देखिये, मूर्ति में जो वस्त्र उकेरा है शिल्पी ने, वही वाला कोट पहनकर आये आनंद बोस. फिर भी कहते हैं, ‘मुझे मालूम न था.’ बताइये, कितने इनोसेंट हैं महामहिम? इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा . लड़ते हैं, और हाथ में तलवार भी नहीं !

कुछ प्रतिक्रियाएं-
Hemanth kumar sharma- बिल्कुल यह तो बिल्कुल वैसे ही हुआ है जैसे नेहरू ने नेहरू के नाम का भारत रत्न के लिए अनुमोदन किया और फिर नेहरू ने नेहरू को भारत रत्न दिया ।
Kunal shukla- अमृतकाल में राज्यपाल ख़ुद अपनी ही मूर्ति का अनावरण कर रहा है, और कितना विकास लोगे?
Atul mishra- राज्यपाल महोदय एक अपने पिता जी की भी प्रतिमा बनवा कर इंडिया गेट पर लगवा दें… देश का विकास प्रगति की राह में बहुत तेज दौड़ने लगेगा..
Vivek frankmilan- देश के प्रगति पथ में हमारे राजपाल जी का बहुत बड़ा योगदान है, अपने ही मूर्ति को देखकर जब रोज दिन यह अपने दफ्तर में प्रवेश करेंगे तब उनके दिल में जो सुकून होगा उसका वर्णन करना मुमकिन नहीं है महाराज राजपाल की जय हो।। राज्यहित में लिया गया है उनका यह फैसला हमेशा याद रखा जाएगा।
Dinesh khandelwal- वाह जी वाह, सभी राज्यपालों को ये अधिकार दिए जाए। कोई वंचित ना रह जाए।
Arun pandey- इसमें प्रतिमा किस तरफ़ है और ओरिजनल किस तरफ़?



Satya pareek
November 26, 2024 at 12:55 pm
राज्यपाल तो क्या ? सरपंच की भी योग्यता नहीं ऐसे ऐसे नमूनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दुकान सजी हुई है