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राजस्थान पत्रिका को झटका, हाईकोर्ट ने रद्द किया महिला पत्रकार का ​टर्मिनेशन आर्डर

महिला मीडियाकर्मी की होगी बहाली…  राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान पत्रिका अखबार की एक महिला पत्रकार की सेवामुक्ति को गलत मानते हुए उसे बहाल करने का आदेश दिया है। मामला आठ वर्ष पुराना है। सम्पादकीय विभाग में आर्टिस्ट के पद पर काम करने वालीं कुमकुम शर्मा ने जब आर्टिस्ट की तरह ही काम लेने की बात कही तो उन्हें समाचार पत्र की समीक्षा में लगा दिया गया। विरोध करने पर उन्हें आरोप पत्र थमा दिया गया और अंदरूनी जांच की खानापूर्ति कर वर्ष 2009 में टर्मिनेट कर दिया।

महिला मीडियाकर्मी की होगी बहाली…  राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान पत्रिका अखबार की एक महिला पत्रकार की सेवामुक्ति को गलत मानते हुए उसे बहाल करने का आदेश दिया है। मामला आठ वर्ष पुराना है। सम्पादकीय विभाग में आर्टिस्ट के पद पर काम करने वालीं कुमकुम शर्मा ने जब आर्टिस्ट की तरह ही काम लेने की बात कही तो उन्हें समाचार पत्र की समीक्षा में लगा दिया गया। विरोध करने पर उन्हें आरोप पत्र थमा दिया गया और अंदरूनी जांच की खानापूर्ति कर वर्ष 2009 में टर्मिनेट कर दिया।

कुमकुम ने एडवोकेट ऋषभचन्द जैन के माध्यम से श्रम अदालत में वाद दायर किया। लम्बी सुनवाई के बाद अदालत ने प्रबन्धन के पक्ष में फैसला दिया। जैन साहब ने इसे राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने माना कि प्रार्थी से वह काम नहीं करवाया जा सकता, जिसके लिए वह प्रशिक्षित नहीं हो। ऐसे किसी काम में कोताही के लिए उसे दण्डित भी नहीं किया जा सकता। इस मामले में प्रार्थी से ऐसा ही काम लिया जा रहा था, जिसके लिए कि उसकी नियुक्ति नहीं की गई थी। यह प्रार्थी को प्रताड़ित करने की श्रेणी में आता है। उच्च न्यायालय ने प्रार्थी का टर्मिनेशन आदेश रद्द कर दिया है। एडवोकेट जैन साहब ही राजस्थान पत्रिका ओर भास्कर कर्मचारियों का मजीठिया से संबंधित केस लड़ रहे हैं।

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1 Comment

1 Comment

  1. Prem mishra

    December 28, 2017 at 6:04 am

    यह तो होना ही था राजस्थान पत्रिका का पतन शुरु हो गया है गुलाब कोठारी की सिद्धांत की बातें सबसे बड़ा झूठ है

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