
संजय कुमार सिंह
नवोदय टाइम्स ने आज दिल्ली में सत्ता पाने के लिए एक दूसरे से लड़ रही तीनों पार्टियों की तीन खबरें एक साथ छापी हैं और लगता है कि सबको बराबर महत्व दिया है। लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा है और यह अमर उजाला में लीड है कि “आंबेडकर को जल परियोजनाओं का श्रेय, कांग्रेस ने किया अनदेखा : मोदी”। कहने की जरूरत नहीं है कि यह अमितशाह पर लगे आंबेडकर के अपमान के आरोप का जवाब या उससे बचने के लिए मोदी का कांग्रेस पर आरोप है। इससे पहले मुद्दे को घुमाने के लिए संसद में जो सब हुआ वह आप जानते हैं और विपक्ष के नेता पर एफआईआर जैसी नामुमकिन मुमिकन है बताने वाली कार्रवाई भी हुई। निश्चित रूप से यह भाजपा की राजनीति का मामला है और उसके सत्ता में रहने के कारण ही चल पा रहा है। भाजपा की चुनाव जीतने की चालें अब सब खुल चुकी हैं और भाजपा हमेशा की तरह मुद्दे पर से ध्यान हटाने में लगी है। आरोपों की जांच कराने, उसपर कार्रवाई और संतोषजनक जवाब देने की बजाय भाजपा पलटवार करती है और यह मीडिया के सहयोग से चल रहा है। उदाहरण के लिए नरेन्द्र मोदी ने जो कहा वह आज लीड है। प्रधानमंत्री का कहा है तो लीड बनाया जा सकता है वरना आरोप है, पुरानी बात है और आरोपों को ही महत्व देना है तो चुनाव से पहले नकद बांटने को क्यों नहीं? इसपर कार्रवाई नहीं किये जाने पर क्यों नहीं? विपक्ष के नेता पर एफआईआर (कार्रवाई नहीं) और नकद बांटने वाला कह रहा है, बांटूंगा। भाजपा की राजनीति ने अगर देश का यह हाल किया है तो उसका काम यही है कि वह चुनाव जीतने में व्यस्त रहती है और मुख्य धारा का मीडिया उसे बताने से बचता है।
बात इतनी ही नहीं है, दिल्ली में भाजपा को अच्छी टक्कर दे रही आम आदमी पार्टी के खिलाफ कांग्रेस अब खुलकर आ गई है। अभी तक यह समझा जाता था कि भाजपा के खिलाफ वोट बंट जायेंगे तो भाजपा जीत जायेगी। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठजोड़ का फायदा नहीं हुआ तो अब कांग्रेस भी भाजपा के खिलाफ है। कहने की जरूरत नहीं है कि भाजपा ने जैसे केंद्र की सत्ता से कांग्रेस को हटाया लगभग वैसे ही आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को दिल्ली की सत्ता से हटाया और कई बार से कामयाब है। अब अगर कांग्रेस को लग रहा है कि वह आम आदमी पार्टी को हराकर सत्ता में आ सकती है और दिल्ली की जनता भले भाजपा को दिल्ली की सत्ता नहीं सौंपे – कांग्रेस को सौंप सकती है तो यह उसका अपना मामला है। लेकिन आम आदमी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस उसपर ढंग का आरोप तो लगाये या अपनी कोई विशेषता तो दिखाये। ऐसा कुछ नहीं करके अजय माकन भी केजरीवल पर ‘एंटीनेशनल’ होने का आरोप लगा रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि आरोप दमदार है पर खबर तो है। लेकिन तीनों खबरें किसी भी सूरत में बराबर नहीं लग रही हैं।

स्क्रीनशॉट में आप पढ़ सकते हैं कि आम आदमी पार्टी ने भाजपा (नेता) पर महिलाओं को नकद बांटने का आरोप लगाया है। भाजपा ने इसे गलत नहीं बताया है, ना इससे इनकार किया है बल्कि बांटते रहने की घोषणा है और ऐसे में कांग्रेस के अजय माकन केजरीवल को एंटीनेशनल कह रहे हैं। कायदे से उन्हें भाजपा के खिलाफ बोलना चाहिये। तभी तो उन्हें भाजपा विरोधी वोट मिलेंगे वरना कांग्रेस के साथ तो वे माने ही जाते हैं। अब गठबंधन को भूल कहने भर से काम नहीं चलेगा। आम आदमी पार्टी के खिलाफ कोई ठोस सबूत होना चाहिये। जो भी हो, यह कांग्रेस की राजनीति है और मेरा मुद्दा वह नहीं है। मेरा मानना है कि ये तीनों खबरें भारत की आज की राजनीति बताती हैं और इनसे पता चलता है कि 10 साल में राजनीति का कितना ह्रास हुआ है। कहने की जरूरत नहीं है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली के लिए बहुत कुछ किया है और भाजपा उसमें रोड़े अटकाती रही है। अब लगभग रोक दिया है। एक खबर आज भी है।
इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया में यह लीड है पर इंडियन एक्सप्रेस की प्रस्तुति भाजपा सरकार के प्रति नरम और उसके अधिकार की बात लगती है जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया ने चुनावी प्रतिद्वंद्विता की खबर की तरह छापा है। हालांकि फ्लैग शीर्षक यही है – दिल्ली के लिए लड़ाई तेज हुई। इसमें भाजपा केंद्र में सत्ता में होने का फायदा उठा रही है तो वह भी बताया जाना चाहिये। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, दिल्ली सरकार ने आप की नई योजनाओं को खारिज किया, केजरीवाल ने भाजपा पर निशाना साधा। इस खबर का इंट्रो है, विभागों ने कहा, छलपूर्ण और अनधिकृत; मुख्यमंत्री अतिशी ने कार्रवाई की चेतावनी दी। जो भी हो, यह तो साफ है कि भाजपा आम आदमी पार्टी को काम नहीं करने दे रही है उसके रास्ते में रोड़ा बन रही है। इसके मुकाबले टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, “अधिकारी बनाम नेता : दिल्ली के विभागों ने आम आदमी पार्टी की दो योजनाओं के खिलाफ चेतावनी दी”। खबर का इंट्रो है, संभावित फ्रॉड से लोगों को लोगों को अलर्ट करने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया। कुल मिलाकर सरकारी योजना को सरकार ने सरकारी खर्च से संभावित फ्रॉड कहा है।
इस हिसाब से स्विस बैंकों में रखा भारतीयों का काला धन वापस आ सकता था, 100 दिन में आ सकता था और इतना है कि वापस आ जाये तो सबको 15 लाख मिलेंगे क्या था? जिनलोगों ने समय रहते जनता को सतर्क नहीं किया वे अभी उन्हीं लोगों का साथ दे रहे हैं। अगर संभावित फ्रॉड है भी तो। यही लोग प्रवेश वर्मा द्वारा नकद बांटने पर ऐसे सख्त नहीं हैं। दिलचस्प यह कि भाजपा ने आरोप लगाया है और टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी खबर के साथ छापा है, भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर राजनीतिक फ्रॉड का आरोप लगाया। आपको पता होगा कि भाजपा पर आरोप है कि वह मतदान से पहले मतदाता सूची से काफी वोट हटवा देती है और काफी नये जुड़वा लेती है। दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल ने उदाहरण के साथ इसकी पोल खोली है और भाजपा जवाब में उन्हें बांग्लादेशी और रोहिंग्या बोल रही है। संजय सिंह ने संसद में नाम लेकर उन्हें पूर्वांचल का बताया है और अरविन्द केजरीवाल ने सवाल उठाया है कि घुसपैठ अगर हो रही है तो उसे रोकना किसका काम है और बांग्लादेश सीमा पार करके वे दिल्ली तक कैसे पहुंच जा रहे हैं। मीडिया में यह सब खबर तो है मु्द्दा नहीं है
जहां तक केंद्र सरकार द्वारा आम आदमी पार्टी को परेशान किये जाने की बात है, इसमें कोई दो राय नहीं है कि आम आदमी पार्टी भाजपा से अच्छी न हो तो बुरी भी नहीं ही होगी। हर तरह से। फिर भी उसे उन कामों के लिए परेशान किया जा रहा है जो निर्वाचित सरकार का काम है और भाजपा की सरकारों ने भी किये हैं। भाजपा पर मतदाताओं को नकद बांटने का आरोप है तो आज ही टाइम्स ऑफ इंडिया की सेकेंड लीड बताती है कि 23-24 में भाजपा को 2244 करोड़ रुपये मिले तो कांग्रेस को सिर्फ 289 करोड़। ऐसे में वह नकद छापकर, सरकारी योजनाओं के खिलाफ विज्ञापन छपवाकर विपक्षी दल का विरोध कर रही है और कांग्रेस नेता उसी दल के नेता को एंटीनेशनल कह रहे हैं जो भाजपा को उसकी चालों और रणनीति को इतनी तगड़ी टक्कर दे रहा है। इस संबंध में हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि एजेंसियां अतिशी को फर्जी मामले में गिरफ्तार करने की योजना बना रही हैं। मेरी चिन्ता यह है कि अतिशी को अगर गिरफ्तार कर लिया जाता है (बदनाम तो किया ही गया है) तो क्या कोई पढ़ा-लिखा आदमी अपना अच्छा-भला कैरियर छोड़कर राजनीति में आयेगा? और नहीं आयेगा तो जो लोग चला रहे हैं वो ऐसे ही चलाते रहेंगे। इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड हिन्दुस्तान टाइम्स में चार कॉलम की खबर है और शीर्षक वैसा है जैसा टाइम्स ऑफ इंडिया का।
