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पहली नौकरी का पहला प्रेस कार्ड : जाना था अमर उजाला पहुंच गए दैनिक जागरण!

रवीश शुक्ला-

त्रकार के तौर पर कैरियर बनाने के लिए 2003 में पंजाब विस्थापित हुआ था. नौकरी अमर उजाला में मिलनी थी लेकिन जब तक मैं पहुँचा वहाँ के दरवाज़े बंद हो चुके थे.

इलाहाबाद वापसी के लिए पैसे नहीं बचे थे. तब स्व. रवींद्र कालिया जी के दोस्त जालंधर में दीपक पब्लिशर्स के मालिक ने सुझाया कि जागरण में गीता डोगरा से मिलो. वो उस वक्त जालंधर में फ़ीचर एडिटर होती थी.

यहां गीता जी और अजय शर्मा सर ने मेरी मुलाक़ात निशिकांत ठाकुर और कमलेश सर से करवाई. इंडियन एक्सप्रेस और ET times की न्यूज़ देकर मुझसे अनुवाद करवाया गया.

2003 में मुझे जालंधर के फोकल प्वाइंट के यूनिट में सब एडीटर की नौकरी मिल गई. छह महीने डेस्क पर काम करने के बाद मुझे पटियाला में रिपोर्टिंग करने भेज दिया गया.

साल या डेढ़ साल बाद जब मुझे पक्की नौकरी मिली तब ये आई कार्ड जारी हुआ था. पहली नौकरी का पहला प्रेस कार्ड. कुछ दिन पहले ही पंजाब के मेरे पुराने साथी हरजीत भाई ने फ़ोटो भेजी तो याद ताज़ा हो गई..

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. harjeet singh

    December 25, 2024 at 1:05 pm

    ऐसे हीं आगे बढ़ते रहे रवीश भाई, आपके।साथ बिताए दिन आज भी याद है

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