आज मैंने जिन खबरों की चर्चा की है उससे पता चलता है कि भाजपा शासन में देश की राजनीति कितनी बदल गई है। उसका क्या नुकसान है और एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा (या नरेन्द्र मोदी का शासन) का शासन कैसा है। फिर भी अखबार आम तौर पर मोदी सरकार की आलोचना नहीं करते हैं। और बात सिर्फ अखबार की नहीं आम पत्रकार, नागरिक और विपक्षी नेता की भी है। जैसा मैंने कहा अजय माकन अरविन्द केजरीवाल को तो एंटी नेशनल कह रहे हैं पर मोदी के मामले में चुप हैं जबक नुकसान ज्यादा मोदी ने किया है और लगातार कर रहे हैं। अखबार और मीडिया विरोध कर रहे होते तो उन्हें अच्छा काम करने की जरूरत होती ताकि वोट मिले। पर अखबार उनका असली या खराब रूप नहीं दिखाते हैं इसलिए वे अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते रहते हैं। उदाहरण के लिए आज दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, “भाजपा की पहचान अच्छा शासन है, कांग्रेस की देरी : मोदी”। एक दूसरी खबर से पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कांग्रेस नेतृत्व वाली पूर्व सरकारों पर तीखा हमला करते हुए उन पर विकास परियोजनाओं में दशकों की देरी और प्रभावी शासन देने में विफल रहने का आरोप लगाया।
आप जानते हैं कि कांग्रेस 10 साल से शासन में नहीं है। उससे पहले देश और कांग्रेस ने सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाना तय किया था तो भाजपा को ही परेशानी थी। उसके बाद बनाये गये मनमोहन सिंह को झूठा बदनाम किया गया और जो आरोप लगाये गये वो साबित नहीं हुए फिर भी नरेन्द्र मोदी कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं जबकि खुद क्या किया है उसे नहीं बताते। यही नहीं उन्होंने कहा है, “स्वतंत्रता के बाद बाबासाहेब अंबेडकर के दृष्टिकोण ने भारत की जल संसाधन और संरक्षण नीतियों का मार्गदर्शन किया। आज भी केंद्रीय जल आयोग उनकी पहल की वजह से मौजूद है, लेकिन कांग्रेस ने कभी उन्हें इसका श्रेय नहीं दिया।” वह भी तब जब और किसी न नहीं, अमित शाह ने ही कहा है कि “आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।” कहने की जरूरत नहीं है कि कांग्रेस इसका विरोध कर रही है पर सवाल उठता है कि श्रेय नहीं देती तो इतना नाम क्यों लेती है वह भी सात जन्मों का स्वर्ग छोड़कर।
मुझे लगता है कि नरेन्द्र मोदी बहुत हल्के और कच्चे नेता हैं। संघ परिवार और मीडिया के साथ प्रचारकों ने उन्हें ऐसा बना दिया है कि ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता है। द टेलीग्राफ की आज की लीड औरों से अलग है। इसके अनुसार ईडी एक ऐसे मामले की जांच कर रहा है जिसमें कनाडा के कुछ कॉलेज और भारत के कुछ लोग मिलकर (इनमें ज्यादातर गुजरात के हैं) मनी लांडरिंग में शामिल हैं। आप जानते हैं कि अवैध रूप से अमेरिका जाने वाले भारतीयों में गुजरात के लोग सबसे ज्यादा है। यह गुजरात मॉडल की नाकामी का मामला लगता है पर इसी का प्रचार कर देश की सत्ता पा गये। हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू की आज की लीड महत्वाकांक्षी और 45,000 करोड़ रुपये की केन बेतवा परियोजना की शुरुआत की है।


